मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में गुरुवार को पांचवें कुलपति डॉ. महावीर प्रसाद यादव की 30वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और परिजनों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत पूर्व कुलपति प्रो. आरकेपी रमण, कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार सिंह और पूर्व परीक्षा नियंत्रक सह कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा डॉ. महावीर प्रसाद यादव की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विधायक और सांसद भी चुने गए इस दौरान विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के साथ डॉ. महावीर प्रसाद यादव के दोनों पुत्र, बीएनएमयू के पूर्व जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार और सेवानिवृत्त आरक्षी उपाधीक्षक मनोज कुमार ने भी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। पूर्व कुलपति प्रो. आरकेपी रमण ने डॉ. महावीर प्रसाद यादव को याद करते हुए उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. यादव टीपी कॉलेज के विश्वकर्मा और अनुशासनप्रिय प्राचार्य के रूप में लोकप्रिय थे। उनकी कार्यशैली और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर मधेपुरा के लोगों ने उन्हें विधायक और बाद में सांसद भी चुना। 13 अगस्त 1997 को हुआ था निधन कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार सिंह ने डॉ. महावीर प्रसाद यादव को एक अनुशासनप्रिय प्राचार्य और कुशल राजनेता के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पूर्व परीक्षा नियंत्रक सह कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने डॉ. महावीर प्रसाद यादव के विस्तृत करियर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डॉ. यादव बीपी मंडल के मंत्रिमंडल में शिक्षा राज्य मंत्री रहे और उन्होंने पटना विश्वविद्यालय तथा बिहार विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति के रूप में भी कार्य किया। बीएन मंडल विश्वविद्यालय के पांचवें कुलपति के रूप में कार्य करते हुए 13 अगस्त 1997 को उनका निधन हो गया था। डॉ. मधेपुरी ने डॉ. महावीर प्रसाद यादव के एक प्रसिद्ध कथन को भी साझा किया: “सुपौल से राई बनकर यहां आया था और मधेपुरा ने मुझे पहाड़ बना दिया।” यह कथन मधेपुरा के प्रति उनके गहरे लगाव और यहां के लोगों से उनके आत्मीय संबंध को दर्शाता है। इस अवसर पर अन्य उपस्थित लोगों ने भी डॉ. यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की। मधेपुरा के बीएन मंडल विश्वविद्यालय में गुरुवार को पांचवें कुलपति डॉ. महावीर प्रसाद यादव की 30वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के अधिकारियों, शिक्षकों, कर्मचारियों और परिजनों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत पूर्व कुलपति प्रो. आरकेपी रमण, कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार सिंह और पूर्व परीक्षा नियंत्रक सह कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी द्वारा डॉ. महावीर प्रसाद यादव की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुई। विधायक और सांसद भी चुने गए इस दौरान विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के साथ डॉ. महावीर प्रसाद यादव के दोनों पुत्र, बीएनएमयू के पूर्व जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. अरुण कुमार और सेवानिवृत्त आरक्षी उपाधीक्षक मनोज कुमार ने भी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। पूर्व कुलपति प्रो. आरकेपी रमण ने डॉ. महावीर प्रसाद यादव को याद करते हुए उनके योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डॉ. यादव टीपी कॉलेज के विश्वकर्मा और अनुशासनप्रिय प्राचार्य के रूप में लोकप्रिय थे। उनकी कार्यशैली और व्यक्तित्व से प्रभावित होकर मधेपुरा के लोगों ने उन्हें विधायक और बाद में सांसद भी चुना। 13 अगस्त 1997 को हुआ था निधन कुलसचिव प्रो. अशोक कुमार सिंह ने डॉ. महावीर प्रसाद यादव को एक अनुशासनप्रिय प्राचार्य और कुशल राजनेता के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। पूर्व परीक्षा नियंत्रक सह कुलसचिव प्रो. भूपेंद्र नारायण यादव मधेपुरी ने डॉ. महावीर प्रसाद यादव के विस्तृत करियर का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि डॉ. यादव बीपी मंडल के मंत्रिमंडल में शिक्षा राज्य मंत्री रहे और उन्होंने पटना विश्वविद्यालय तथा बिहार विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति के रूप में भी कार्य किया। बीएन मंडल विश्वविद्यालय के पांचवें कुलपति के रूप में कार्य करते हुए 13 अगस्त 1997 को उनका निधन हो गया था। डॉ. मधेपुरी ने डॉ. महावीर प्रसाद यादव के एक प्रसिद्ध कथन को भी साझा किया: “सुपौल से राई बनकर यहां आया था और मधेपुरा ने मुझे पहाड़ बना दिया।” यह कथन मधेपुरा के प्रति उनके गहरे लगाव और यहां के लोगों से उनके आत्मीय संबंध को दर्शाता है। इस अवसर पर अन्य उपस्थित लोगों ने भी डॉ. यादव को श्रद्धांजलि अर्पित की।


