Digital Arrest Fraud: भिलाई में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां अकेले रह रही 62 वर्षीय महिला को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर ठगों ने करीब 7 लाख रुपए हड़प लिए। यह घटना सुपेला थाना क्षेत्र की है और एक बार फिर साबित करती है कि ऑनलाइन ठग अब कितने सुनियोजित और मनोवैज्ञानिक तरीके से लोगों को निशाना बना रहे हैं।
जानें कैसे शुरू हुई ठगी?
आर्य नगर कोहका निवासी निर्मला चौबे के मोबाइल पर 13 मार्च 2026 को एक वीडियो कॉल आया। कॉल उठाते ही स्क्रीन पर 5-7 लोग पुलिस की वर्दी में दिखाई दिए। उनमें से एक ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर “संदीप राव” बताया। ठगों ने महिला को डराते हुए कहा कि उनके नाम से Kotak Mahindra Bank में करोड़ों का संदिग्ध लेन-देन हो रहा है और वे किसी अवैध गतिविधि में फंसी हुई हैं। उन्होंने यहां तक कह दिया कि जल्द ही उनके घर पर छापा पड़ेगा।
लगातार डर और मानसिक दबाव
इसके बाद शुरू हुआ डराने का सिलसिला। कई दिनों तक आरोपियों ने लगातार कॉल, वीडियो कॉल और मैसेज के जरिए महिला को मानसिक रूप से तोड़ दिया।
दिन में कई बार कॉल
“गुड मॉर्निंग”, “गुड नाइट” जैसे मैसेज भेजकर भरोसा बनाना
बार-बार “जेल जाने” की धमकी
महिला को यह भी कहा गया कि अगर उन्होंने किसी को बताया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
पहली किस्त: 3 लाख रुपए
डर के कारण 16 मार्च को महिला ने अपने State Bank of India खाते से 3 लाख रुपए RTGS के जरिए एक खाते में ट्रांसफर कर दिए। अगले ही दिन दो युवक और एक युवती महिला के घर पहुंचे और 4 लाख रुपए की मांग की। जब महिला ने पैसे नहीं होने की बात कही, तो उन्होंने सोना गिरवी रखने की सलाह दी। हैरानी की बात यह रही कि घर में लगे CCTV कैमरों में इन लोगों की कोई स्पष्ट रिकॉर्डिंग नहीं मिल पाई।
सोना गिरवी रखकर दूसरी रकम
ठगों के कहने पर महिला ने Muthoot Finance में सोना गिरवी रखकर 4 लाख रुपए और ट्रांसफर कर दिए। इस बार पैसे एक अन्य बैंक खाते में भेजे गए। ठगों ने भरोसा दिलाया कि “जांच पूरी होते ही 15 अप्रैल के बाद पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा।” इसी झांसे में महिला ने परिवार को भी कुछ नहीं बताया।
Digital Arrest Fraud: फर्जी दस्तावेजों से बनाया भरोसा
ठगों ने महिला को नकली FIR, कोर्ट के आदेश और यहां तक कि “सुप्रीम कोर्ट के जुर्माने” के फर्जी कागज भी दिखाए। लगातार वीडियो कॉल और डॉक्यूमेंट्स के जरिए ऐसा माहौल बनाया गया कि महिला पूरी तरह उनके जाल में फंस गई। जब तय तारीख के बाद भी पैसा वापस नहीं मिला, तब महिला को ठगी का एहसास हुआ। 22 अप्रैल को उन्होंने अपने दामाद के साथ पुलिस चौकी पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
भिलाई में बढ़ते साइबर अपराध
यह कोई अकेला मामला नहीं है। एक दिन पहले भी शहर में दो और साइबर ठगी के केस सामने आए— एक व्यक्ति के खाते से 3.28 लाख रुपए ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए निकाल लिए गए। एक बुजुर्ग का मोबाइल चोरी होने के बाद उनके खाते से लगभग 2 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए गए।
Digital Arrest Fraud: कैसे काम करता है “डिजिटल अरेस्ट” गैंग
इस तरह के मामलों में ठग होते हैं। खुद को पुलिस या एजेंसी का अधिकारी बताते हैं। वीडियो कॉल पर वर्दी पहनकर भरोसा बनाते हैं। फर्जी केस, FIR और कोर्ट ऑर्डर दिखाते हैं। डर और गोपनीयता का दबाव बनाकर पैसे ट्रांसफर करवाते हैं। वहीं पुलिस की साफ सलाह है कि कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर पैसे नहीं मांगती। “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई प्रक्रिया नहीं होती। डराने-धमकाने वाले कॉल को तुरंत काटें। परिवार या पुलिस से तुरंत संपर्क करें।


