देश की राजनीति में महिलाओं की डायरेक्ट कैश बेनिफिट स्कीम राजनीतिक दलों के लिए सत्ता की चाबी बन गई। देश में 11 राज्यों में इन्हीं योजनाओं के दम पर अलग-अलग राजनीतिक दल सत्ता पाने में कामयाब हो पाए। अब BJP का फोकस पंजाब चुनाव-2027 में महिला वोटर्स पर रहेगा AAP सरकार की मावां-धीयां सत्कार योजना पैरेलल महिलाओं के लिए ज्यादा कैश देने की घोषणा करेगी। भाजपा हाल ही में पश्चिम बंगाल में इस फॉर्मूले को अपनाकर सरकार बना चुकी है। AAP सरकार मावां-धीयां सत्कार योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपए और एससी महिलाओं को 1500 रुपए प्रति माह देने जा रही है। वहीं भाजपा सूत्रों के मुताबिक पार्टी राज्य में 2500 से 3000 रुपए प्रति माह देने की योजना पर काम कर रही है। भाजपा के प्रदेश प्रधान केवल सिंह ढिल्लों भी महिलाओं के लिए डायरेक्ट कैश बेनिफिट स्कीम लाने के संकेत दे चुके हैं। ढिल्लों हर मंच पर यही बात दोहरा रहे हैं कि भाजपा सरकार हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, दिल्ली, उड़ीसा व पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में महिलाओं को डायरेक्ट कैश बेनिफिट के तहत लाभ दे रही है। भाजपा के शीर्ष नेता भी मानते हैं कि पार्टी ऐसी स्कीम जरूर लॉन्च करेगी। लेकिन अभी इस पर वो खुलकर नहीं बोल रहे हैं। पार्टी के प्रदेश महासचिव अनिल सरीन का कहना है कि पार्टी हर एंगल पर काम कर रही है। पार्टी जो वादे करती है वो पूरे भी करती है। पंजाब में 47.5% फीमेल वोटर्स
पंजाब में कुल 2,13,80,565 मतदाता हैं, जिसमें से 1,12,31,744 मेल और 1,01,48,076 फीमेल वोटर्स हैं। महिलाओं का वोट प्रतिशत 47.5% है। ऐसे में चुनाव में जीत और हार का फैसला सीधे-सीधे महिलाओं के हाथ में आ जाता है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट पवनदीप शर्मा का कहना है कि राजनीति दलों को पता है कि अगर महिलाओं के लिए कोई योजना लाई जाए तो वो तुरंत इंफ्लूएंस में आ जाती हैं और वो साइलेंटली उसी पार्टी को वोट दे देती हैं, जो उनके लिए योजनाएं लेकर आते हैं। इसीलिए भाजपा पंजाब में आम आदमी पार्टी की स्कीम को मात देने वाली स्कीम जरूर लाएगी। AAP ने चुनाव से पहले दी थी गारंटी
पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 से पहले AAP ने महिलाओं को 1000-1000 रुपए देने की घोषणा की थी। आप की इस गारंटी से महिलाओं ने वन साइडेड वोट दिए और AAP पंजाब में 92 सीटें जीतकर सरकार बनाने में कामयाब रही। आप सरकार ने योजना लागू होने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया लेकिन अभी तक किसी महिला को यह राशि नहीं मिली। पंजाब सरकार का दावा है कि जुलाई से सामान्य वर्ग की महिलाओं के खाते में 1000 रुपए और रिजर्व कैटेगरी की महिलाओं के खाते में 1500 रुपए आ जाएंगे। भाजपा 7 राज्यों में कर चुकी है सफल प्रयोग
भारतीय जनता पार्टी महिलाओं को डायरेक्ट कैश बेनिफिट स्कीम देकर चुनाव में 7 राज्यों में फायदा ले चुकी है। मध्य प्रदेश में भाजपा सरकार के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी थी। लेकिन शिवराज चौहान ने ऐन वक्त पर लाडली बहना योजना लागू की और उसके बाद विधानसभा चुनाव भाजपा जीत गई। महाराष्ट्र में चुनाव से पहले महिलाओं को डायरेक्ट कैश बेनिफिट स्कीम शुरू की और फिर से सरकार बना दी। इसी तरह हरियाणा में भी लाडो लक्ष्मी योजना की घोषणा की और भाजपा सरकार रिपीट करने में कामयाब हो गई। पश्चिम बंगाल में ममता सरकार पहले से योजना चला रही थी तो भाजपा ने कैश राशि की रकम बढ़ा दी जिसका फायदा फिर से भाजपा को मिला। पंजाब में आप सरकार भी इस योजना को लागू कर रही है तो भाजपा महिलाओं को इससे ज्यादा देने का ऐलान अपने घोषणा पत्र में करेगी। भाजपा शासित राज्यों में महिलाओं की डायरेक्ट कैश बेनिफिट स्कीमों के बारे में जानिए… 1. मध्य प्रदेश (लाडली बहना योजना)
मध्य प्रदेश का विधानसभा चुनाव इस योजना के प्रभाव का सबसे बड़ा और पहला उदाहरण बना। चुनाव से ठीक कुछ महीने पहले जब इस योजना के तहत पैसे ट्रांसफर होने शुरू हुए, तो इसने सत्ता विरोधी लहर को पूरी तरह पलट दिया। राज्य में महिलाओं का वोटिंग प्रतिशत पुरुषों से भी अधिक रहा। ग्रामीण और कस्बों की महिलाओं ने साइलेंट वोटर्स की तरह भाजपा के पक्ष में एकतरफा वोट किया, जिससे पार्टी ने सत्ता में वापसी की। इस योजना के तहत महिलाओं को 1250 रुपए प्रति माह सहायता राशि दी जाती है। 2. महाराष्ट्र (मुख्यमंत्री माझी लाड़की बहिन योजना):
लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद महायुति (भाजपा-शिवसेना-राकांपा) सरकार बैकफुट पर थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार ने इस स्थिति से उबरने के लिए तुरंत इस योजना को लागू किया और दिवाली के आस-पास किस्तों का भुगतान “भाऊबीज” (भाई दूज) के उपहार के रूप में किया। विधानसभा चुनावों में इस मास्टरस्ट्रोक ने विपक्ष के “संविधान बचाओ” नैरेटिव को पूरी तरह कमजोर कर दिया। लगभग 2.5 करोड़ लाभार्थी महिलाओं के समर्थन ने महायुति को महाराष्ट्र के इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक (230+ सीटें) दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई। इसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने ₹1,500 की वित्तीय सहायता सीधे DBT के जरिए बैंक खाते में दी जाती है। 3. छत्तीसगढ़ (महतारी वंदन योजना):
छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा ने “महतारी वंदन योजना” के तहत सालाना ₹12,000 देने का वादा अपने घोषणापत्र में प्रमुखता से शामिल किया था। कांग्रेस की ‘गृह लक्ष्मी’ योजना के मुकाबले भाजपा का यह वादा जमीनी स्तर पर महिलाओं को ज्यादा विश्वसनीय लगा । विश्लेषकों के अनुमानों के विपरीत, ग्रामीण और आदिवासी बहुल सीटों पर महिलाओं ने भाजपा के पक्ष में भारी मतदान किया, जिसके कारण राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ भाजपा की सरकार बनी। इस योजना के तहत महिलाओं के सशक्तिकरण और पोषण के लिए हर महीने ₹1,000 की निश्चित राशि उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। 4. ओडिशा (सुभद्रा योजना): ओडिशा में नवीन पटनायक (BJD) के 24 साल के मजबूत शासन को हिलाना बेहद मुश्किल माना जा रहा था। नवीन पटनायक का स्वयं सहायता समूहों (SHG) और महिलाओं पर जबरदस्त नियंत्रण था। भाजपा ने इसके काट के रूप में “सुभद्रा योजना” (₹50,000 का पांच वर्षीय पैकेज) का दांव खेला। ₹10,000 सालाना सीधे खाते में मिलने के वादे ने ओडिशा की महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित किया। महिलाओं के इस बड़े वोट शिफ्ट के कारण BJD का अभेद्य किला ढह गया और राज्य में पहली बार स्वतंत्र रूप से भाजपा की सरकार बनी। योजना के तहत महिलाओं को सालाना ₹10,000 की आर्थिक मदद दी जाती है जो ₹5,000-₹5,000 की दो समान किस्तों में (राखी पूर्णिमा और महिला दिवस पर) मिलती है। 5 वर्षों में कुल ₹50,000 दिए जाने हैं। 5. पश्चिम बंगाल (अन्नपूर्णा योजना)
पश्चिम बंगाल में ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ ममता बनर्जी (TMC) की राजनीति का सबसे मजबूत स्तंभ रही है, जिसने उन्हें हर चुनाव में महिलाओं का एकतरफा साथ दिलाया। राज्य की हालिया राजनैतिक परिस्थितियों और नेतृत्व परिवर्तन के बाद, भाजपा ने इस प्रभाव को तोड़ने के लिए रणनीति बदली।भाजपा ने न सिर्फ योजना का नाम ‘अन्नपूर्णा’ किया बल्कि राशि को सीधे ₹3,000 प्रति महीना (देश में सबसे ज्यादा) कर दिया। इस बड़ी आर्थिक बढ़ोतरी ने राज्य की गरीब और मध्यमवर्गीय महिलाओं के बीच सुरक्षा की एक नई भावना पैदा की और राजनैतिक समीकरणों को पूरी तरह प्रभावित किया। 6. हरियाणा (दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना)
हरियाणा चुनाव से ठीक पहले राजनैतिक पंडित यह मान रहे थे कि 10 साल की सत्ता के बाद भाजपा के लिए वापसी करना बेहद कठिन होगा। चुनाव से पहले भाजपा ने अपने घोषणापत्र में ₹2,100 प्रति महीना देने वाली ‘लाडो लक्ष्मी योजना’ का बड़ा वादा किया। ग्रामीण हरियाणा, जिसे पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान राजनीति का क्षेत्र माना जाता था, वहाँ महिला मतदाताओं ने साइलेंट वोटिंग की। ₹2,100 की इस देश की बड़ी मासिक सहायता राशि के वादे ने महिला वोट बैंक को सीधे भाजपा की तरफ खींचा, जिससे पार्टी ने लगातार तीसरी बार (हैट्रिक) राज्य में सरकार बनाई। 7. असम (ओरुनोडोई योजना 3.0)
असम की राजनीति में ‘ओरुनोडोई’ को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का सबसे अचूक ब्रह्मास्त्र माना जाता है। जब विपक्ष ने नागरिकता (CAA/NRC) और स्थानीय पहचान के मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की, तब इस योजना के जरिए गरीब और अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं तक सीधी आर्थिक पहुंच ने विपक्ष के वैचारिक विरोध को पूरी तरह बेअसर कर दिया। वर्तमान तीसरे चरण में लगभग 38 लाख महिलाओं को इसके दायरे में लाया गया है। इस योजना के लाभार्थियों के मजबूत गढ़ के कारण भाजपा गठबंधन ने असम के चुनावों और उप-चुनावों में विपक्ष का सूपड़ा साफ करते हुए एकतरफा और प्रचंड जीत हासिल की। सरकार ने इस इस योजना के तहत ₹1,500 प्रति महीना दे रही है। 8. पंजाब में AAP सरकार की मावां-धीयां सत्कार योजना
पंजाब सरकार ने राज्य में मावां-धीयां सत्कार योजना शुरू की है। इसके तहत सामान्य/OBC वर्ग की महिलाओं को ₹1,000 प्रति महीना और अनुसूचित जाति (SC) वर्ग की महिलाओं को ₹1,500 प्रति महीना मिलेंगे। झारखंड मुक्ति मोर्चा व कांग्रेस भी कर चुकी है प्रयोग झारखंड (मुख्यमंत्री मैइयां सम्मान योजना)
झारखंड चुनाव से ठीक पहले शुरू की गई यह योजना राज्य में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) गठबंधन सरकार के लिए “गेम-चेंजर” साबित हुई। शुरुआत में इसके तहत ₹1,000 प्रति महीना दिया जा रहा था, जिसे चुनाव के दौरान बढ़ाकर ₹2,500 प्रति महीना करने की घोषणा की गई। इस मास्टरस्ट्रोक ने विपक्ष (भाजपा) के कई मुद्दों को निष्प्रभावी कर दिया। राज्य की 55 लाख से अधिक लाभार्थी महिलाओं और उनके परिवारों ने हेमंत सोरेन सरकार पर भरोसा जताया, जिसके परिणामस्वरूप सत्ता विरोधी लहर के बावजूद JMM गठबंधन ने चुनावों में ऐतिहासिक और ठोस वापसी की। हिमाचल प्रदेश (इंदिरा गांधी प्यारी बहना सुख-सम्मान निधि)
हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस ने 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपए देने का वादा किया। महिला मतदाताओं के बीच यह घोषणा काफी चर्चित रही और चुनाव में कांग्रेस को इसका राफायदा मिला। पार्टी सत्ता में वापसी करने में सफल रही। हालांकि सरकार बनने के बाद योजना को लागू करने में वित्तीय चुनौतियां सामने आईं, जिस पर भाजपा ने सरकार को लगातार घेरा। इसके बावजूद कांग्रेस सरकार ने चरणबद्ध तरीके से योजना को लागू किया और पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता देना शुरू कर दिया।


