केंद्र सरकार ने देश में परिवहन और माल ढुलाई से जुड़े कामकाज को एक साथ जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एकीकृत परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स प्राधिकरण बनाने को मंजूरी दी। इसका मकसद अलग-अलग परिवहन विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाना और आने वाले वर्षों में देश की परिवहन तथा बुनियादी ढांचे की जरूरतों का पहले से आकलन करना है।
मौजूद जानकारी के अनुसार, यह नया प्राधिकरण वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत काम करेगा और परिवहन क्षेत्र में योजनाओं की तैयारी, परियोजनाओं की तकनीकी जांच, शोध, निगरानी और उनके पूरे होने के बाद असर का आकलन करने वाली शीर्ष संस्था के रूप में काम करेगा। इसमें रेलवे, राजमार्ग, विमानन सहित परिवहन के दूसरे प्रमुख क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था बढ़ने के साथ माल और परिवहन की जरूरत भी तेजी से बढ़ती है। उनके मुताबिक अगर सकल घरेलू उत्पाद में 7% की बढ़ोतरी होती है तो अर्थव्यवस्था में लॉजिस्टिक्स की जरूरत करीब 10% तक बढ़ सकती है। ऐसे में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर परिवहन ढांचे की संयुक्त योजना बनाना जरूरी है।
बता दें कि देश में सड़क, रेलवे लाइन, बंदरगाह, हवाई अड्डे और जलमार्ग जैसी कई बड़ी परियोजनाएं अलग-अलग विभागों के माध्यम से आगे बढ़ाई जाती हैं। इनके बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए सरकार ने पहले ही गति शक्ति व्यवस्था शुरू की थी। अब प्रस्तावित प्राधिकरण इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए परिवहन से जुड़े अलग-अलग क्षेत्रों की दीर्घकालिक योजना को एक साथ जोड़ने का काम करेगा।
देश में परिवहन की योजना लंबे समय से अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में बंटी रही है। इसका असर कई बार परियोजनाओं की गति, लागत और आपसी तालमेल पर पड़ता है। सरकार का कहना है कि नया प्राधिकरण इस बिखरी हुई योजना को एक साझा ढांचे में लाने में मदद करेगा। यह पहल सरकार के 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य और लॉजिस्टिक्स लागत कम करने की योजना का भी हिस्सा है।
नए प्राधिकरण के जिम्मे सड़क, रेलवे, बंदरगाह और समुद्री परिवहन, नागरिक विमानन, आंतरिक जलमार्ग तथा तटीय जहाजरानी से जुड़ी लंबी अवधि की योजनाओं की समीक्षा होगी। इसके अलावा 500 करोड़ रुपये से ज्यादा लागत वाली परिवहन परियोजनाओं की तकनीकी जांच भी की जाएगी। ऐसी परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने और उनके पूरा होने के बाद वास्तविक असर का मूल्यांकन करने की जिम्मेदारी भी प्राधिकरण की होगी।
इस व्यवस्था का एक अहम हिस्सा देश का राष्ट्रीय परिवहन आंकड़ा भंडार तैयार करना होगा। इसके तहत माल ढुलाई और यातायात से जुड़े अलग-अलग स्रोतों के आंकड़ों को एक साथ जोड़ा जाएगा। इसमें वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क के ई-वे बिल, फास्टैग, वाहन पंजीकरण व्यवस्था, जीपीएस और शहरों के यातायात से जुड़े आंकड़े शामिल किए जाएंगे।
इन आंकड़ों की मदद से यह समझने की कोशिश होगी कि देश के किस हिस्से से कितना माल निकल रहा है, वह कहां पहुंच रहा है और किन रास्तों पर परिवहन का दबाव ज्यादा है। इससे परियोजनाओं की योजना केवल अनुमान के आधार पर बनाने के बजाय वास्तविक आंकड़ों के आधार पर तैयार करने में मदद मिल सकती है।
गौरतलब है कि प्राधिकरण राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति 2022 की समीक्षा और जरूरत के अनुसार उसमें बदलाव की सलाह भी देगा। साथ ही परिवहन मंत्रालयों की करीब 5 साल की क्षेत्रीय योजनाओं और उनकी सालाना योजनाओं का भी मूल्यांकन किया जाएगा, ताकि वे राष्ट्रीय परिवहन मास्टर प्लान के साथ तालमेल में रहें।
सरकार का जोर सड़क, रेल, बंदरगाह और जलमार्ग जैसे अलग-अलग साधनों को एक-दूसरे से जोड़कर बहु-माध्यम परिवहन व्यवस्था विकसित करने पर है। इससे माल को एक साधन से दूसरे साधन तक पहुंचाने में समय और लागत कम करने में मदद मिल सकती है। आने वाले वर्षों में बढ़ती अर्थव्यवस्था और व्यापार के साथ परिवहन की मांग को देखते हुए इस नई व्यवस्था को देश के बुनियादी ढांचे की लंबी अवधि की योजना के लिए अहम माना जा रहा है।

