वाराणसी में सिपाही से 12 लाख ठगने वाले साइबर-अपराधी गिरफ्तार:सिम स्वैप करके बैंक खाते से पार किए लाखों, सालभर में 11 लोगों को बनाया शिकार

वाराणसी में सिपाही से 12 लाख ठगने वाले साइबर-अपराधी गिरफ्तार:सिम स्वैप करके बैंक खाते से पार किए लाखों, सालभर में 11 लोगों को बनाया शिकार

वाराणसी की साइबर क्राइम टीम ने मोबाइल सिम स्वैपिंग और बिना ओटीपी मांगकर खातों से लाखों रुपये पार करने वाले दो शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इन अपराधियों ने पिछले दिनों सिपाही का मोबाइल नंबर स्वैप कर खाते से 12 लाख रुपए पार किए थे। आरोपी गाजीपुर और बलिया के निवासी हैं, जो एक साल में लगभग 10-11 लोगों को अब तक अपना शिकार बना चुके हैं। वहीं इसके कब्जे से पुलिस को वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन, फर्जी आधार कार्ड सहित दूसरे दस्तावेज और नकदी बरामद की है। साइबर क्राइम की टीम ने पुलिस लाइन के पास से अंतर जनपदीय गिरोह के दो बदमाशों मोहम्मदाबाद गाजीपुर के सुरेंद्र कुमार और बलिया के विनय कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों ने बिना ओटीपी मांगे सिम स्वैप करके पुलिसकर्मी से 12 लाख की ठगी की थी। पुलिस ने बताया कि आरोपी बेहद शातिर तरीके से लोगों के मोबाइल नंबर और बैंक खातों को निशाना बनाते थे। एक साल में 11 लोगों को निशाना बनाकर लाखों की ठगी की गई है। 24 मई 2026 को बलिया निवासी और वाराणसी पुलिस लाइन में तैनात शिवदत्त ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़ित ने बताया कि उनके खाते से 12 लाख रुपये निकाल लिए गए। शिकायत के आधार पर साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी। बैंक खातों से ठगी करने वालों की तलाश में टीम ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, बैंकिंग ट्रांजेक्शन और मोबाइल डेटा के आधार पर कार्रवाई कर दोनों आरोपियों को दबोचा।

पूछताछ में बताए ठगी के तरीके पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह सबसे पहले लोगों के बैंक खातों से जुड़े मोबाइल नंबरों को निशाना बनाता था। आरोपी मोबाइल सिम को चोरी, फर्जी कॉल और सिम अपडेट के नाम पर स्वैप करा लेते थे। सिम सक्रिय होते ही बैंक खाते से जुड़े ओटीपी और अलर्ट मोबाइल पर आने लगते थे। इसके बाद आरोपी पेटीएम, फोनपे, जी पे और मोबी जैसे यूपीआई एप को पीड़ित के नंबर पर सक्रिय कर लेते थे। फिर फर्जी आधार कार्ड और कूटरचित पहचान पत्र तैयार कर कस्टमर सर्विस पॉइंट से नकदी निकालते थे। बैंक खातों से निकाली गई नकदी को गिरोह के सदस्य आपस में बांट लेते थे। आरोपियों के खिलाफ साइबर अपराध समेत विभिन्न धाराओं में पहले से प्राथमिकी दर्ज है। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

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