चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में मंगलवार को इंडस्ट्री इंटरेक्शन कार्यक्रम हुआ। इसमें शहर के अलग-अलग उद्योगों से जुड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक में छात्रों को सिर्फ किताबी ज्ञान देने के बजाय इंडस्ट्री का प्रैक्टिकल अनुभव देने, रोजगार के हिसाब से स्किल्स विकसित करने और यूनिवर्सिटी की रिसर्च को उद्योगों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई। उद्योग प्रतिनिधि अनुराग अग्रवाल ने कहा कि छात्रों को पढ़ाई के साथ इंडस्ट्री के माहौल से भी जोड़ना चाहिए। वहीं कुणाल सिंह बेरवार ने यूनिवर्सिटी के पेटेंट और रिसर्च को एक पोर्टल पर उपलब्ध कराने का सुझाव दिया, ताकि उद्योग अपनी जरूरत के हिसाब से इनका इस्तेमाल कर सकें। अजय गुप्ता ने टेक्नोलॉजी एडॉप्शन के लिए यूनिवर्सिटी में एक ऐसा सेंटर बनाने का सुझाव दिया, जहां हर महीने इंडस्ट्री के साथ बैठक हो। आशुतोष अग्रवाल ने ज्वेलरी से जुड़े कोर्स और जेम्स कटिंग मशीन की सुविधा शुरू करने का सुझाव दिया। उनका कहना था कि इससे मेरठ के ज्वेलरी कारोबार को फायदा मिल सकता है। फरमानुद्दीन ने कैंची उद्योग के विकास के लिए यूनिवर्सिटी से तकनीकी मदद मांगी। वहीं आशीष दुबे ने छात्रों और शिक्षकों को अपनी कंपनियों में ट्रेनिंग और प्रैक्टिकल अनुभव के लिए आमंत्रित किया। रविंद्र लंग ने पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स पर यूनिवर्सिटी के साथ काम करने में रुचि जताई। कार्यक्रम में सीसीएसयू और झिलमिल एंड फ्रेंड्स कॉलोनी इंडस्ट्रियल एरिया CETP सोसायटी, दिल्ली के बीच MoU भी हुआ। इसके तहत वाटर एफ्लुएंट ट्रीटमेंट और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर रिसर्च और ट्रेनिंग पर काम किया जाएगा। कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला ने कहा कि यूनिवर्सिटी की अकादमिक और रिसर्च क्षमता को इंडस्ट्री की जरूरतों से जोड़ना जरूरी है। कार्यक्रम की रूपरेखा ग्लोबल आउटरीच प्रोग्राम के कोऑर्डिनेटर प्रो. आरके सोनी ने तैयार की। उन्होंने उद्योगपतियों को विश्वविद्यालय में चल रहे शोध की जानकारी दी और आगे सहयोग के लिए आमंत्रित किया। कार्यक्रम में डॉ. शैलेन्द्र जायसवाल, डायरेक्टर रिसर्च प्रो. वीरपाल, प्रो. एमके गुप्ता, डॉ. प्रियंका काकड़, डॉ. नजीर तरन्नुम समेत शिक्षक और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे।

