मध्यप्रदेश से भरतपुर के जंगल पहुंचा चीता:194KM की दूरी तय की; बछड़े का शिकार किया; 4 साल पहले अफ्रीका से आए थे मां-बाप

मध्यप्रदेश से भरतपुर के जंगल पहुंचा चीता:194KM की दूरी तय की; बछड़े का शिकार किया; 4 साल पहले अफ्रीका से आए थे मां-बाप

मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से निकला चीता KP-3 इन दिनों भरतपुर के बंध बारैठा वन्यजीव अभयारण्य में ठिकाना बनाए हुए हैं। KP-3 अफ्रीकी देशों से साल 2022 में भारत लाए गए ‘आशा’ और ‘ओबान’ चीते की संतान है, जिसका जन्म कूना नेशनल पार्क में हुआ था। वन विभाग के अनुसार, भरतपुर के बंध बरैठा में एक सप्ताह से इस चीते को ट्रैक किया जा रहा है। भरतपुर के डीएफओ चेतन कुमार ने बताया- चीता KP-3 लगभग एक सप्ताह से बंध बारैठा क्षेत्र में मौजूद है। वह यहां के वातावरण में पूरी तरह सहज दिखाई दे रहा है। चीते ने एक बछड़े का भी शिकार किया था। KP-3 के गले में कॉलर आईडी है, जिसमें GPS है। उसके जरिए कूनो प्रशासन ने हमें बताया कि चीता बंध बारैठा में आया हुआ है। हमारी टीमें चीते की हर गतिविधि पर नजर रख रही है। पूरा प्रयास है कि चीते और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा बनी रहे। बंध बरैठा के जंगल में एक सप्ताह से ठहरा हुआ
डीएफओ चेतन कुमार के अनुसार, बंध बारैठा वन्यजीव अभयारण्य का प्राकृतिक वातावरण किसी भी बड़े मांसाहारी वन्यजीव के लिए अनुकूल माना जाता है। लगभग 36 हजार हेक्टेयर में फैले इस संरक्षित क्षेत्र में घने जंगल, ऊंची-नीची पहाड़ियां, नेचुरल तालाब और बांध मौजूद हैं। यहां स्थित बंध बारैठा बांध और दर बराहना झरना पूरे क्षेत्र को सालभर पानी उपलब्ध कराते हैं। इसके अलावा जंगल में जंगली सूअर, नीलगाय, हिरण और अन्य वन्यजीव पर्याप्त संख्या में मौजूद हैं, जो चीते के लिए अच्छा शिकार है। भोजन, पानी और सुरक्षित आवास के कारण ही KP-3 फिलहाल यहां ठहरा हुआ है। टमकौली क्षेत्र में पानी पीते हुए दिखाई दिया
डीएफओ चेतन कुमार का कहना है- कूनो से निकलकर राजस्थान की सीमा में प्रवेश करने वाला यह चीता अब वन विभाग की निगरानी में है। हाल ही में KP-3 को अभयारण्य के टमकौली क्षेत्र में पानी पीते हुए देखा गया, इसके बाद उसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई। फॉरेस्ट गार्ड भरत सिंह ने बताया कि 26 मई को पहली बार बंध बारैठा वन्यजीव अभयारण्य में KP-3 की लोकेशन ट्रेस हुई थी। इसके बाद से लगातार उसकी निगरानी की जा रही है। हालांकि चीता कभी-कभी करौली वन क्षेत्र की दिशा में भी बढ़ जाता है, लेकिन अब तक उसका मुख्य ठिकाना बंध बारैठा ही बना हुआ है। करौली और बंध बारैठा के जंगल आपस में जुड़े हुए हैं, इसलिए उसका दोनों क्षेत्रों में आना-जाना स्वाभाविक माना जा रहा है। भरतपुर के बंध बरैठा में खुद को सिक्योर महसूस कर रहा
डीएफओ चेतन कुमार ने बताया कि फिलहाल चीते को ऐसा कोई बड़ा प्रतिद्वंद्वी नहीं मिला है जो उसके लिए गंभीर खतरा बन सके। यही वजह है कि वह यहां लंबे समय तक ठहरने में खुद को सिक्योर महसूस कर रहा है। हालांकि अभयारण्य में करीब 10 से 12 तेंदुए (लेपर्ड) मौजूद हैं। माना जाता है कि तेंदुआ चीते की तुलना में ज्यादा ताकतवर और आक्रामक होता है। ऐसे में अगर दोनों का आमना- सामना होता है, तो चीते को खतरा पैदा हो सकता है। वन विभाग के अफसरों का कहना है- चीता सबसे तेज दौड़ने वाला स्थलीय जीव माना जाता है। यह सामान्य रूप से 80 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है, जबकि इसकी अधिकतम गति 110 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक दर्ज की गई है, हालांकि कई बार यह रफ्तार 150 किलोमीटर तक भी पहुंच सकती है। ऐसे में कूनो से बंध बारैठा तक की दूरी तय करने में चीते को बहुत अधिक समय नहीं लगा होगा। ——————- ये खबर भी पढ़ें… बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ा, घरों में कैद हुए गांववाले: पुरुषों ने खेतों में जाना बंद किया, MP के कूनो नेशनल पार्क से आया चीता यह खौफ उन किसानों के चेहरों पर देखा जा सकता है, जो सवाई माधोपुर जिले के कैलाशपुरी, दूमोदा और मौजीपुरा गांव में रहते हैं। ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ गई है। बच्चे से लेकर महिलाएं तक घर में कैद रहने को मजबूर हैं। (पूरी खबर पढ़ें)

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