मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज राजगीर मलमास मेला का करेंगे उद्घाटन:22 कुंड, 52 धाराओं में तीन शाही स्नान का महायोग; नेपाल, श्रीलंका से आएंगे श्रद्धालु, साधु-संत

नालंदा जिले के राजगीर में आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मलमास मेला का उद्घाटन करेंगे। ब्रह्मकुंड परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और ध्वजारोहण के साथ मेले का उद्घाटन किया जाएगा। ध्वजारोहण के बाद मुख्य कार्यक्रम सभा भवन में स्थानांतरित होगा, जहां पंडा समिति के पदाधिकारियों द्वारा स्मृति चिह्न देकर मुख्यमंत्री का नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। एक महीने यानी 15 जून तक चलने वाले इस मेले में राजगीर के पवित्र गर्म पानी के 22 कुंड, 52 धाराओं में तीन शाही स्नान का महायोग है। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालुओं समेत नेपाल और श्रीलंका के साधु-संत, ऋषि मुनि शामिल होंगे। मान्यताओं के अनुसार, इन कुंड में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप और कष्ट धुल जाते हैं। मेले का आयोजन पर्यटन विभाग और नालंदा जिला प्रशासन की ओर से किया जा रहा है। सामान्य दिनों में हजारों श्रद्धालु जुटते हैं, लेकिन इन प्रमुख शाही स्नान के दिनों में लगभग 2 से 2.5 लाख श्रद्धालु एक साथ कुंडों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इस दौरान देश के कोने-कोने से नागा साधु, अखाड़ों के महामंडलेश्वर और तपस्वी साधु-संतों का आगमन होते है। पंचांग के अनुसार, हर तीसरे साल आने वाले 13वें महीने को अधिमास, पुरुषोत्तम मास या मलमास कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस पवित्र महीने की अवधि में हिंदू धर्म के सभी 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में प्रवास करते हैं। यही कारण है कि मनोकामनाओं, आत्मशुद्धि और वांछित फलों की प्राप्ति के लिए तीर्थयात्री, ऋषि-मुनि, साधु-संत और सैलानी यहां पूरे महीने प्रवास करते हैं। राजगीर में चौबीसों घंटे मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और भजनों की गूंज सुनाई देती है। श्रद्धालुओं के लिए जर्मन हैंगर पंडाल और वीआईपी टेंट सिटी की व्यवस्था लाखों-करोड़ों की संख्या में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की सुख-सुविधा, सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए नालंदा जिला प्रशासन और बिहार सरकार के विभिन्न विभागों ने इस बार व्यापक व्यवस्था की है। गर्मी के मौसम को देखते हुए तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए राजगीर के 14 प्रमुख स्थलों पर 14 विशाल प्रवास केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 11 जगहों पर अत्यधिक आधुनिक जर्मन हैंगर तकनीक से बने विशाल वाटरप्रूफ पंडालों का निर्माण किया गया है, जबकि 3 जगहों पर मजबूत वाटरप्रूफ यात्री शेड लगाए गए हैं। स्टेट गेस्ट हाउस के विशाल मैदान में एक बेहद आलीशान वीआईपी टेंट सिटी का निर्माण किया गया है, जिसकी कुल आवासन क्षमता 6 हजार लोगों की है। इन सभी स्थलों पर मिस्ट कूलर, बड़े पंखे, पर्याप्त रोशनी, पेयजल, शौचालय और सीसीटीवी कैमरों की पुख्ता व्यवस्था की गई है। हर घर गंगाजल; 300 प्याऊ से होगी शुद्ध पेय आपूर्ति मेले में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए पीएचईडी विभाग की ओर से पूरे मेला क्षेत्र में 30 अलग-अलग स्थानों पर 300 प्याऊ लगाए हैं। इन प्याऊ के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के तहत गंगाजल की निर्बाध आपूर्ति की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को साक्षात गंगा मैया का जल पीने को मिलेगा। इसके अलावा विभाग ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को मिलाकर 20 नए चापाकल लगाए हैं और पहले से खराब पड़े 60 चापाकलों की मरम्मत की गई है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 15 बड़े पेयजल टैंकरों को हर समय रिजर्व मोड में रखा गया है। प्रशासन ने प्रतिदिन लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की है और पानी की गुणवत्ता में कोई कमी न आए, इसके लिए पीएचईडी की विशेष टीमों की ओर से नियमित रूप से जल स्रोतों की रासायनिक जांच की जाएगी। महिला के लिए 1000 से अधिक शौचालय और सुरक्षित चेंजिंग रूम महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए शौचालय की अलग-अलग व्यवस्था की गई है। चेंजिंग रूम के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पीएचईडी की ओर से 750 आधुनिक शौचालयों का निर्माण पूरा किया गया है, जिसमें 350 शौचालय विशेष रूप से पुरुषों और 350 शौचालय महिलाओं के लिए पूरी तरह आरक्षित रखे गए हैं। इसके अलावा सड़कों पर 75 नए यूरिनल लगाए गए हैं। नगर परिषद राजगीर ने भी 250 अस्थायी शौचालयों का निर्माण कराया है और शहर के 13 स्थायी सार्वजनिक शौचालयों को दुरुस्त किया है। मेला क्षेत्र में करीब 1000 से अधिक शौचालयों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही स्नान के बाद महिलाओं की सुविधा के लिए ब्रह्मकुंड, वैतरणी घाट और सूर्यकुंड को मिलाकर 25 बेहद सुरक्षित और आधुनिक चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। मलमास मेले को लेकर क्या हैं पौराणिक कथाएं मलमास मास को लेकर हिंदू धर्म में कई बेहद रोचक और ज्ञानवर्धक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि जब काल गणना के अनुसार 13वें महीने का निर्माण हुआ, तो इसके अवगुणों और मलिनता के कारण कोई भी देवता इसका उत्तराधिकारी या स्वामी बनने को तैयार नहीं हुआ। इस संकट की घड़ी में भगवान विष्णु ने आगे बढ़कर इसे सहर्ष स्वीकार किया और इसे अपना सबसे प्रिय नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ दिया। भगवान विष्णु के साथ-साथ स्वर्ग के सभी 33 कोटि देवता एक महीने के लिए राजगीर आकर रहने लगे। यही कारण है कि इस एक महीने के दौरान देश के अन्य सभी हिस्सों में मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं, लेकिन राजगीर की धरती पर पूजा-पाठ, दान-पुण्य और स्नान करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है। ‘मलमास मेले में राजगीर में एक भी कौआ नहीं दिखता’ राजगीर की भौगोलिक और धार्मिक महत्ता को लेकर एक और अत्यंत प्रसिद्ध लोककथा कागभुशुण्डि यानी कौए से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा की इस पवित्र भूमि पर सभी 33 कोटि देवताओं को राजगीर आने का निमंत्रण दिया जा रहा था, तब किसी अज्ञात कारणवश कागभुशुण्डि को न्योता नहीं भेजा गया। इस अलौकिक व्यवस्था और मान-सम्मान की मर्यादा के कारण ही पूरे एक महीने तक चलने वाले इस महामेले के दौरान राजगीर के पूरे भौगोलिक क्षेत्र में एक भी कौआ कहीं दिखाई नहीं पड़ता है। स्वाद और सेहत का संगम; 25 स्थानों पर ‘दीदी की रसोई’ का संचालन मेले में आने वाले गरीब और आम श्रद्धालुओं को बेहद कम कीमत पर स्वच्छ, पौष्टिक और घरेलू स्वाद का भोजन उपलब्ध कराने के लिए जीविका दीदियों का सहारा लिया गया है। इस बार राजगीर के 14 सबसे प्रमुख स्थानों पर कुल 25 ‘दीदी की रसोई’ का संचालन किया जाएगा। स्वास्थ्य व्यवस्था; राजगीर में खड़ी हुई ‘मिनी मेडिकल सिटी’ स्वास्थ्य विभाग ने राजगीर में एक मिनी मेडिकल सिटी खड़ी की है। मेले के मुख्य केंद्रों जैसे टेंट सिटी, वीआईपी टेंट सिटी, मेला थाना, ब्रह्मकुंड के ऊपरी व निचले हिस्से, रेलवे स्टेशन, पीएचईडी कैंपस और वैतरणी घाट समेत 8 सबसे महत्वपूर्ण जगहों पर पूरी तरह क्रियाशील अस्थायी अस्पतालों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा पूरे मेला क्षेत्र में 18 अलग-अलग जगहों पर विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए 16 अत्याधुनिक एम्बुलेंस की चौबीसों घंटे तैनाती की गई है, जबकि संकरी गलियों में घूम-घूम कर इलाज करने के लिए 4 चलंत चिकित्सा दल तैनात रहेंगे। इस पूरी व्यवस्था को संभालने के लिए एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां 32 मेडिकल सुपरवाइजर और 260 से अधिक ट्रेड पारामेडिकल कर्मी तैनात रहेंगे। स्थानीय अनुमंडलीय अस्पताल राजगीर और भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान पावापुरी को किसी भी बड़ी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखते हुए विशेष बेड आरक्षित किए गए हैं, जबकि ब्रह्मकुंड के मुख्य द्वार पर एक हाई-टेक विशेष चिकित्सा शिविर चौबीसों घंटे डॉक्टरों की टीम के साथ तैनात रहेगा। अभैद्य सुरक्षा चक्रव्यूह; 550 सीसीटीवी कैमरे और घुड़सवार पुलिस मेला क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए लगभग 950 दंडाधिकारियों और 530 से अधिक अनुभवी पुलिस पदाधिकारियों की चौबीसों घंटे तैनाती की गई है। इसके अलावा मेला क्षेत्र के दुर्गम और रेतीले रास्तों पर गश्त के लिए विशेष घुड़सवार पुलिस बल की भी प्रतिनियुक्ति की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती देने के लिए 100 चुनिंदा होमगार्ड जवानों को लगाया गया है। इसके अलावा, 38 विशेष पुलिस चौकियां यानी टीओपी और 16 ऊंचे वॉच टावर बनाए गए हैं। पूरे मेले की लाइव निगरानी के लिए 250 से अधिक जगहों पर 550 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनका सीधा संपर्क कंट्रोल रूम से होगा। सुरक्षा बलों को मैन पैक वायरलेस सेट, ड्रैगन लाइट्स और रात में भी साफ देखने वाले नाइट विजन उपकरणों से लैस किया गया है। स्वच्छता महाभियान; 3 जोनों में 1700 सफाईकर्मियों की 24 घंटे तैनाती मेला क्षेत्र को 3 बड़े सफाई जोनों में विभाजित किया गया है। तीन पालियों को मिलाकर 617 मजदूर, 87 सफाई पर्यवेक्षक, 20-25 कचरा उठाने वाले वाहन और 57 ड्राइवर समेत 1700 से अधिक मानवबल को काम पर लगाया गया है। शौचालयों और सोकपीट की सफाई के लिए 9 आधुनिक सेक्शन मशीनें तैनात की गई हैं। संपूर्ण मेला क्षेत्र, गलियों और नालियों में नियमित रूप से एंटी-लार्वा फॉगिंग, चूना और ब्लीचिंग पाउडर का सघन छिड़काव किया जाएगा। कूड़े-कचरे के वैज्ञानिक और उचित निपटान के लिए एक अत्याधुनिक एमआरएफ यानी मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी केंद्र बनाया गया है, जहां कचरे को अलग-अलग कर उनका निष्पादन होगा। शौचालयों की साफ-सफाई की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए प्रशासन ने एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया है, जिसके माध्यम से अधिकारी सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेंगे। अग्निशमन की अभूतपूर्व तैयारी: संकरी गलियों के लिए ‘मिस्ट टेक्नोलॉजी’ गाड़ियां मेला क्षेत्र में कुल 30 अत्याधुनिक अग्निशमन गाड़ियां तैनात की गई हैं, जिनमें 10 बड़ी और 20 छोटी गाड़ियां शामिल हैं। इनमें 8 वाटर फायर टेंडर, 2 वाटर फोम टेंडर और संकरी गलियों में तेजी से घुसने में सक्षम 20 आधुनिक मिस्ट टेक्नोलॉजी वाहन शामिल हैं, जो चौबीसों घंटे चालू हालत में रहेंगे। इन वाहनों के संचालन और सुरक्षा के लिए 250 से अधिक प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है, जो 3 पालियों में तैनात रहेंगे। सुगम यातायात प्रबंधन: विशेष रिंग बस सेवा और 12 बड़े पार्किंग स्थल राजधानी पटना, बख्तियारपुर, गया, जहानाबाद और नवादा जैसे महत्वपूर्ण शहरों से राजगीर मेला क्षेत्र के लिए विशेष रिंग बस सेवा चलाई जा रही है, जिससे यात्रियों को सीधे मेले तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो। शहर के बाहरी और आंतरिक हिस्सों में वाहनों के व्यवस्थित ठहराव के लिए पीएचईडी कैंपस, विश्वशांति स्तूप, किला मैदान, आरडीएच हाई स्कूल मैदान, हॉकी मैदान, सोन भंडार और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स समेत कुल 12 बड़े पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। शहर के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए 20 ट्रैफिक चेक पोस्ट, मजबूत बैरिकेडिंग और ड्रॉप गेट लगाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर चलने वाले ई-रिक्शा और टोटो के लिए बकायदा रूट का निर्धारण कर किराया दर की सूची सार्वजनिक कर दी गई है। अवैध वसूली और अव्यवस्था को रोकने के लिए सभी ई-रिक्शा की विशिष्ट नंबरिंग और कलर कोडिंग कराई गई है, जिससे यातायात पुलिस को उन्हें नियंत्रित करने में काफी सुविधा होगी। शहर के लिए एक व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन प्लान भी लागू किया गया है। नालंदा जिले के राजगीर में आज मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी मलमास मेला का उद्घाटन करेंगे। ब्रह्मकुंड परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और ध्वजारोहण के साथ मेले का उद्घाटन किया जाएगा। ध्वजारोहण के बाद मुख्य कार्यक्रम सभा भवन में स्थानांतरित होगा, जहां पंडा समिति के पदाधिकारियों द्वारा स्मृति चिह्न देकर मुख्यमंत्री का नागरिक अभिनंदन किया जाएगा। एक महीने यानी 15 जून तक चलने वाले इस मेले में राजगीर के पवित्र गर्म पानी के 22 कुंड, 52 धाराओं में तीन शाही स्नान का महायोग है। इसमें देश-विदेश के श्रद्धालुओं समेत नेपाल और श्रीलंका के साधु-संत, ऋषि मुनि शामिल होंगे। मान्यताओं के अनुसार, इन कुंड में डुबकी लगाने से मनुष्य के सभी पाप और कष्ट धुल जाते हैं। मेले का आयोजन पर्यटन विभाग और नालंदा जिला प्रशासन की ओर से किया जा रहा है। सामान्य दिनों में हजारों श्रद्धालु जुटते हैं, लेकिन इन प्रमुख शाही स्नान के दिनों में लगभग 2 से 2.5 लाख श्रद्धालु एक साथ कुंडों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इस दौरान देश के कोने-कोने से नागा साधु, अखाड़ों के महामंडलेश्वर और तपस्वी साधु-संतों का आगमन होते है। पंचांग के अनुसार, हर तीसरे साल आने वाले 13वें महीने को अधिमास, पुरुषोत्तम मास या मलमास कहा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इस पवित्र महीने की अवधि में हिंदू धर्म के सभी 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में प्रवास करते हैं। यही कारण है कि मनोकामनाओं, आत्मशुद्धि और वांछित फलों की प्राप्ति के लिए तीर्थयात्री, ऋषि-मुनि, साधु-संत और सैलानी यहां पूरे महीने प्रवास करते हैं। राजगीर में चौबीसों घंटे मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और भजनों की गूंज सुनाई देती है। श्रद्धालुओं के लिए जर्मन हैंगर पंडाल और वीआईपी टेंट सिटी की व्यवस्था लाखों-करोड़ों की संख्या में आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं की सुख-सुविधा, सुरक्षा और सम्मान को ध्यान में रखते हुए नालंदा जिला प्रशासन और बिहार सरकार के विभिन्न विभागों ने इस बार व्यापक व्यवस्था की है। गर्मी के मौसम को देखते हुए तीर्थ यात्रियों के ठहरने के लिए राजगीर के 14 प्रमुख स्थलों पर 14 विशाल प्रवास केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 11 जगहों पर अत्यधिक आधुनिक जर्मन हैंगर तकनीक से बने विशाल वाटरप्रूफ पंडालों का निर्माण किया गया है, जबकि 3 जगहों पर मजबूत वाटरप्रूफ यात्री शेड लगाए गए हैं। स्टेट गेस्ट हाउस के विशाल मैदान में एक बेहद आलीशान वीआईपी टेंट सिटी का निर्माण किया गया है, जिसकी कुल आवासन क्षमता 6 हजार लोगों की है। इन सभी स्थलों पर मिस्ट कूलर, बड़े पंखे, पर्याप्त रोशनी, पेयजल, शौचालय और सीसीटीवी कैमरों की पुख्ता व्यवस्था की गई है। हर घर गंगाजल; 300 प्याऊ से होगी शुद्ध पेय आपूर्ति मेले में पानी की किल्लत न हो, इसके लिए पीएचईडी विभाग की ओर से पूरे मेला क्षेत्र में 30 अलग-अलग स्थानों पर 300 प्याऊ लगाए हैं। इन प्याऊ के माध्यम से सीधे मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के तहत गंगाजल की निर्बाध आपूर्ति की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को साक्षात गंगा मैया का जल पीने को मिलेगा। इसके अलावा विभाग ने ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को मिलाकर 20 नए चापाकल लगाए हैं और पहले से खराब पड़े 60 चापाकलों की मरम्मत की गई है। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 15 बड़े पेयजल टैंकरों को हर समय रिजर्व मोड में रखा गया है। प्रशासन ने प्रतिदिन लगभग 3 लाख श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की है और पानी की गुणवत्ता में कोई कमी न आए, इसके लिए पीएचईडी की विशेष टीमों की ओर से नियमित रूप से जल स्रोतों की रासायनिक जांच की जाएगी। महिला के लिए 1000 से अधिक शौचालय और सुरक्षित चेंजिंग रूम महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए शौचालय की अलग-अलग व्यवस्था की गई है। चेंजिंग रूम के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। पीएचईडी की ओर से 750 आधुनिक शौचालयों का निर्माण पूरा किया गया है, जिसमें 350 शौचालय विशेष रूप से पुरुषों और 350 शौचालय महिलाओं के लिए पूरी तरह आरक्षित रखे गए हैं। इसके अलावा सड़कों पर 75 नए यूरिनल लगाए गए हैं। नगर परिषद राजगीर ने भी 250 अस्थायी शौचालयों का निर्माण कराया है और शहर के 13 स्थायी सार्वजनिक शौचालयों को दुरुस्त किया है। मेला क्षेत्र में करीब 1000 से अधिक शौचालयों की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही स्नान के बाद महिलाओं की सुविधा के लिए ब्रह्मकुंड, वैतरणी घाट और सूर्यकुंड को मिलाकर 25 बेहद सुरक्षित और आधुनिक चेंजिंग रूम बनाए गए हैं। मलमास मेले को लेकर क्या हैं पौराणिक कथाएं मलमास मास को लेकर हिंदू धर्म में कई बेहद रोचक और ज्ञानवर्धक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि जब काल गणना के अनुसार 13वें महीने का निर्माण हुआ, तो इसके अवगुणों और मलिनता के कारण कोई भी देवता इसका उत्तराधिकारी या स्वामी बनने को तैयार नहीं हुआ। इस संकट की घड़ी में भगवान विष्णु ने आगे बढ़कर इसे सहर्ष स्वीकार किया और इसे अपना सबसे प्रिय नाम ‘पुरुषोत्तम मास’ दिया। भगवान विष्णु के साथ-साथ स्वर्ग के सभी 33 कोटि देवता एक महीने के लिए राजगीर आकर रहने लगे। यही कारण है कि इस एक महीने के दौरान देश के अन्य सभी हिस्सों में मुंडन, विवाह, गृह प्रवेश जैसे सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं, लेकिन राजगीर की धरती पर पूजा-पाठ, दान-पुण्य और स्नान करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है। ‘मलमास मेले में राजगीर में एक भी कौआ नहीं दिखता’ राजगीर की भौगोलिक और धार्मिक महत्ता को लेकर एक और अत्यंत प्रसिद्ध लोककथा कागभुशुण्डि यानी कौए से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा की इस पवित्र भूमि पर सभी 33 कोटि देवताओं को राजगीर आने का निमंत्रण दिया जा रहा था, तब किसी अज्ञात कारणवश कागभुशुण्डि को न्योता नहीं भेजा गया। इस अलौकिक व्यवस्था और मान-सम्मान की मर्यादा के कारण ही पूरे एक महीने तक चलने वाले इस महामेले के दौरान राजगीर के पूरे भौगोलिक क्षेत्र में एक भी कौआ कहीं दिखाई नहीं पड़ता है। स्वाद और सेहत का संगम; 25 स्थानों पर ‘दीदी की रसोई’ का संचालन मेले में आने वाले गरीब और आम श्रद्धालुओं को बेहद कम कीमत पर स्वच्छ, पौष्टिक और घरेलू स्वाद का भोजन उपलब्ध कराने के लिए जीविका दीदियों का सहारा लिया गया है। इस बार राजगीर के 14 सबसे प्रमुख स्थानों पर कुल 25 ‘दीदी की रसोई’ का संचालन किया जाएगा। स्वास्थ्य व्यवस्था; राजगीर में खड़ी हुई ‘मिनी मेडिकल सिटी’ स्वास्थ्य विभाग ने राजगीर में एक मिनी मेडिकल सिटी खड़ी की है। मेले के मुख्य केंद्रों जैसे टेंट सिटी, वीआईपी टेंट सिटी, मेला थाना, ब्रह्मकुंड के ऊपरी व निचले हिस्से, रेलवे स्टेशन, पीएचईडी कैंपस और वैतरणी घाट समेत 8 सबसे महत्वपूर्ण जगहों पर पूरी तरह क्रियाशील अस्थायी अस्पतालों का निर्माण किया गया है। इसके अलावा पूरे मेला क्षेत्र में 18 अलग-अलग जगहों पर विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए गए हैं। गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए 16 अत्याधुनिक एम्बुलेंस की चौबीसों घंटे तैनाती की गई है, जबकि संकरी गलियों में घूम-घूम कर इलाज करने के लिए 4 चलंत चिकित्सा दल तैनात रहेंगे। इस पूरी व्यवस्था को संभालने के लिए एक इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम बनाया गया है, जहां 32 मेडिकल सुपरवाइजर और 260 से अधिक ट्रेड पारामेडिकल कर्मी तैनात रहेंगे। स्थानीय अनुमंडलीय अस्पताल राजगीर और भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान पावापुरी को किसी भी बड़ी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखते हुए विशेष बेड आरक्षित किए गए हैं, जबकि ब्रह्मकुंड के मुख्य द्वार पर एक हाई-टेक विशेष चिकित्सा शिविर चौबीसों घंटे डॉक्टरों की टीम के साथ तैनात रहेगा। अभैद्य सुरक्षा चक्रव्यूह; 550 सीसीटीवी कैमरे और घुड़सवार पुलिस मेला क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को संभालने के लिए लगभग 950 दंडाधिकारियों और 530 से अधिक अनुभवी पुलिस पदाधिकारियों की चौबीसों घंटे तैनाती की गई है। इसके अलावा मेला क्षेत्र के दुर्गम और रेतीले रास्तों पर गश्त के लिए विशेष घुड़सवार पुलिस बल की भी प्रतिनियुक्ति की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था को अतिरिक्त मजबूती देने के लिए 100 चुनिंदा होमगार्ड जवानों को लगाया गया है। इसके अलावा, 38 विशेष पुलिस चौकियां यानी टीओपी और 16 ऊंचे वॉच टावर बनाए गए हैं। पूरे मेले की लाइव निगरानी के लिए 250 से अधिक जगहों पर 550 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनका सीधा संपर्क कंट्रोल रूम से होगा। सुरक्षा बलों को मैन पैक वायरलेस सेट, ड्रैगन लाइट्स और रात में भी साफ देखने वाले नाइट विजन उपकरणों से लैस किया गया है। स्वच्छता महाभियान; 3 जोनों में 1700 सफाईकर्मियों की 24 घंटे तैनाती मेला क्षेत्र को 3 बड़े सफाई जोनों में विभाजित किया गया है। तीन पालियों को मिलाकर 617 मजदूर, 87 सफाई पर्यवेक्षक, 20-25 कचरा उठाने वाले वाहन और 57 ड्राइवर समेत 1700 से अधिक मानवबल को काम पर लगाया गया है। शौचालयों और सोकपीट की सफाई के लिए 9 आधुनिक सेक्शन मशीनें तैनात की गई हैं। संपूर्ण मेला क्षेत्र, गलियों और नालियों में नियमित रूप से एंटी-लार्वा फॉगिंग, चूना और ब्लीचिंग पाउडर का सघन छिड़काव किया जाएगा। कूड़े-कचरे के वैज्ञानिक और उचित निपटान के लिए एक अत्याधुनिक एमआरएफ यानी मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी केंद्र बनाया गया है, जहां कचरे को अलग-अलग कर उनका निष्पादन होगा। शौचालयों की साफ-सफाई की रियल-टाइम ट्रैकिंग के लिए प्रशासन ने एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया है, जिसके माध्यम से अधिकारी सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेंगे। अग्निशमन की अभूतपूर्व तैयारी: संकरी गलियों के लिए ‘मिस्ट टेक्नोलॉजी’ गाड़ियां मेला क्षेत्र में कुल 30 अत्याधुनिक अग्निशमन गाड़ियां तैनात की गई हैं, जिनमें 10 बड़ी और 20 छोटी गाड़ियां शामिल हैं। इनमें 8 वाटर फायर टेंडर, 2 वाटर फोम टेंडर और संकरी गलियों में तेजी से घुसने में सक्षम 20 आधुनिक मिस्ट टेक्नोलॉजी वाहन शामिल हैं, जो चौबीसों घंटे चालू हालत में रहेंगे। इन वाहनों के संचालन और सुरक्षा के लिए 250 से अधिक प्रशिक्षित अग्निशमन कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है, जो 3 पालियों में तैनात रहेंगे। सुगम यातायात प्रबंधन: विशेष रिंग बस सेवा और 12 बड़े पार्किंग स्थल राजधानी पटना, बख्तियारपुर, गया, जहानाबाद और नवादा जैसे महत्वपूर्ण शहरों से राजगीर मेला क्षेत्र के लिए विशेष रिंग बस सेवा चलाई जा रही है, जिससे यात्रियों को सीधे मेले तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो। शहर के बाहरी और आंतरिक हिस्सों में वाहनों के व्यवस्थित ठहराव के लिए पीएचईडी कैंपस, विश्वशांति स्तूप, किला मैदान, आरडीएच हाई स्कूल मैदान, हॉकी मैदान, सोन भंडार और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स समेत कुल 12 बड़े पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। शहर के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए 20 ट्रैफिक चेक पोस्ट, मजबूत बैरिकेडिंग और ड्रॉप गेट लगाए गए हैं। स्थानीय स्तर पर चलने वाले ई-रिक्शा और टोटो के लिए बकायदा रूट का निर्धारण कर किराया दर की सूची सार्वजनिक कर दी गई है। अवैध वसूली और अव्यवस्था को रोकने के लिए सभी ई-रिक्शा की विशिष्ट नंबरिंग और कलर कोडिंग कराई गई है, जिससे यातायात पुलिस को उन्हें नियंत्रित करने में काफी सुविधा होगी। शहर के लिए एक व्यापक ट्रैफिक डायवर्जन प्लान भी लागू किया गया है।  

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