स्टाइपेंड की मांग को लेकर FMG (MBBS) डॉक्टर पिछले 23 दिनों से चिकित्सा शिक्षा निदेशालय (DME) जयपुर में दिन-रात धरने पर बैठे हैं, जबकि 12 दिनों से भूख हड़ताल भी जारी है। डॉक्टरों का कहना है कि NMC के निर्देश और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें अब तक स्टाइपेंड का भुगतान नहीं किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि अन्य राज्यों में FMG (MBBS)इंटर्न को स्टाइपेंड दिया जा रहा है। हाल ही में भाजपा शासित गुजरात सरकार ने भी FMG (MBBS)इंटर्न के लिए ₹21,840 प्रतिमाह स्टाइपेंड मंजूर किया है। ऐसे में डॉक्टरों का सवाल है कि जब अन्य राज्यों में इसी नियम के तहत भुगतान हो सकता है, तो राजस्थान में क्यों नहीं? डॉक्टरों का कहना है कि 23 दिनों से DME में बैठे होने और 12 दिनों से भूख हड़ताल के बावजूद अधिकारियों से संतोषजनक बातचीत नहीं हो रही और मंत्री व संबंधित अधिकारी भी उनकी समस्या का ठोस समाधान नहीं कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थान को लंबित स्टाइपेंड जारी करने के निर्देश के बावजूद डॉक्टरों को अब तक वास्तविक भुगतान और स्पष्ट समयबद्ध समाधान नहीं मिला है। डॉक्टरों का कहना है कि “हम कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट और NMC के निर्देशों के अनुसार अपना अधिकार मांग रहे हैं। जब दूसरे राज्यों में FMG डॉक्टरों को स्टाइपेंड मिल रहा है, तो राजस्थान में हमें 23 दिन तक सड़क पर बैठकर और 12 दिन भूख हड़ताल करके अपना अधिकार क्यों मांगना पड़ रहा है?”

