गोठड़ा. भीषण गर्मी के बीच राज्य में विद्यार्थियों के ग्रीष्मावकाश को लेकर अलग-अलग व्यवस्थाओं ने सवाल खड़े कर दिए है। एक ओर जहां महाविद्यालयों में 1 मई से 30 जून तक अवकाश घोषित कर दिया गया है, वहीं दूसरी ओर सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में अध्यनरत कक्षा एक से 12वीं तक बच्चों को 17 मई तक स्कूल जाना होगा। ऐसे में दोहरे व्यवहार की व्यवस्था को लेकर अभिभावकों, शिक्षक संघों में नाराजगी बनी हुई है।
राजस्थान सरकार के आयुक्तालय, कॉलेज शिक्षा, जयपुर के संयुक्त निदेशक अकादमी प्रो. विजय ङ्क्षसह जाट द्वारा जारी आदेश के अनुसार सत्र 2025-26 के लिए महाविद्यालयों में 1 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि प्राचार्य आवश्यकता अनुसार संकाय सदस्यों को प्रवेश, परीक्षा व प्रशासनिक कार्यों के लिए अवकाश में भी बुला सकेंगे।
वहीं, दूसरी ओर स्कूल शिक्षा विभाग के शिविरा पंचांग के अनुसार सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों का ग्रीष्मावकाश 17 मई से 20 जून तक निर्धारित किया गया है। यानी भीषण गर्मी में छोटे बच्चों को लगभग दो सप्ताह अधिक स्कूल जाना होगा, जबकि बड़े विद्यार्थियों को पहले ही राहत मिल जाएगी। शिक्षक संघ सियाराम के प्रदेश महामंत्री घनश्याम शर्मा ने बताया हर वर्ष 17 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश रहता था, लेकिन इस बार अवधि कम कर दी गई है। उन्होंने मांग की कि पूर्व की भांति ही अवकाश अवधि लागू की जाए।
अभिभावकों ने बताया कि भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य सरकार को छोटे विद्यार्थियों के लिए विचार करना चाहिए। बच्चों को तपती धूप में स्कूल बुलाने से उनके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पडऩे की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। उधर, गैर सरकारी विद्यालयों के संगठन स्कूल शिक्षा परिवार के ब्लॉक अध्यक्ष धनराज प्रजापत ने शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर बताया कि शिक्षा विभाग के शिविरा पंचांग में संशोधन किया जाना चाहिए। राज्य की जलवायु स्थिति को देखते हुए स्कूलों का संचालन किया जाना चाहिए। उन्होंने स्कूलों में एक मई से 30 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कराने की मांग की है।
बिजली कटौती ने बढ़ाई परेशानी
सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक सत्र 1 अप्रेल से शुरू कर दिया है। ऐसे में भीषण गर्मी में भी छोटे बच्चों को स्कूल आना पड़ रहा है। दर्जनों स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है। गांव में संचालित स्कूलों में बिजली कनेक्शन होने के बाद भी सुबह 8 बजे से बिजली कटौती शुरू हो जाती है। जो बच्चों के अवकाश होने के बाद ही आती है। ऐसे में बच्चे गर्मी से परेशान होते रहते है।


