डेलॉयट इंडिया ने चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.1 से 7.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है। निजी निवेश में लगातार सुधार से मांग को अतिरिक्त समर्थन मिलने की उम्मीद है। बहुराष्ट्रीय पेशेवर सेवा कंपनी ने कहा कि हालांकि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापार में व्यवधान आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं के लिए जोखिम बने हुए हैं।
डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि को घरेलू खर्च में मजबूती और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश से समर्थन मिला है। कारोबारों को अब बेहतर संपर्क सुविधा, मजबूत वित्तीय स्थिति और उत्पादन क्षमता का अधिक इस्तेमाल करने का लाभ मिल रहा है जिससे विस्तार की संभावना मजबूत हुई है। मजूमदार ने कहा, ‘‘सवाल यह है कि क्या ये परिस्थितियां आने वाले वर्षों में आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने में निजी निवेश की बड़ी भूमिका सुनिश्चित करेंगी।
हाल के संकेत उम्मीद जगाते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सकल स्थिर पूंजी निर्माण 11.9 प्रतिशत बढ़ा, जो चार साल में इसकी सबसे तेज वृद्धि है।’’
डेलॉयट के आर्थिक परिदृश्य में वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.1 से 7.3 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2027-28 में 6.6 से 7.0 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि निजी निवेश में लगातार सुधार से भारत को मांग का एक अतिरिक्त स्रोत मिलेगा।
साथ ही, इससे भविष्य की आर्थिक वृद्धि के लिए जरूरी उत्पादन क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव और व्यापार में व्यवधान इस अनुमान के लिए जोखिम बने हुए हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए डेलॉयट का जीडीपी वृद्धि अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओईसीडी) के 7.1 प्रतिशत के अनुमान के बराबर है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), एशियाई विकास बैंक (एडीबी), एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स और मूडीज ने सात प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया है। मजूमदार ने कहा कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा विनिर्माण, स्वच्छ ऊर्जा तथा कृत्रिम मेधा (एआई) के बुनियादी ढांचे जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से निजी पूंजीगत व्यय को और गति मिलेगी, क्योंकि इन क्षेत्रों में शुरुआत में बड़े निवेश की जरूरत होती है। उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने कारोबार के विस्तार के लिए जरूरी कई परिस्थितियों में सुधार किया है।
इन सुधारों को निजी निवेश में लगातार बढ़ोतरी में बदलना अब इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां अपनी अगली परियोजनाओं की योजना बनाने, उनके लिए वित्त जुटाने और उन्हें लागू करने को लेकर कितना भरोसा महसूस करती हैं।’’

