लापरवाही का मामला:जिले में 456 हेल्थ केयर सेंटर, 122 का मेडिकल वेस्ट खुले में फेंक रहे, बढ़ा खतरा

लापरवाही का मामला:जिले में 456 हेल्थ केयर सेंटर, 122 का मेडिकल वेस्ट खुले में फेंक रहे, बढ़ा खतरा

जिले में हेल्थ केयर सेंटर्स पर बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करने में बड़ी लापरवाही सामने आई है। कुल 456 हेल्थ केयर सेंटर में से 122 प्राइवेट सेंटरों का बायो वेस्ट खुले में फेंका जा रहा है, जिससे प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है। बायो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण करने वाली फर्म ई टेक प्रोजेक्ट्स ने जिले में सभी हेल्थ केयर सेंटरों की सूची तैयार कर सीएमएचओ को सौंपी है। इस सूची के अनुसार जिले में कुल 456 हेल्थ केयर सेंटर बताए गए हैं। इनमें से 334 सेंटरों से रोज बायो मेडिकल वेस्ट का कलेक्शन हो रहा है, जबकि 122 प्राइवेट सेंटरों से वेस्ट नहीं उठ रहा। इनमें 32 रेड लिस्ट की श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। इनमें प्राइवेट अस्पताल, लैब, क्लिनिक और ब्लड बैंक तक शामिल हैं। बताया जा रहा है कि इन सेंटरों ने पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से रजिस्ट्रेशन कराने के लिए बायो वेस्ट का सर्टिफिकेट तो ले लिया, लेकिन बाद में मेंबर ही नहीं बने। इनमें से शहरी क्षेत्र में स्थित सेंटरों का बायो वेस्ट सीधे-सीधे नगर निगम के ट्रैक्टर और ऑटो टिपर के जरिए बल्लभ गार्डन स्थित डंपिंग यार्ड पर खुले में फेंका जा रहा है, जहां आए दिन आवारा पशु मंडराते हैं। श्रमिकों की कच्ची बस्ती भी बसी हुई है। कचरे में आग लगने से प्रदूषित धुआं कई किलोमीटर तक फैलता है। पीबीएम अस्पताल में भी बायो वेस्ट खुले में बिखरा रहता है। हालात से वाकिफ होने के बाद भी बायो वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी ने आंखें मूंद रखी हैं। भास्कर एक्सपर्ट – डॉ. नवल गुप्ता, नेशनल ट्रेनर एवं एक्सपर्ट बायो वेस्ट का निस्तारण नहीं होने से संक्रमण का खतरा बढ़ा चिकित्सा संस्थान और डायग्नोस्टिक लैब्स से बायो मेडिकल वेस्ट रोज उठना चाहिए। उसका निस्तारण नियमानुसार करना जरूरी है। इसकी वजह से एड्स, हेपेटाइटिस ए, बी, सी जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा हैजा, टायफाइड, पेचिश, पोलियो, श्वास संक्रमण, टीबी, ब्लड स्ट्रीम और स्किन इंफेक्शन का खतरा रहता है। पानी, मिट्टी और हवा का प्रदूषण फैलता है। मच्छर, मक्खियां, चींटियां, कीड़े और चूहे पनपते हैं। अनजाने में डिस्पोजेबल और कॉटन के दोबारा इस्तेमाल का खतरा रहता है। यही वजह है कि मेडिकल बायो वेस्ट के निस्तारण की व्यवस्था अलग की जाती है। इसका वेस्ट लाने-ले जाने में भी खास सावधानी रखनी होती है, मगर बीकानेर में कचरा निस्तारण का इंतजाम नहीं होने और अन्यत्र वेस्ट ले जाने में खर्च बढ़ता है। भास्कर इनसाइट – प्लांट लगाने के लिए अब तक नहीं मिली जमीन जिले में बायो मेडिकल वेस्ट प्लांट नहीं है। मेडिकल वेस्ट नागौर ले जाया जाता है। दरअसल प्लांट के लिए जमीन का आवंटन नहीं हो पा रहा है। तत्कालीन कलेक्टर ने पूर्व में चकगर्बी में जमीन दी थी, लेकिन वहां विरोध हो गया। ई टेक प्रोजेक्ट्स ने रीको इंडस्ट्रियल एरिया में जमीन देने की मांग की है। इसका मैनेजमेंट जिला कलेक्टर की कमेटी करती है। इसमें सीएमएचओ सदस्य सचिव, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सहित कई सदस्य शामिल हैं। कंपनी को प्लांट लगाने के लिए जमीन आवंटित करने का फैसला नहीं होने के कारण एमओयू इनवैलिड होने के बाद कंपनी ने दरें बढ़ा दीं। यहां से बायो मेडिकल वेस्ट नागौर परिवहन करना पड़ता है। इसकी लागत ज्यादा है। अब डीजल महंगा होने से दरें और बढ़ाई जाएंगी। प्रशासन प्लांट के लिए जमीन दे तो दर कम हो। – मनीष राजपुरोहित,संचालक, ई टेक प्रोजेक्ट्स बायो मेडिकल वेस्ट सभी हेल्थ केयर सेंटर्स से उठाया जाना अनिवार्य है। यदि सेंटरों ने इसकी व्यवस्था नहीं की तो कार्रवाई की जाएगी। – डॉ. पुखराज साध, सीएमएचओ

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