रामपुर के किलकारी अस्पताल में तीन नवजात बच्चों की मौत के मामले में 24 घंटे बाद भी आरोपी डॉक्टर नीलोफर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। इससे प्रशासनिक दावों और जमीनी कार्रवाई के बीच विरोधाभास सामने आया है। जिलाधिकारी अजय कुमार त्रिवेदी ने बताया कि अवैध अस्पतालों को बंद करने के निर्देश पहले ही दिए जा चुके थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर दीपा सिंह ने कहा कि संबंधित क्लीनिक में सिजेरियन की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण क्षेत्रीय यूनानी विभाग के तहत है। सीएमओ के अनुसार, सामान्य प्रसव संभव था, लेकिन जबरन कोशिश और लापरवाही के कारण नवजातों की मौत हुई। विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। गंज थाना क्षेत्र स्थित किलकारी अस्पताल में एक नहीं, बल्कि तीन नवजात बच्चों की मौत हुई है। पहली मौत 6 मई को गौसिया डूंगरपुर आसरा कॉलोनी निवासी परिवार के नवजात की हुई थी। इसके बाद 16 मई को नई बस्ती नालापार निवासी गुल आफरीन के नवजात और 17 मई को सूफिया के बच्चे की मौत हो गई। इन घटनाओं के बाद रविवार को स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल को सील कर दिया था। उस समय नोडल अधिकारी डॉ. देवेश चौधरी ने अगले दिन मुकदमा दर्ज कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ। मृतक नवजातों के परिजनों ने रविवार शाम गंज कोतवाली में अलग-अलग तहरीरें भी दी थीं। इसके बावजूद 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की है। गंज थाना पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि बिना सर्जिकल सुविधा और वैध प्रसव व्यवस्था के सीमित पंजीकरण के बावजूद यह अस्पताल वर्षों से कैसे संचालित होता रहा। वहीं, तीन नवजातों की मौत के बाद भी कार्रवाई की रफ्तार धीमी क्यों है। डॉ. नीलोफर महिला जिला अस्पताल में संविदा पर कार्यरत हैं और साथ ही निजी अस्पताल भी संचालित करती हैं, जहां ये मौतें हुईं। सोमवार दोपहर करीब 2 बजे डॉ. नीलोफर सीएमओ कार्यालय पहुंचीं, लेकिन सीएमओ ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया।


