प्रदेश में गेहूं उपार्जन व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है। वे आगामी दिनों में उपार्जन केन्द्रों का आकस्मिक निरीक्षण करेंगे और बिना पूर्व सूचना किसी भी केन्द्र पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत जांचेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री किसानों से सीधा संवाद कर यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें सभी सुविधाएं समय पर और सुचारू रूप से मिल रही हैं या नहीं। जनसंपर्क सीधी के अधिकारी मुकेश मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि यह सूचना बुधवार रात करीब 10 बजे सार्वजनिक की गई। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान तौल प्रक्रिया, भुगतान व्यवस्था, गुणवत्ता परीक्षण और किसानों के लिए उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं का विशेष परीक्षण किया जाएगा। पिछले दौरे में कलेक्टर को हटाया गया था गौरतलब है कि मुख्यमंत्री का यह सख्त रुख नया नहीं है। 22 मार्च को उन्होंने सीधी जिले का आकस्मिक दौरा किया था, जहां व्यवस्थाओं में लापरवाही सामने आने पर उन्होंने तत्काल बड़ी कार्रवाई करते हुए सीधी कलेक्टर स्वरोचित सोमवंशी को पद से हटाने के निर्देश दिए थे। साथ ही जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक पी.एस. धनवाल को भी तत्काल निलंबित करने के आदेश दिए गए थे। उपार्जन केन्द्रों पर किसानों के लिए पेयजल, छायादार विश्राम स्थल सहित आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। किसानों को अब किसी एक केन्द्र तक सीमित नहीं रखा गया है, वे जिले के किसी भी उपार्जन केन्द्र पर गेहूं बेच सकते हैं। तौल और उपार्जन क्षमता बढ़ाई गई तौल प्रक्रिया को तेज बनाने के लिए तौल कांटों की संख्या बढ़ाकर 6 कर दी गई है, जिसे आवश्यकता अनुसार और बढ़ाया जा सकता है। बारदाने, हम्माल-तुलावटी, सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट कनेक्टिविटी और गुणवत्ता परीक्षण उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार ने एफएक्यू मापदंडों में भी शिथिलता दी है, जिससे अधिक किसानों को लाभ मिल सके। उपार्जन की गति बढ़ाने के लिए स्लॉट बुकिंग क्षमता 1000 क्विंटल से बढ़ाकर 2250 क्विंटल कर दी गई है, जिसे जरूरत पड़ने पर 3000 क्विंटल तक बढ़ाया जा सकता है। वर्तमान में किसानों से गेहूं की खरीदी 2625 रुपए प्रति क्विंटल (2585 रुपये समर्थन मूल्य + 40 रुपए बोनस) की दर से की जा रही है। किसानों की सुविधा के लिए प्रत्येक शनिवार को भी उपार्जन कार्य जारी रहेगा।


