CJP Protests Impact UP elections 2027| सीजेपी प्रोटेस्ट का यूपी चुनाव पर क्या पड़ेगा असर | Teh Tak Part 5

CJP Protests Impact UP elections 2027| सीजेपी प्रोटेस्ट का यूपी चुनाव पर क्या पड़ेगा असर | Teh Tak Part 5

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बारे में सबसे अहम बात सिर्फ यह नहीं है कि उन्होंने मई में एक मीम बनाया, जून में एक आंदोलन का नेतृत्व किया और जुलाई में एक मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया। अहम बात यह है कि वे एक दलित नेता हैं, जिन्हें एक ऐसे आंदोलन के चेहरे के रूप में स्वीकार किया गया है, जो युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हुआ है। ये वे युवा हैं जो भारत में 12 साल पहले शुरू हुए भाजपा के वर्चस्व के दौर में बड़े हुए हैं। CJP कोई ऐसी राजनीतिक पार्टी नहीं है जो चुनाव लड़ेगी, लेकिन इसे आज का सबसे प्रभावशाली राजनीतिक इन्फ्लुएंसर कहा जा सकता है। दिपके की पृष्ठभूमि CJP को ऐसे सामाजिक आधार तक पहुँचने में मदद करती है, जो पारंपरिक रूप से उन लोगों की पहुँच से बाहर रहा है जिन्हें ऐतिहासिक रूप से विशेषाधिकार प्राप्त थे। आसान शब्दों में कहें तो, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित करने की साजिश रचने का आरोप है। भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के भीतर के सूत्रों पर आधारित खबरों के सामने आने और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के मामलों के बढ़ने के बाद, यह मुद्दा एक बड़ा विवाद बन गया है।

यूपी चुनाव पर असर

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर के विरोध-प्रदर्शनों के अक्सर राजनीतिक परिणाम होते हैं, खासकर तब जब इनमें युवा मतदाता शामिल हों। राष्ट्रीय स्तर के विरोध-प्रदर्शनों से व्यापक चर्चा छिड़ती है और अक्सर इनका असर भी पड़ता है। इस आंदोलन को युवा चला रहे हैं, जिनमें से कई पहली या दूसरी बार वोट देने वाले मतदाता हैं। उनके लिए मुद्दा सबसे अहम है और वे उसी पर केंद्रित हैं। यह मौजूदा सरकारों के लिए एक चुनौती है, खासकर उन पांच राज्यों में जहां आने वाले महीनों में चुनाव होने हैं। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि यह आंदोलन उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी असर डाल सकता है। हालांकि कुछ जानकार ये भी कहते हैं कि चुनावी असर के बारे में कुछ भी कहना अभी जल्दबाजी होगी, क्योंकि राजनीतिक नैरेटिव (विमर्श) अक्सर चुनाव के करीब आने पर ही आकार लेते हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान पेपर लीक भी एक मुद्दा था, लेकिन ‘संविधान बचाओ’ के नैरेटिव ने इसे पीछे छोड़ दिया। 2027 के विधानसभा चुनाव करीब आने पर ही यह साफ हो पाएगा कि कौन सा नैरेटिव मतदाताओं के बीच ज्यादा असर डालता है।

राष्ट्रीय राजनीति पर प्रभाव 

इंडिया गठबंधन ने CJP द्वारा बनाई गई जगह को भरते हुए, छात्रों के बिखरे हुए विरोध-प्रदर्शनों को दिल्ली और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में एक संगठित और संस्थागत आंदोलन में बदल दिया है। इसने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) को एक स्पष्ट और राजनीतिक रूप से विभाजित लक्ष्य बना दिया है, जो कि केंद्रीय जांच एजेंसियों को लेकर चल रही बहसों जैसा ही है। ‘जेन-Z’ (Gen-Z) राजनीति की सीमाएं: ‘जंतर-मंतर 2.0’ की विफलता यह दिखाती है कि डिजिटल माध्यम से लोगों को एकजुट करने की भी एक सीमा होती है। जब तक कोई सीधा और बुनियादी मुद्दा (जैसे पेपर लीक, रेलवे की नौकरियां, या अग्निपथ) सामने न हो, तब तक मध्यम वर्ग के युवा और विश्वविद्यालय के छात्र केवल प्रक्रियागत या संस्थागत शिकायतों को लेकर लंबे समय तक संघर्ष जारी नहीं रखते।

सीजेपी असल में क्या चाहते हैं?

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल इस्तीफा।

इस पूरे आंदोलन की सबसे प्रमुख सार्वजनिक मांग मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाना है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि मौजूदा नेतृत्व में मतदाता सूचियों से नाम हटाने की प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण और अपारदर्शी तरीके से चलाई जा रही है।

SIR प्रक्रिया को रद्द करना या उसमें पारदर्शी बदलाव

पहचान और दस्तावेजों के पूर्वव्यापी (पुराने रिकॉर्ड्स के आधार पर) सत्यापन के नियमों पर तत्काल रोक लगाना, क्योंकि इसका सबसे ज्यादा खामियाजा प्रवासी मजदूरों, गरीबों और वंचित तबके के मतदाताओं को भुगतना पड़ रहा है।

हटाए गए मतदाताओं की सूची का सार्वजनिक ऑडिट

ड्राफ्ट मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले, बूथ स्तर पर काटे गए नामों की सूची को ठोस और सत्यापन योग्य कारणों के साथ सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करना अनिवार्य किया जाए।

राजनीतिक जमीन और पहचान

सीजेपी (CJP) के संस्थापकों के लिए यह समकालीन युवा राजनीति में अपनी एक अलग और आक्रामक पहचान बनाने की कोशिश है। वहीं ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के लिए यह आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का एक ऐसा नागरिक मंच तैयार करता है, जिससे वे खुद सीधे तौर पर चुनावी स्वार्थ से प्रेरित नजर न आएं।

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