Karnataka CM Row: कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने राज्य की सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता पार्टी के भीतर चल रहे राजनीतिक घटनाक्रमों पर करीबी नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को जनता के धैर्य को उसकी कमजोरी नहीं समझना चाहिए। भाजपा नेता ने दावा किया कि सत्ता और पद की राजनीति में उलझी कांग्रेस सरकार को आने वाले समय में जनता करारा जवाब देगी। अशोक के मुताबिक राज्य को केवल मुख्यमंत्री बदलने की नहीं, बल्कि पूरी कांग्रेस सरकार बदलने की जरूरत है।
अंदरूनी सत्ता संघर्ष में उलझी रही सरकार
आर. अशोक ने आरोप लगाया कि 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के बाद से राज्य का शासन और प्रशासन प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास कार्यों, जनकल्याण योजनाओं, किसानों की समस्याओं और युवाओं के भविष्य पर ध्यान देने के बजाय अंदरूनी सत्ता संघर्ष में उलझी हुई है। उनके अनुसार कांग्रेस के भीतर कथित सत्ता साझाकरण व्यवस्था ने प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के बजाय राजनीतिक समीकरण साधने में व्यस्त है।
राज्य की छवि राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित – भाजपा
भाजपा नेता ने कहा कि कांग्रेस नेताओं के बीच चल रही खींचतान के कारण राज्य की छवि राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसौधा अब शासन का केंद्र कम और राजनीतिक दांवपेंच का मंच ज्यादा बन गया है। अशोक ने कहा कि प्रशासनिक फैसलों में देरी हो रही है और सरकार की प्राथमिकताएं पूरी तरह बदल चुकी हैं। उनके मुताबिक राज्य की जनता विकास चाहती है, लेकिन सरकार केवल सत्ता बचाने में लगी हुई है। उन्होंने कहा कि इससे निवेश, रोजगार और विकास योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री पर साधा निशाना
आर. अशोक ने मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मुख्यमंत्री पद पर कौन बैठता है या किसे जिम्मेदारी दी जाती है, क्योंकि कांग्रेस सरकार के पास जनता को देने के लिए कोई ठोस उपलब्धि नहीं है। भाजपा नेता ने सरकार पर किसानों की समस्याओं की अनदेखी, युवाओं को रोजगार के अवसर देने में विफल रहने और जनहित के मुद्दों पर जवाबदेही नहीं दिखाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार का पूरा एजेंडा सत्ता, पद और स्वार्थ की राजनीति तक सीमित होकर रह गया है।


