महाराष्ट्र की आगामी विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। चंद्रपुर-गढ़चिरौली-वर्धा विधान परिषद सीट से भाजपा द्वारा उद्योगपति अरुण लखानी को उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा जोर पकड़ रही है। खास बात यह है कि अरुण लखानी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की नेता और सांसद सुप्रिया सुले के समधी हैं। इस संभावित उम्मीदवारी ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
दरअसल, रविवार को सुप्रिया सुले ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने अपनी बेटी रेवती सुले की शादी का निमंत्रण प्रधानमंत्री को दिया। मुलाकात के समय रेवती सुले और उनके होने वाले पति सारंग लखानी व उनके पिता अरुण लखानी भी मौजूद थे। इसके बाद से ही भाजपा की ओर से अरुण लखानी को विधान परिषद चुनाव में उतारने की अटकलें तेज हो गई हैं। अरुण लखानी ‘विश्वराज ग्रुप’ के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर हैं।
विजय वडेट्टीवार ने लगाया सनसनीखेज आरोप
सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चाहे अरुण लखानी हों या कोई और उद्योगपति, आखिरकार वे उद्योगपति ही हैं और अब उनका संबंध बड़े राजनीतिक परिवारों से भी जुड़ चुका है। ऐसी स्थिति में ये चुनाव किसी आम आदमी के दायरे से बिल्कुल बाहर हो चुका हैं। कम से कम हमारे जैसे लोगों के लिए तो यह चुनाव हमारी पहुंच से बहुत दूर दिखाई दे रहा है।
वडेट्टीवार ने आरोप लगाया कि विधान परिषद चुनाव अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ज्यादा ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ में बदलते जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि एक वोट के लिए 15 लाख रुपये तक का रेट तय किया गया है और कुछ नगरसेवकों को पांच लाख रुपये तक का ‘टोकन’ देकर अपने पक्ष में करने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस तरह के भ्रष्टाचार के बीच निष्पक्ष चुनाव होना और किसी योग्य व्यक्ति का चुनकर आना नामुमकिन है। यह सब देखकर डर लगता है कि भविष्य में देश में लोकतंत्र बचेगा भी या नहीं।
कांग्रेस के 60 से ज्यादा नगरसेवक ‘नॉट रीचेबल’
पूर्व विदर्भ की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब खबर सामने आई कि कांग्रेस के 60 से अधिक नगरसेवक (पार्षद) अचानक संपर्क से बाहर हो गए हैं। बताया जा रहा है कि चंद्रपुर और गढ़चिरौली के ये नगरसेवक भाजपा के स्थानीय विधायक बंटी भांगड़िया के संपर्क में हैं और अज्ञात स्थान पर ले जाए गए हैं। इस क्षेत्र में विजय वडेट्टीवार की अच्छी पकड़ मानी जाती है, ऐसे में इसे वडेट्टीवार के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
‘हमारे संपर्क में भाजपा के 100 नगरसेवक’
हालांकि, विजय वडेट्टीवार ने भी पलटवार करते हुए दावा किया कि भाजपा के भी 100 से ज्यादा नगरसेवक कांग्रेस के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के भीतर भी भारी अंदरूनी कलह है और उनका दूसरा गुट कांग्रेस की मदद करने को तैयार है। हालांकि, उन्होंने उन नगरसेवकों के नाम या कहां के हैं, इसका खुलासा नहीं किया।
इस दौरान कांग्रेस विधायक वडेट्टीवार ने कहा कि विधान परिषद चुनाव अब आम लोगों की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। बड़े उद्योगपति और कारोबारी पैसे के दम पर राजनीति में दखल बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि यही स्थिति रही तो भविष्य में विधान परिषद केवल ठेकेदारों और उद्योगपतियों तक सीमित होकर रह जाएगी और सामान्य व्यक्ति इससे बाहर हो जाएगा।
क्या चुनाव लड़ेंगी शिवानी वडेट्टीवार?
इस बीच, विजय वडेट्टीवार की बेटी शिवानी वडेट्टीवार के भी चंद्रपुर-गढ़चिरौली-वर्धा सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा थी। उन्हें महाविकास अघाड़ी (MVA) की उम्मीदवार बनाने की अटकलें थीं। हालांकि, उम्र संबंधी अड़चनों के कारण उनके चुनाव से पीछे हटने की खबरें आने लगीं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विजय वडेट्टीवार ने कहा कि अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व के निर्णय के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भाजपा किसे उम्मीदवार बनाती है, उसके आधार पर कांग्रेस अपना अगला कदम तय करेगी। शिवानी पीछे हट गई है, अभी ऐसा नहीं है। पार्टी सभी राजनीतिक परिस्थितियों की बारीकी से समीक्षा कर रही है।


