Crude Oil Supply Crisis: भारत की रिफाइनरियों पर मंडराया संकट, रूस और ईरानी तेल पर अमेरिकी पाबंदियों के बाद क्या बचा रास्ता?

Crude Oil Supply Crisis: भारत की रिफाइनरियों पर मंडराया संकट, रूस और ईरानी तेल पर अमेरिकी पाबंदियों के बाद क्या बचा रास्ता?

US sanctions Russia Iran oil: अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने व्हाइट हाउस में साफ कह दिया कि रूस और ईरान के तेल पर जो छूट दी गई थी, वो अब नहीं बढ़ाई जाएगी। रूसी तेल की छूट शनिवार को खत्म हो गई और ईरानी तेल की छूट रविवार को। ट्रंप सरकार ने पहले ही संकेत दे दिया था कि इन्हें दोबारा जारी नहीं किया जाएगा। यह खबर भारतीय रिफाइनरियों के लिए बड़ा झटका है।

भारत ने जमकर उठाया था फायदा

फरवरी के आखिर में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमले शुरू किए और होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया, तब दुनियाभर में तेल की सप्लाई गड़बड़ा गई। उसी वक्त अमेरिका ने मार्च की शुरुआत में भारत समेत कुछ देशों को अस्थायी छूट दी थी कि वो रूस और ईरान से तेल खरीद सकते हैं। भारत ने इस मौके को दोनों हाथों से लपका। इस दौरान भारतीय रिफाइनरियों ने करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल के ऑर्डर दिए। पहली छूट मिलने के बाद भारत ने इस महीने डिलीवरी के लिए करीब 6 करोड़ बैरल तेल खरीद लिया।

मार्च में भारत ने रोज औसतन 19.8 लाख बैरल रूसी तेल खरीदा जो जून 2023 के बाद सबसे ज्यादा था। सिंगापुर की कंसल्टेंसी फर्म Vanda Insights की फाउंडर वंदना हरि ने ब्लूमबर्ग को बताया था कि भारत जितना रूसी तेल मिल सके उतना खरीद रहा था।

यूक्रेन युद्ध से शुरू हुई थी यह कहानी

2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो पश्चिमी देशों ने रूसी तेल से मुंह फेर लिया। रूस ने भारी छूट पर तेल बेचना शुरू किया। भारत ने वो मौका भांपा और रूस से तेल खरीदना शुरू कर दिया। देखते ही देखते भारत रूसी तेल का सबसे बड़ा समुद्री खरीदार बन गया। लेकिन फिर ट्रंप ने दबाव बनाना शुरू किया। भारी टैरिफ की धमकी दी। रोसनेफ्ट और लुकॉयल जैसी रूसी कंपनियों पर पाबंदियां लगाईं। भारतीय रिफाइनरियों ने खरीदारी घटानी शुरू कर दी।

साल के दूसरे हिस्से में रूसी तेल से भरे जहाज समुद्र में ही खड़े रहे, क्योंकि खरीदार नहीं मिल रहे थे। जनवरी की शुरुआत में समुद्र में करीब 15.5 करोड़ बैरल रूसी तेल तैर रहा था। अब यह आंकड़ा घटकर 10 करोड़ बैरल पर आ गया है।

सात साल बाद ईरानी तेल भी पहुंचा भारत

इस संकट के बीच एक और बड़ी खबर यह है कि भारत में सात साल बाद ईरानी तेल पहुंचा है। करीब 40 लाख बैरल ईरानी कच्चा तेल भारत आया है। अमेरिकी पाबंदियों में आने वाला टैंकर Jaya इस हफ्ते ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पर अपना माल उतार रहा है। वहीं एक अन्य टैंकर Felicity गुजरात के सिक्का बंदरगाह पर। दोनों जहाज शुक्रवार तक रवाना हो जाने की उम्मीद है। पारादीप पर Indian Oil और सिक्का पर Reliance Industries और BPCL काम करती हैं।

भारत की मुश्किल कितनी बड़ी है?

भारत अपनी जरूरत का करीब 90 फीसदी तेल बाहर से मंगाता है और उसका बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते आता है। जब से होर्मुज बंद है, तब से तेल की किल्लत, बढ़ती कीमतें और धीमी आर्थिक रफ्तार का खतरा भारत के सामने है। LNG यानी तरल प्राकृतिक गैस के लिए भी मारामारी है। भारत, फिलीपींस और कई एशियाई देशों ने अमेरिका से गुजारिश की थी कि रूसी तेल की छूट बढ़ाई जाए लेकिन बात नहीं बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को ट्रंप से फोन पर होर्मुज को खुला रखने की बात कही। लेकिन बेसेंट ने किसी सीमित छूट की संभावना पर कुछ नहीं बोला। फिलहाल एक तरफ ईरान का खतरा है दूसरी तरफ अमेरिकी पाबंदियां। भारत के सामने दोनों तरफ से मुश्किल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *