बकरीद का पर्व गुरुवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इसके पहले शहर के मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में बकरों का बाजार सजा हुआ है। इस वर्ष प्रसिद्ध बेनियाबाग मंडी को बंद कर दिए जाने से व्यापारियों में हताशा दिखाई दी। वहीं अन्य इलाकों में मंडियां गुलजार हैं। दोषीपुरा स्थित बड़ी बाजार की बकरा मंडी में सुबह 6 बजे से खरीदार पहुंच रहे हैं। मंडी में बकरों की आमद ज्यादा है पर महंगाई की वजह से बकरे कम बिक रहे हैं। मंडी में 7 हजार से लेकर 70 हजार तक के बकरे बिक रहे हैं। देखें मंडी की तीन तस्वीरें… बेनियामंडी बंद होने से हो रहा नुकसान परवेज आलम ने बताया – महंगाई चरम पर है। पिछले साल से इस बार जानवर दोगुने दाम में बिक रहा है। लोग परेशान हैं क्योंकि बेनियाबाग मंडी के बंद होने से सारा क्राउड यहीं आ गया। जिससे व्यापारियों का दाम मनमाना हो गया है। कुर्बानी के लिए जानवर लेना जरूरी है इसलिए लोगों को लेना पड़ रहा है। व्यापारियों का भाव बढ़ गया है। वो मनमाना पैसा ले रहे हैं। 40 हजार का जानवर 70 हजार में परवेज ने बताया – गर्मी का दिन है ऐसे में लोग अपने पास की मंडियों में जा रहे हैं। जो जानवर पिछले साल 8 हजार में था वो इस बार 15 हजार में बिक रहा है। हमने 3 जानवर खरीदा है। जो जानवर 40 हजार का था उसे हमें 70 हजार में लेना पड़ा है। मजबूरी है क्योंकि वाराणसी में मशहूर और सस्ती मंडी बेनियाबाग बंद कर दी गई है। महंगाई ने कमर तोड़ दी है मोहम्मद स्वालेह ने बताया – इटावा से तीस बकरा लेकर आये थे। स्वालेह ने कहा- खरीदार नहीं दिखाई दे रहे हैं। लोग आ रहे हैं और दाम पूछकर चले जा रहे हैं। लग रहा है इस बार नुकसान होगा क्योंकि जानवर अगर गर्मी से मर गए और बाइक नहीं तो दिक्क्त होगी। महंगाई की वजह से जानवर महंगे और लोग आ भी रहे तो मोलभाव ज्यादा हो रहा है। इसने व्यापारियों की कमर तोड़ दी है। 55 हजार का तोतापरी बकरा खास बड़ी बाजार की बकरा मंडी में हुकुलगंज के नौशाद घर का पाला हुआ बकजरा लेकर पहुंचे। तोतापरी नस्ल का यह बकरा काफी बड़ा और इसका वजन 70 किलो है। नौशाद ने बताया- इसका नाम नहीं रखा है लेकिन दाम 55 हजार है। दो साल का बकरा है और इसके चार दांत हैं। कई लोगों ने इसे देखा है लेकिन कोई इसे खरीद नहीं रहा। लग रहा इसे वापस ले जाना होगा।


