डिजिटल चेकिंग पर CBSE की सफाई, शिक्षा मंत्रालय ने कहा अब पूरी तरह खत्म हुई टोटलिंग की गड़बड़ी

डिजिटल चेकिंग पर CBSE की सफाई, शिक्षा मंत्रालय ने कहा अब पूरी तरह खत्म हुई टोटलिंग की गड़बड़ी

CBSE On Screen Marking: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 12वीं के नतीजों के बाद कॉपियों की चेकिंग पर उठ रहे सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय और बोर्ड ने सफाई दी है। भारत सरकार के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऑन स्क्रीन मार्किंग (OSM) और स्टेप मार्किंग को लेकर स्थिति साफ की है। इस दौरान सीबीएसई के चेयरपर्सन राहुल सिंह और परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि, डिजिटल चेकिंग में नंबर टोटलिंग की गलती की कोई गुंजाइश ही नहीं है।

नया सिस्टम नहीं है ऑन स्क्रीन मार्किंग

शिक्षा सचिव संजय कुमार ने बताया कि, कॉपियों को कंप्यूटर स्क्रीन पर जांचने का यह सिस्टम यानी ऑन स्क्रीन मार्किंग कोई नई बात नहीं है और न ही इसे पहली बार लागू किया जा रहा है। सीबीएसई ने इसे पहली बार साल 2014 में शुरू किया था। उस समय तकनीकी और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण इसे तुरंत जारी रखना संभव नहीं लगा था। लेकिन इस साल हमने इसे पूरी तैयारी के साथ दोबारा लागू किया है।

ऐसे काम करता है सिस्टम

मार्किंग सिस्टम को समझाते हुए संजय कुमार ने बताया कि, सबसे पहले आंसर शीट को एक सीक्रेट कोड दिया जाता है। इसके बाद कॉपियों की क्वालिटी चेक की जाती है। हर सेट की मार्किंग स्कीम अलग होती है जिसे विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया जाता है और दूसरे विशेषज्ञों की टीम उसकी दोबारा जांच करती है। वहीं स्टूडेंट्स का कहना है कि, डिजिटल चेकिंग में स्टेप-वाइज मार्किंग होने से उनके अंक कम हुए हैं।

खत्म हुई टोटलिंग की गलतियां

प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि पेपर पर ही स्टेप मार्किंग के नियम स्पष्ट रूप से लिखे होते हैं। उदाहरण के लिए पहले स्टेप के लिए अधिकतम 1 नंबर दूसरे स्टेप के लिए अधिकतम 1 नंबर और तीसरे स्टेप के लिए अधिकतम 2 नंबर तय होते हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि, इस डिजिटल सिस्टम में नंबर टोटलिंग की गलतियां पूरी तरह खत्म हो गई हैं। कंप्यूटर स्क्रीन पर कॉपी चेक करते समय परीक्षक तब तक कॉपी सबमिट नहीं कर सकते जब तक वे हर स्टेप के नंबर न दर्ज कर दें। उन्हें बताना होता है कि किस स्टेप के लिए कितने नंबर दिए गए हैं और अंत में पूरे उत्तर के नंबर कितने हैं। इससे कॉपियों की जांच में एकरूपता और पारदर्शिता बनी रहती है।

गणित और विज्ञान में ऐसे होती है टोटलिंग

सीबीएसई चेयरपर्सन राहुल सिंह ने बताया कि, बोर्ड परीक्षाओं में हमेशा स्टेप के अनुसार नंबर देने पर जोर दिया जाता है और निर्देश होते हैं कि, स्टूडेंट्स को उनके हल किए गए हर स्टेप का नंबर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि गणित या विज्ञान जैसे विषयों में एक सवाल को हल करने के कई तरीके होते हैं इसलिए मार्किंग स्कीम में उन सभी तरीकों को शामिल किया जाता है ताकि, किसी भी स्टूडेंट का नुकसान न हो।

टीचर्स की ट्रेनिंग में कोई कोताही नहीं

राहुल सिंह ने यह भी बताया कि, ओएसएम के इस्तेमाल को लेकर शिक्षकों और कॉपियां जांचने वालों की ट्रेनिंग में किसी तरह की कोई लापरवाही नहीं बरती गई है। अधिकारियों ने स्टूडेंट्स को भरोसा दिलाया है कि, अगर इसके बावजूद किसी स्टूडेंट को लगता है कि उसे स्टेप मार्किंग में सही नंबर नहीं मिले हैं तो वे बोर्ड द्वारा दी जा रही रीचेकिंग और रीइवैल्यूएशन सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं।

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