सीकर में चेक अनादरण (Check Bounce) के मामलों में आज N.I.A. कोर्ट ने एक सख्त फैसला सुनाया है। विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट (N.I.A. प्रकरण) ऊषा प्रजापत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 1 वर्ष जेल की सजा सुनाई है। साथ ही, कोर्ट ने आरोपी पर 1,07,000 रुपए का भारी जुर्माना भी लगाया है। सीनियर एडवोकेट पुरूषोत्तम शर्मा ने बताया कि िकरडोली निवासी परिवादी हरिकिशन हरीकिशन एंड कंपनी का प्रोपराइटर हैं और सीकर कृषि मंडी में सब्जी व फलों का व्यापार करते हैं। परिवादी हरिकिशन ने कोर्ट में परिवाद पेश किया था। आरोपी कुरड़ाराम ने 2 अगस्त 2019 को परिवादी की फर्म से 59,334 रुपए के फल और सब्जियां खरीदी थीं। फल-सब्जी की रकम चुकाने के लिए आरोपी कुरड़ाराम ने परिवादी को साइन करके एक चेक दिया था। जब परिवादी ने रकम लेने के लिए चेक को बैंक अकाउंट में जमा कराया तो वह बैंक अकाउंट बंद होने (Account Closed) की टिप्पणी के साथ बाउंस होकर रिटर्न हो गया। चेक बाउंस होने के बाद परिवादी ने एडवोकेट के जरिए आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा और राशि लौटाने की मांग की। लेकिन नोटिस मिलने के बावजूद आराेपी ने ना तो कोई जवाब दिया और ना ही बकाया राशि का भुगतान किया। हार मानकर परिवादी ने कोर्ट की शरण ली। मामले की सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से एडवोकेट पुरुषोत्तम शर्मा, सुखदेव सिंह महला, शीशराम ढाका, भागीरथ ढाका और संजय शर्मा ने पैरवी की। एडवोकेट्स ने कोर्ट में साक्ष्य और तर्क पेश करते हुए बताया कि आरोपी ने जानबूझकर धोखाधड़ी की नीयत से फ्रॉड चेक दिया। जज उषा प्रजापत ने आरोपी कुरड़ाराम को दोषी मानकर 1 साल की जेल और चेक राशि से लगभग दोगुनी राशि यानी 1,07,000 रुपए का जुर्माना लगाया है।


