दरभंगा जिले के जाले प्रखंड क्षेत्र स्थित चक्का कब्रिस्तान की चहारदीवारी गिरने के बाद स्थानीय स्तर पर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने पंचायत समिति योजना के तहत लाखों रुपए की लागत से निर्मित बाउंड्री वॉल के कुछ ही महीनों में ध्वस्त हो जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रखंड प्रमुख फूलो बैठा ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। घटना राढ़ी पूर्वी पंचायत के कुमरौली गांव की है। पंचायत समिति योजना के तहत करीब 14 लाख रुपए की लागत से निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन कुछ दिन पहले आई तेज आंधी के दौरान दीवार का एक हिस्सा गिर गया। इसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। घटिया सामान लगाने का लगाया आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि से बनाई गई नई दीवार मामूली आंधी-तूफान भी नहीं झेल सकी, जिससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। तकनीकी मानकों की अनदेखी हुई। योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और कमीशनखोरी हुई है, जिसकी वजह से दीवार कुछ ही समय में धराशायी हो गई। स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों को ऑनलाइन आवेदन भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। आवेदन में तकनीकी टीम गठित कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, स्वीकृत राशि की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। आरोप- काम सही होता तो दिवार नहीं गिरती माले के राज्य कमिटी सदस्य नैयाज अहमद ने सवाल उठाते हुए कहा कि कब्रिस्तान की पुरानी बाउंड्री का निर्माण पूर्व विधायक विजय मिश्रा के कार्यकाल में हुआ था, जबकि आगे का निर्माण पंचायत प्रमुख की योजना से कराया जा रहा था। अगर निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण होता तो तेज आंधी में दीवार नहीं गिरती। हालांकि गांव के कुछ लोगों ने वायरल वीडियो और लगाए जा रहे आरोपों को भ्रामक बताया है। ग्रामीणों के अनुसार जो दीवार गिरी है, वह सरकारी योजना की नहीं बल्कि गांव के लोगों की ओर से चंदा इकट्ठा कर निजी कोष से बनवाई जा रही थी। कुछ लोग पंचायत चुनाव नजदीक आने के कारण कब्रिस्तान के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। साजिश का लगाया आरोप वहीं, इस मामले में प्रखंड प्रमुख फूलो बैठा का कहना है कि पंचायत समिति योजना के तहत जो निर्माण कराया गया है, वह पूरी तरह सुरक्षित और सही स्थिति में है। जो दीवार गिरी है, उसका निर्माण निजी स्तर पर कराया जा रहा था। कुछ लोग वायरल वीडियो के जरिए उनकी छवि खराब करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। दरभंगा जिले के जाले प्रखंड क्षेत्र स्थित चक्का कब्रिस्तान की चहारदीवारी गिरने के बाद स्थानीय स्तर पर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने पंचायत समिति योजना के तहत लाखों रुपए की लागत से निर्मित बाउंड्री वॉल के कुछ ही महीनों में ध्वस्त हो जाने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रखंड प्रमुख फूलो बैठा ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए इसे राजनीतिक साजिश करार दिया है। घटना राढ़ी पूर्वी पंचायत के कुमरौली गांव की है। पंचायत समिति योजना के तहत करीब 14 लाख रुपए की लागत से निर्माण कार्य कराया गया था। लेकिन कुछ दिन पहले आई तेज आंधी के दौरान दीवार का एक हिस्सा गिर गया। इसके बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे। घटिया सामान लगाने का लगाया आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी राशि से बनाई गई नई दीवार मामूली आंधी-तूफान भी नहीं झेल सकी, जिससे साफ जाहिर होता है कि निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। तकनीकी मानकों की अनदेखी हुई। योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और कमीशनखोरी हुई है, जिसकी वजह से दीवार कुछ ही समय में धराशायी हो गई। स्थानीय लोगों ने संबंधित अधिकारियों को ऑनलाइन आवेदन भेजकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। आवेदन में तकनीकी टीम गठित कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता, उपयोग की गई सामग्री, स्वीकृत राशि की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है। आरोप- काम सही होता तो दिवार नहीं गिरती माले के राज्य कमिटी सदस्य नैयाज अहमद ने सवाल उठाते हुए कहा कि कब्रिस्तान की पुरानी बाउंड्री का निर्माण पूर्व विधायक विजय मिश्रा के कार्यकाल में हुआ था, जबकि आगे का निर्माण पंचायत प्रमुख की योजना से कराया जा रहा था। अगर निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण होता तो तेज आंधी में दीवार नहीं गिरती। हालांकि गांव के कुछ लोगों ने वायरल वीडियो और लगाए जा रहे आरोपों को भ्रामक बताया है। ग्रामीणों के अनुसार जो दीवार गिरी है, वह सरकारी योजना की नहीं बल्कि गांव के लोगों की ओर से चंदा इकट्ठा कर निजी कोष से बनवाई जा रही थी। कुछ लोग पंचायत चुनाव नजदीक आने के कारण कब्रिस्तान के मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं। साजिश का लगाया आरोप वहीं, इस मामले में प्रखंड प्रमुख फूलो बैठा का कहना है कि पंचायत समिति योजना के तहत जो निर्माण कराया गया है, वह पूरी तरह सुरक्षित और सही स्थिति में है। जो दीवार गिरी है, उसका निर्माण निजी स्तर पर कराया जा रहा था। कुछ लोग वायरल वीडियो के जरिए उनकी छवि खराब करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं।


