बक्सर-इटाढ़ी रेल ओवरब्रिज (आरओबी) के स्लैब धंसने के मामले में सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों और सत्ताधारी दल के नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी कर पुल निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित लोगों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। राज्य और केंद्र में सत्ताधारी दल की सरकारें सांसद सिंह ने सवाल उठाया कि जब राज्य और केंद्र दोनों जगह सत्ताधारी दल की सरकारें हैं, तब भी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल जांच और पत्राचार नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही है। उन्होंने स्थानीय भाजपा नेताओं पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जांच की मांग और पत्र लिखने का नाटक कब तक चलेगा। भाजपा नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर के बक्सर में निर्धारित हेलीपैड पर न उतर पाने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उसी दिन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे थे और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरओबी के स्लैब धंसने के बाद भाजपा नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए। सांसद ने आशंका जताई कि यदि अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो लोगों को संदेह होगा कि इस मामले में कुछ राजनीतिक लोग भी शामिल हैं। यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया सांसद ने इस घटना के लिए आम जनता को निर्दोष बताया और कहा कि सबसे अधिक परेशानी उन्हीं को उठानी पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल एक महीने के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) से बातचीत करने पर उन्होंने कहा कि स्थायी रूप से बंद रेलवे फाटक को दोबारा खोलना रेलवे के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। पुल कानहीं हुआ था उद्घाटन सुधाकर सिंह ने उद्घाटन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुल पर पिछले एक महीने से वाहनों का आवागमन हो रहा था, लेकिन अब क्षति सामने आने के बाद कहा जा रहा है कि पुल का उद्घाटन नहीं हुआ था। उन्होंने पूछा कि यदि उद्घाटन नहीं हुआ था तो आखिर किसके आदेश पर एक महीने से पुल पर आवागमन कराया जा रहा था। उन्होंने कहा कि उद्घाटन हो भी गया होता तो निर्माण की गुणवत्ता खराब रहने पर स्थिति यही होती। कई पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं आईं
सांसद ने इस मामले को केवल बक्सर तक सीमित न बताते हुए राज्य में पुल निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बड़े पुलों के क्षतिग्रस्त होने या गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि भागलपुर के अगुवानी पुल से लेकर अन्य कई बड़ी परियोजनाओं में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं, जिससे निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
उन्होंने कहा कि बक्सर में भी सत्ताधारी दल के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में व्यस्त हैं, जबकि जनता जवाबदेही चाहती है। सांसद ने स्पष्ट किया कि वह शिलान्यास और उद्घाटन कार्यक्रमों में जाने की राजनीति नहीं करते, बल्कि जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं की स्वीकृति के लिए राज्य और केंद्र सरकार से लगातार मांग करते रहते हैं। टेंडर, निर्माण और गुणवत्ता जांच हो
अपने बयान के अंत में सुधाकर सिंह ने कहा कि किसी भी पुल निर्माण परियोजना में स्वीकृति, टेंडर, निर्माण और गुणवत्ता जांच की पूरी प्रक्रिया में सरकार, मंत्री और अधिकारी शामिल होते हैं। इसके बावजूद बक्सर आरओबी के धंसने की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो किसी अधिकारी ने जवाबदेही स्वीकार की है और न ही सत्ताधारी दल के नेताओं ने किसी के इस्तीफे की मांग की है। उनके अनुसार, पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के बजाय लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है। बक्सर-इटाढ़ी रेल ओवरब्रिज (आरओबी) के स्लैब धंसने के मामले में सांसद सुधाकर सिंह ने राज्य सरकार, प्रशासनिक अधिकारियों और सत्ताधारी दल के नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने एक वीडियो बयान जारी कर पुल निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित लोगों को तत्काल निलंबित कर गिरफ्तार किया जाना चाहिए। राज्य और केंद्र में सत्ताधारी दल की सरकारें सांसद सिंह ने सवाल उठाया कि जब राज्य और केंद्र दोनों जगह सत्ताधारी दल की सरकारें हैं, तब भी कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने कहा कि जनता अब केवल जांच और पत्राचार नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की उम्मीद कर रही है। उन्होंने स्थानीय भाजपा नेताओं पर भी परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि जांच की मांग और पत्र लिखने का नाटक कब तक चलेगा। भाजपा नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए सुधाकर सिंह ने मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर के बक्सर में निर्धारित हेलीपैड पर न उतर पाने की घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उसी दिन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे थे और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरओबी के स्लैब धंसने के बाद भाजपा नेताओं को आत्ममंथन करना चाहिए। सांसद ने आशंका जताई कि यदि अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती है, तो लोगों को संदेह होगा कि इस मामले में कुछ राजनीतिक लोग भी शामिल हैं। यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया सांसद ने इस घटना के लिए आम जनता को निर्दोष बताया और कहा कि सबसे अधिक परेशानी उन्हीं को उठानी पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि लगभग 100 करोड़ रुपये की लागत से बना यह पुल एक महीने के भीतर ही क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) से बातचीत करने पर उन्होंने कहा कि स्थायी रूप से बंद रेलवे फाटक को दोबारा खोलना रेलवे के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। पुल कानहीं हुआ था उद्घाटन सुधाकर सिंह ने उद्घाटन को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पुल पर पिछले एक महीने से वाहनों का आवागमन हो रहा था, लेकिन अब क्षति सामने आने के बाद कहा जा रहा है कि पुल का उद्घाटन नहीं हुआ था। उन्होंने पूछा कि यदि उद्घाटन नहीं हुआ था तो आखिर किसके आदेश पर एक महीने से पुल पर आवागमन कराया जा रहा था। उन्होंने कहा कि उद्घाटन हो भी गया होता तो निर्माण की गुणवत्ता खराब रहने पर स्थिति यही होती। कई पुलों के क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं आईं
सांसद ने इस मामले को केवल बक्सर तक सीमित न बताते हुए राज्य में पुल निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई बड़े पुलों के क्षतिग्रस्त होने या गिरने की घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि भागलपुर के अगुवानी पुल से लेकर अन्य कई बड़ी परियोजनाओं में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं, जिससे निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
उन्होंने कहा कि बक्सर में भी सत्ताधारी दल के नेता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में व्यस्त हैं, जबकि जनता जवाबदेही चाहती है। सांसद ने स्पष्ट किया कि वह शिलान्यास और उद्घाटन कार्यक्रमों में जाने की राजनीति नहीं करते, बल्कि जनप्रतिनिधि के रूप में जनता की जरूरतों के अनुरूप योजनाओं की स्वीकृति के लिए राज्य और केंद्र सरकार से लगातार मांग करते रहते हैं। टेंडर, निर्माण और गुणवत्ता जांच हो
अपने बयान के अंत में सुधाकर सिंह ने कहा कि किसी भी पुल निर्माण परियोजना में स्वीकृति, टेंडर, निर्माण और गुणवत्ता जांच की पूरी प्रक्रिया में सरकार, मंत्री और अधिकारी शामिल होते हैं। इसके बावजूद बक्सर आरओबी के धंसने की जिम्मेदारी अब तक किसी ने नहीं ली है। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो किसी अधिकारी ने जवाबदेही स्वीकार की है और न ही सत्ताधारी दल के नेताओं ने किसी के इस्तीफे की मांग की है। उनके अनुसार, पूरे मामले में जवाबदेही तय करने के बजाय लीपापोती का प्रयास किया जा रहा है।


