‘शाम में आइए, एक-एक चीज बताइए कि क्या हो रहा है।’ 28 मई को करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में डिप्टी CM विजय चौधरी से मुलाकात के बाद यह बातें पूर्व CM नीतीश कुमार ने कही। नीतीश कुमार ऐसा कर क्या सुपर CM बनना चाहते हैं? उनका सरकार के काम की रिपोर्ट मांगना संवैधानिक रूप से सही है। मांझी वाली कहानी तो नहीं दोहरा रहे नीतीश। जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में… पूर्व CM नीतीश के बयान के 4 मायने… 1. सरकार से दूर हैं, लेकिन ‘रिमोट’ हमारे हाथ में जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और राज्य की कमान भाजपा के सम्राट चौधरी के हाथों में गई, तब NDA के नेताओं ने स्पष्ट कहा था कि सरकार नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में चलेगी। अब नीतीश कुमार का यह तेवर साफ दिखाता है कि वह भले ही कुर्सी पर न हों, लेकिन बिहार की सत्ता का रिमोट कंट्रोल आज भी उन्हीं के पास है। वह ‘सुपर-सीएम’ की भूमिका में हैं, जो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के फैसलों की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 2. JDU के एजेंडे को दरकिनार नहीं करें मुलाकात के वक्त जब विजय चौधरी ने कैबिनेट में हाल में हुए फैसलों या गतिविधियों का जिक्र किया, तो नीतीश कुमार ने तपाक से कहा, ‘शाम में आकर एक-एक चीज बताइएगा।’ इसका मतलब है कि वे सम्राट सरकार को स्पष्ट मैसेज दे रहे हैं कि JDU की नीतियों और उनके निर्देशों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वह विजय चौधरी (जो सरकार और नीतीश कुमार के बीच एक ब्रिज हैं) के जरिए कैबिनेट के हर एक फैसले की ‘प्रोग्रेस रिपोर्ट’ सीधे मांग रहे हैं। 3. BJP को मैसेज- पूरा कंट्रोल हमारे हाथ में, कमजोर ना समझें विजय चौधरी और नीतीश कुमार की यह मुलाकात और बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली दौरे पर हैं। नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक अनिश्चितता के लिए जाने जाते हैं। कैमरे के सामने ऐसा बयान देकर उन्होंने यह याद दिलाया है कि भले ही वह राज्यसभा जा चुके हों या केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हों, लेकिन बिहार की ब्यूरोक्रेसी और गवर्नेंस पर उनकी पकड़ ढीली नहीं हुई है। उनकी बातें नहीं मानी गई तो आगे कुछ भी हो सकता है। 4. JDU के भीतर ‘सब ठीक है’ की पड़ताल नई सरकार के गठन को करीब डेढ़ महीने का समय बीत रहा है। ऐसे में कयास यह भी हैं कि नीतीश कुमार केवल सरकार नहीं, बल्कि अपनी पार्टी JDU के भीतर चल रही सुगबुगाहट का फीडबैक भी चाहते हैं। वह यह जानना चाहते हैं कि JDU कोटे के मंत्रियों और विधायकों में नए सत्ता समीकरणों को लेकर क्या प्रतिक्रिया है, ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन को दुरुस्त रखा जा सके। डिप्टी CM से काम की रिपोर्ट मांगना संवैधानिक रूप से सही है? संवैधानिक रूप से गलत है, लेकिन गठबंधन की राजनीति के व्यावहारिक नियमों के मुताबिक सही है। संवैधानिक दृष्टिकोणः सरकार की रिपोर्ट नहीं मांग सकते नीतीश संविधान में राज्य सरकार के कामकाज, मंत्रियों की जवाबदेही और फाइलों की समीक्षा को लेकर स्पष्ट प्रावधान है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(2) के मुताबिक, राज्य की मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी है। प्रशासनिक रूप से सरकार का मुखिया मुख्यमंत्री (वर्तमान में सम्राट चौधरी) होता है। केवल मुख्यमंत्री के पास ही संवैधानिक अधिकार है कि वह अपने मंत्रियों से आधिकारिक तौर पर कामकाज की रिपोर्ट या फाइलें मांगें। राजनीतिक और व्यावहारिक दृष्टिकोणः पार्टी अध्यक्ष मंत्रियों से मांग सकते हैं जानकारी भले ही यह कदम संवैधानिक रूप से ‘गैर-कानूनी’ हो, लेकिन गठबंधन सरकारों के व्यावहारिक नियमों में इसे पूरी तरह असंवैधानिक या अवैध भी नहीं कहा जा सकता। गठबंधन सरकारों में अक्सर एक ‘समन्वय समिति’ या साझा न्यूनतम कार्यक्रम होता है। हाल में सत्ता परिवर्तन के समय खुद CM सम्राट चौधरी और डिप्टी विजय कुमार चौधरी ने बयान दिया था, ‘वर्तमान सरकार नीतीश कुमार के मार्गदर्शन और नीतियों पर ही आगे बढ़ेगी।’ विजय चौधरी JDU कोटे से सरकार में डिप्टी CM हैं और नीतीश कुमार पार्टी अध्यक्ष हैं। पार्टी लाइन के तहत अध्यक्ष को अपनी पार्टी के मंत्रियों से यह पूछने का पूरा अधिकार है कि वे सरकार में रहकर पार्टी के एजेंडे को कितना लागू कर पा रहे हैं। राजनीति में सीनियर नेताओं को सरकार के कामकाज की अनौपचारिक जानकारी देना बेहद सामान्य है। जब तक कोई आधिकारिक या क्लासिफाइड सरकारी फाइलें साझा नहीं की जातीं, तब तक सामान्य राजनीतिक चर्चा या प्रगति पर बात करना किसी भी कानून के दायरे का उल्लंघन नहीं है। क्या मांझी वाली कहानी दोहरा रहे नीतीश? कुछ हद तक, हालांकि आज की परिस्थिति मांझी से अलग है। उस दौर वाली कहानी दोहराना नीतीश कुमार के लिए काफी मुश्किल है। मांझी के दौर की 3 कहानियां… 1. जब ट्रांसफर-पोस्टिंग की फाइलें ‘7, सर्कुलर रोड’ से रुक गईं मई 2014 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री आवास (1, अणे मार्ग) छोड़ दिया था और पास ही स्थित ‘7, सर्कुलर रोड’ बंगले में शिफ्ट हो गए थे। लेकिन सत्ता का असली केंद्र यही नया बंगला बन गया था। 2. कैबिनेट के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री का बहिष्कार कर दिया मांझी की कैबिनेट में शामिल अधिकांश सीनियर मंत्री नीतीश कुमार के कट्टर वफादार थे, जो मांझी को सिर्फ एक ‘कामचलाऊ व्यवस्था’ मानते थे। 3. मैं रबर स्टैंप नहीं हूं, मांझी ने लिए 34 फैसले लगातार मिल रही रिपोर्ट और हस्तक्षेप से तंग आकर जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार के रिमोट कंट्रोल को तोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कैबिनेट को बाइपास कर ताबड़तोड़ ऐसे फैसले लेने शुरू किए, जो नीतीश कुमार की नीतियों के खिलाफ थे। ‘शाम में आइए, एक-एक चीज बताइए कि क्या हो रहा है।’ 28 मई को करीब आधे घंटे तक बंद कमरे में डिप्टी CM विजय चौधरी से मुलाकात के बाद यह बातें पूर्व CM नीतीश कुमार ने कही। नीतीश कुमार ऐसा कर क्या सुपर CM बनना चाहते हैं? उनका सरकार के काम की रिपोर्ट मांगना संवैधानिक रूप से सही है। मांझी वाली कहानी तो नहीं दोहरा रहे नीतीश। जानेंगे आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाही में… पूर्व CM नीतीश के बयान के 4 मायने… 1. सरकार से दूर हैं, लेकिन ‘रिमोट’ हमारे हाथ में जब नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया और राज्य की कमान भाजपा के सम्राट चौधरी के हाथों में गई, तब NDA के नेताओं ने स्पष्ट कहा था कि सरकार नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में चलेगी। अब नीतीश कुमार का यह तेवर साफ दिखाता है कि वह भले ही कुर्सी पर न हों, लेकिन बिहार की सत्ता का रिमोट कंट्रोल आज भी उन्हीं के पास है। वह ‘सुपर-सीएम’ की भूमिका में हैं, जो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के फैसलों की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं। 2. JDU के एजेंडे को दरकिनार नहीं करें मुलाकात के वक्त जब विजय चौधरी ने कैबिनेट में हाल में हुए फैसलों या गतिविधियों का जिक्र किया, तो नीतीश कुमार ने तपाक से कहा, ‘शाम में आकर एक-एक चीज बताइएगा।’ इसका मतलब है कि वे सम्राट सरकार को स्पष्ट मैसेज दे रहे हैं कि JDU की नीतियों और उनके निर्देशों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वह विजय चौधरी (जो सरकार और नीतीश कुमार के बीच एक ब्रिज हैं) के जरिए कैबिनेट के हर एक फैसले की ‘प्रोग्रेस रिपोर्ट’ सीधे मांग रहे हैं। 3. BJP को मैसेज- पूरा कंट्रोल हमारे हाथ में, कमजोर ना समझें विजय चौधरी और नीतीश कुमार की यह मुलाकात और बयान ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी दिल्ली दौरे पर हैं। नीतीश कुमार अपनी राजनीतिक अनिश्चितता के लिए जाने जाते हैं। कैमरे के सामने ऐसा बयान देकर उन्होंने यह याद दिलाया है कि भले ही वह राज्यसभा जा चुके हों या केंद्रीय राजनीति में सक्रिय हों, लेकिन बिहार की ब्यूरोक्रेसी और गवर्नेंस पर उनकी पकड़ ढीली नहीं हुई है। उनकी बातें नहीं मानी गई तो आगे कुछ भी हो सकता है। 4. JDU के भीतर ‘सब ठीक है’ की पड़ताल नई सरकार के गठन को करीब डेढ़ महीने का समय बीत रहा है। ऐसे में कयास यह भी हैं कि नीतीश कुमार केवल सरकार नहीं, बल्कि अपनी पार्टी JDU के भीतर चल रही सुगबुगाहट का फीडबैक भी चाहते हैं। वह यह जानना चाहते हैं कि JDU कोटे के मंत्रियों और विधायकों में नए सत्ता समीकरणों को लेकर क्या प्रतिक्रिया है, ताकि आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संगठन को दुरुस्त रखा जा सके। डिप्टी CM से काम की रिपोर्ट मांगना संवैधानिक रूप से सही है? संवैधानिक रूप से गलत है, लेकिन गठबंधन की राजनीति के व्यावहारिक नियमों के मुताबिक सही है। संवैधानिक दृष्टिकोणः सरकार की रिपोर्ट नहीं मांग सकते नीतीश संविधान में राज्य सरकार के कामकाज, मंत्रियों की जवाबदेही और फाइलों की समीक्षा को लेकर स्पष्ट प्रावधान है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(2) के मुताबिक, राज्य की मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधानसभा के प्रति उत्तरदायी है। प्रशासनिक रूप से सरकार का मुखिया मुख्यमंत्री (वर्तमान में सम्राट चौधरी) होता है। केवल मुख्यमंत्री के पास ही संवैधानिक अधिकार है कि वह अपने मंत्रियों से आधिकारिक तौर पर कामकाज की रिपोर्ट या फाइलें मांगें। राजनीतिक और व्यावहारिक दृष्टिकोणः पार्टी अध्यक्ष मंत्रियों से मांग सकते हैं जानकारी भले ही यह कदम संवैधानिक रूप से ‘गैर-कानूनी’ हो, लेकिन गठबंधन सरकारों के व्यावहारिक नियमों में इसे पूरी तरह असंवैधानिक या अवैध भी नहीं कहा जा सकता। गठबंधन सरकारों में अक्सर एक ‘समन्वय समिति’ या साझा न्यूनतम कार्यक्रम होता है। हाल में सत्ता परिवर्तन के समय खुद CM सम्राट चौधरी और डिप्टी विजय कुमार चौधरी ने बयान दिया था, ‘वर्तमान सरकार नीतीश कुमार के मार्गदर्शन और नीतियों पर ही आगे बढ़ेगी।’ विजय चौधरी JDU कोटे से सरकार में डिप्टी CM हैं और नीतीश कुमार पार्टी अध्यक्ष हैं। पार्टी लाइन के तहत अध्यक्ष को अपनी पार्टी के मंत्रियों से यह पूछने का पूरा अधिकार है कि वे सरकार में रहकर पार्टी के एजेंडे को कितना लागू कर पा रहे हैं। राजनीति में सीनियर नेताओं को सरकार के कामकाज की अनौपचारिक जानकारी देना बेहद सामान्य है। जब तक कोई आधिकारिक या क्लासिफाइड सरकारी फाइलें साझा नहीं की जातीं, तब तक सामान्य राजनीतिक चर्चा या प्रगति पर बात करना किसी भी कानून के दायरे का उल्लंघन नहीं है। क्या मांझी वाली कहानी दोहरा रहे नीतीश? कुछ हद तक, हालांकि आज की परिस्थिति मांझी से अलग है। उस दौर वाली कहानी दोहराना नीतीश कुमार के लिए काफी मुश्किल है। मांझी के दौर की 3 कहानियां… 1. जब ट्रांसफर-पोस्टिंग की फाइलें ‘7, सर्कुलर रोड’ से रुक गईं मई 2014 में नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री आवास (1, अणे मार्ग) छोड़ दिया था और पास ही स्थित ‘7, सर्कुलर रोड’ बंगले में शिफ्ट हो गए थे। लेकिन सत्ता का असली केंद्र यही नया बंगला बन गया था। 2. कैबिनेट के मंत्रियों ने मुख्यमंत्री का बहिष्कार कर दिया मांझी की कैबिनेट में शामिल अधिकांश सीनियर मंत्री नीतीश कुमार के कट्टर वफादार थे, जो मांझी को सिर्फ एक ‘कामचलाऊ व्यवस्था’ मानते थे। 3. मैं रबर स्टैंप नहीं हूं, मांझी ने लिए 34 फैसले लगातार मिल रही रिपोर्ट और हस्तक्षेप से तंग आकर जीतन राम मांझी ने नीतीश कुमार के रिमोट कंट्रोल को तोड़ने का फैसला किया। उन्होंने कैबिनेट को बाइपास कर ताबड़तोड़ ऐसे फैसले लेने शुरू किए, जो नीतीश कुमार की नीतियों के खिलाफ थे।


