MP Congress On Jyotiraditya Scindia: मध्य प्रदेश की राजनीति में पक्ष और विपक्ष के बीच वार और पलटवार अक्सर सामने आते रहे हैं। ताजा मामला पूर्व नेता प्रतिपक्ष है। इंदौर के गांधी भवन में कांग्रेस कार्यकर्ता संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था। इस कार्यक्रम के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह राहुल ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दो टूक कहा कि कांग्रेस को अब किसी भी गद्दार की जरूरत नहीं है।
जानें अजय सिंह राहुल और क्या बोले
अजय सिंह राहुल ने दो टूक कहा कि अगर सिंधिया कांग्रेस में वापस आना चाहेंगे, तो वे उन्हें नहीं लेंगे। और अगर इसके बाद भी उन्हें पार्टी में वापस लिया गया, तो वे कांग्रेस छोड़ देंगे।
अजय सिंह उर्फ भैया जी ने क्यों दिया बड़ा बयान
दरअसल संवाद कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता प्रवेश यादव ने सवाल पूछा था कि यदि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है, तो क्या पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं की वापसी होगी? इस पर अजय सिंह उर्फ राहुल भैया ने कहा कि सरकार बनने के बाद कांग्रेस को किसी गद्दार की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि चुनाव से पहले इक्का-दुक्का लोग अगर लौटना चाहेंगे तो इस पर विचार जरूर किया जाएगा।

कांग्रेस मीडिया प्रभारी ने भी किया समर्थन
मामले पर कांग्रेस मीडिया प्रभारी केके मिश्रा ने भी अजय सिंह के बयान का समर्थन किया। बयान के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हैं।
बता दें कि 2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। जिसके बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ सरकार गिर गई थी। कांग्रेस के भीतर आज भी एक बड़ा वर्ग सिंधिया को गद्दारी का प्रतीक के रूप में देखता है। इसलिए जब भी उनकी वापसी की अटकलें तेज होती हैं, तो पार्टी इसका खुलकर विरोध करती है।
अभी क्यों हो रही चर्चा
दरअसल हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर सिंधिया की कांग्रेस में वापसी को लेकर कई तरह की अटकलों की चर्चा तेज थी। उसी संदर्भ में यह बयान भी वायरल हुआ है। बता दें कि सिंधिया के पार्टी छोड़ने से उनके प्रति कांग्रेस में एक आंतरिक नाराजगी है। इसे लोग कांग्रेस के अंदर की गुटबाजी का तनाव भी कह रहे हैं। वहीं सिंधिया को लेकर पुराने असंतोष भी अब तक पार्टी के भीतर बने हुए हैं।
यह भी जानें
राजघराने से कांग्रेस तक: ज्योतिरादित्य सिंधिया ग्वालियर राजघराने से हैं। उनके पिता माधवराव सिंधिया कांग्रेस के बड़े नेताओं में शामिल थे। 2001 में माधवराव सिंधिया की विमान दुर्घटना में मौत के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया में आए और कांग्रेस का बड़ा चेहरा बने।
राहुल गांधी के करीबी नेताओं में गिने जाते थे सिंधिया (2004-2018): 2004 से 2018 का समय ऐसा था जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस के सबसे बड़े युवा चेहरों में गिने जाते थे। उन्हें भविष्य के राष्ट्रीय नेता के रूप में देखा जाता था। माना जाता था कि वे राहुल गांधी के सबसे करीबी नेताओं में से एक थे। इसका मतलब साफ है कि सिंधिया की छवि उस समय भी मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक सीमित नहीं थी। यूपीए सरकार में वे मंत्री रहे, टीवी डिबेट्स में कांग्रेस का चेहरा बने। पार्टी संगठन में तेजी से कद बढ़ रहा था उनका।
लेकिन यही वह समय भी था जब मध्य प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान बढ़ रही थी। कमलनाथ गुट, दिग्विजय गुट औऱ सिंधिया के समर्थकों के बीच शक्ति का संतुलन, पार्टी कुछ इसी तरह बंटी हुई थी। पार्टी की यही गुटबाजी पहले तनाव बनी और बाद में बड़ी राजनीतिक टूट का आधार।
2018 में सीएम की दौड़ में था सिंधिया का नाम
2018 विधानसभा चुनावों में जब कांग्रेस 15 साल बाद सत्ता में आईस, तब मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री की दौड़ में तीन नाम चर्चा में थे, कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया। लेकिन मुख्यमंत्री बने कमलनाथ। इसके बाद ही सिंधिया समर्थकों में नाराजगी बढ़ना शुरू हो गई थी।
2020 में एमपी कांग्रेस में सबसे बड़ा राजनीतिक विस्फोट
मार्च 2020 में सिंधिया ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। उनके साथ ही उनके समर्थकों और कांग्रेस के विधायक रहे 22 नेताओं ने भी इस्तीफा दिया और पार्टी का साथ छोड़ दिया। इसी का असर था कि प्रदेश में कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई और गिर गई। तब फिर बीजेपी की सरकार आई और एक बार फिर शिवराज सिंह चौहान ही प्रदेश के मुखिया बने। सिंधिया ने अपने 22 समर्थकों के साथ बीजेपी जॉइन कर ली। तब से आज तक कांग्रेस में सिंधिया को लेकर यही नैरेटिव बना हुआ है कि वो गद्दार हैं।
कांग्रेस लगातार रहती है हमलावर
बता दें कि तब कांग्रेस ने तब उन पर आरोप लगाए कि जनादेश के साथ विश्वासघात किया, सत्ता के लिए पार्टी छोड़ी और भाजपा को फायदा पहुंचाया। खासतौर पर दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और प्रदेश के कई कांग्रेस नेता खुलकर सिंधिया की आलोचना करते दिखते हैं।
भाजपा में सिंधिया को मिली नई भूमिका
जबकि भाजपा में शामिल होने के बाद सिंधिया एक नई भूमिका में नजर आए। वे राज्यसभा सांसद बने और फिर केंद्रीय मंत्री भी। नागरिक उड्डयन और दूरसंचार मंत्री के रूप में नजर आते हैं। हालांकि चर्चा यह भी रही है कि भाजपा के अंदर भी शुरुआती दौर में पुराने भाजपा नेताओं बनाम सिंधिया समर्थकों के बीच तनाव बना रहता था। यही नहीं 2023 में होने वाले चुनावों में कांग्रेस ने सिंधिया को सरकार गिराने वाले नेता के रूप में भी प्रचारित किया।


