‘स्कूल के लिए आवाज उठाने पर मेरे पापा को मार डाला। अफसोस है कि मैं उन्हें कभी गले नहीं लगा पाया, प्यार नहीं जता पाया। पापा ने सिखाया है, इसलिए अब हम स्कूलों की हालत सुधारकर रहेंगे। जहां अन्याय होगा, वहां अब्दुल खड़ा मिलेगा।’ 25 साल के शेख अब्दुल हाफिज पिता को याद कर भावुक हो जाते हैं। आरोप है कि गांव के सरकारी स्कूल की हालत दिखाने पर भड़के BJP कार्यकर्ताओं ने अब्दुल और उनके पिता शेख मोहम्मद मफीक से मारपीट की। गंभीर चोटों के चलते 15 अगस्त को मफीक की मौत हो गई। मामले में अब तक 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। अब्दुल कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के सदस्य हैं और पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के करीशुंडा गांव में रहते हैं। आरोपी भी इसी गांव के हैं। घटना के बाद गांव में डर का माहौल है। ज्यादातर आरोपियों के घरों पर ताले हैं और उनके परिवार गांव छोड़ चुके हैं। अब्दुल का परिवार अब किस हालत में है? गांव के जिस सरकारी स्कूल से विवाद शुरू हुआ, उसकी क्या हालत है? और BJP का आरोपों पर क्या कहना है? यही जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड जीरो पर अब्दुल के गांव पहुंची। सबसे पहले अब्दुल की बात घटना के बाद 17 अगस्त को अब्दुल से मिलने CJP लीडर आशुतोष रांका भी गांव पहुंचे थे। अब्दुल का गांव करीशुंदा कोलकाता से लगभग 150 किमी दूर बांकुरा जिले में पड़ता है। गांव में अब्दुल के घर पहुंचने के लिए सड़क नहीं है। रास्ता कीचड़ से भरा हुआ है। पूरी बरसात यहां ऐसे ही हालात रहते हैं। गांव में पहुंचते ही हमें सबसे पहले भारी पुलिसबल दिखा। अब्दुल के घर पर सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात अब्दुल के घर के बाहर भी 2 पुरुष पुलिसकर्मी और एक महिला पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। सुरक्षा कारणों से बिना एंट्री कराए और पुलिस से इजाजत लिए अब्दुल के घर नहीं जाने दिया जाता है। अब्दुल के घर में उनकी मां और 21 साल की बहन हैं, इसके अलावा दिल्ली से पहुंचे 12 CJP कार्यकर्ता भी रुके हुए हैं। पिता के जिक्र पर मां ने बच्चों को गले लगाया घर वाले अब्दुल को रीक नाम से बुलाते हैं। बिना प्लास्टर वाले दो कमरे के घर में अब्दुल अपने पिता, मां और बहन के साथ रहते थे। बहन इसी साल नौकरी के लिए बाहर चली गई। पिता के जाने के बाद अब घर में अब्दुल और उनकी मां रहती हैं। पिता के बारे में जिक्र होने पर ही अब्दुल की मां दोनों बच्चों को गले लगा लेती हैं। दोनों बच्चे भावुक हो जाते हैं, लेकिन मां अपने भाव चेहरे पर नहीं आने देती हैं। पिता थोक का सामान दुकानों पर पहुंचाते थे, उनकी कमाई से ही घर चलता था। अब्दुल अभी कोई रोजगार नहीं करते हैं। हालांकि कुछ समय कोलकाता में रहकर डिलीवरी बॉय का काम किया है। अब्दुल ने कहा- जंतर-मंतर से लौटते हुई मारपीट “मैं शुरुआत से ही CJP के आंदोलन से जुड़ा हूं। मैं दिल्ली के जंतर-मंतर भी गया था। 26 जुलाई तक वहीं था। 27 जुलाई को ट्रेन से घर लौटा। इसके बाद गांव के कुछ लोग मुझसे नाराज रहने लगे।” “28 जुलाई को पहली बार मेरे साथ मारपीट हुई। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने मुझे घेर लिया और धक्का-मुक्की करने लगे। उन्होंने पूछा कि मैं दिल्ली क्यों गया था। इसके बाद वे मेरी स्कूटी तोड़ने लगे और मुझे मारने की धमकी दी।” “गांव के लोगों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। इसके बाद मेरा पुराना फोन छीन लिया गया। उसमें मेरे पास कई जरूरी सबूत थे। मैं पहली मारपीट की शिकायत लेकर इंडस पुलिस स्टेशन भी गया था, लेकिन पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। 13 अगस्त को मेरे परिवार पर हमला करने वाले लोग भी वही थे, जिन्होंने पहले मेरे साथ मारपीट की थी।”
स्कूल के हालात दिखाने पर भड़के अब्दुल बताते हैं कि ‘स्कूल ठीक करो’ आंदोलन के चलते 13 अगस्त की सुबह वे अपने पुराने प्राइमरी स्कूल पहुंचे थे। यहां टीचर्स के प्रभारी काशीनाथ डे से स्कूल की समस्याओं को दिखाने के लिए परमिशन मांगी। उन्होंने अब्दुल का नाम और पता पूछ लिया। अब्दुल आरोप लगाते हैं;- उसी दिन रात 8 बजे बीजेपी के गुंडे घर आ गए। लाइट कट गई और उन्होंने अंधेरे में मुझे थप्पड़, लात और घूंसे मारना शुरू कर दिया। एक आदमी तेज धार वाला सलिया लेकर आया, लेकिन अंधेरे में मैं बच गया। पापा को भी बहुत बुरी तरह पीटा। हमने बचकर पुलिस बुलाई लेकिन वे पुलिस के सामने भी नहीं माने। अब्दुल आगे बताते हैं कि पिता को ज्यादा चोटें आईं थीं। अस्पताल में भी आरोपियों ने पिता के साथ मारपीट की। पुलिस के सामने ही मारने की धमकी दी। फिर 14 अगस्त को सुबह 10-11 बजे के बीच तीन गुंडे घर आकर समझौते के लिए दबाब बनाने लगे। वे चाहते थे कि हम फेसबुक पर लाइव आकर माफी मांगें। लेकिन हमने झुकने से मना कर दिया। अब्दुल ने कहा- स्कूल की मरम्मत हुई, पेंट कराया गया अब्दुल का आरोप है कि घटना के बाद करीशुंदा के सरकारी प्राइमरी स्कूल में पुताई और मरम्मत का काम आनन-फानन में कराया गया। अब्दुल के घर से करीब 200 मीटर दूर स्थित स्कूल में दीवारों पर नया पेंट और प्लास्टर के निशान दिखे। ग्रामीणों और बच्चों ने भी बताया कि काम हाल में हुआ है। हालांकि, शिक्षक आनंद मंडल ने दावा किया कि मरम्मत 8-10 महीने पहले हुई थी। स्कूल में 6 कमरे, 2 टॉयलेट और स्मार्ट क्लास का मॉनिटर है। प्रभारी शिक्षक काशीनाथ डे के मुताबिक, अब्दुल और उसकी बहन इसी स्कूल में पढ़े हैं। बांकुड़ा के DM अनिल दास गुप्ता ने कहा कि गांव के सरकारी स्कूल को लेकर कोई बड़ी शिकायत नहीं है। स्कूल में करीब 150 बच्चे और 4 शिक्षक हैं। दो टॉयलेट पहले से हैं, जबकि लड़कियों के लिए एक और टॉयलेट का काम चल रहा है। स्कूल में स्मार्ट क्लासरूम भी बनाए जा रहे हैं। अब्दुल के घर रुके CJP कार्यकर्ता, आरोपियों के घरों पर ताले अब्दुल के घर पुलिसकर्मियों के अलावा करीब 12 CJP कार्यकर्ता भी रुके हुए हैं। इनमें जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के लिए खाना लेकर पहुंचे जुनैद भी शामिल हैं। शेख मोहम्मद मफीक की मौत के मामले में 5 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज है। इनमें शेख आजाद, श्रीकांत माझी, रोहित माझी, अष्टम माझी और प्रशांत माझी (रुइदास) शामिल हैं। इसके अलावा, FIR में 8 से 10 अन्य अज्ञात लोगों का भी जिक्र है, जिन पर घर में घुसकर हमला करने का आरोप है। अभी तक पुलिस ने 11 लोगों को अरेस्ट किया है। शेख आजाद और पिंटू माझी के घर हम पहुंचे। दोनों के घरों पर ताले लटक रहे थे। पड़ोसियों ने बताया कि इसके परिवार 17 अगस्त के आसपास गांव से चले गए थे। BJP विधायक निर्मल के साथ आरोपियों की फोटो वायरल करीशुंदा गांव इंडस विधानसभा में आता हैं। 2021 से यहां विधायक बीजेपी के निर्मल धारा ही हैं। वे जब 2025 विधानसभा चुनावों में गांव में आए थे। तो उनके स्वागत और बीजेपी के कार्यक्रम में आरोपी शेख आजाद और प्रशांत माझी शामिल थे। इसके अलावा भी बाकी आरोपी विधायक निर्मल धारा के करीबी ही बताए जाते हैं। हालांकि, घटना के बाद से निर्मल ने कोई बयान नहीं दिया है। हमने उनसे बात करने के लिए कॉल किया और मैसेज भी किया है, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया है। ========== ये खबर भी पढ़ें शरीर में पैलेट गन के छर्रे, आंख से दिखना बंद: साहिल बोले- पुलिस ने FIR नहीं की, पढ़ें इंटरव्यू 20 जुलाई को दिल्ली में CJP के संसद मार्च के दौरान पैलेट गन से घायल साहिल लोहचब की आंखों में आज भी दो छर्रे फंसे हैं। दो बार सर्जरी के बावजूद आंखों की रोशनी लौटने की उम्मीद कम है। साहिल का आरोप है कि FIR दर्ज कराने के लिए परिवार ने कई बार पुलिस से संपर्क किया, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। 21 अगस्त को राहुल गांधी करीब 6 घंटे संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे, जिसके बाद शिकायत पर FIR दर्ज हुई। पढ़ें पूरी खबर
‘BJP के गुंडों ने पापा को मार डाला’:पश्चिम बंगाल में CJP कार्यकर्ता अब्दुल के पिता ने सरकारी स्कूल के हालात दिखाए थे, 11 अरेस्ट

