शाह बोले- देश कोई धर्मशाला नहीं:सिर्फ नागरिकों रहने का अधिकार, घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए खतरा

शाह बोले- देश कोई धर्मशाला नहीं:सिर्फ नागरिकों रहने का अधिकार, घुसपैठिए देश की सुरक्षा के लिए खतरा

गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को कहा कि यह देश कोई धर्मशाला नहीं है। देश में रहने का अधिकार केवल नागरिकों को है। शाह ने इंटेलिजेंस ब्यूरो की नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजीज (NSS) कॉन्फ्रेंस में कहा- घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय बदलाव के लिए खतरा हैं। हमारा लक्ष्य बहुत कम समय में देश को घुसपैठियों से मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि पिछले आठ महीनों में सभी बॉर्डर स्टेट का दौरा किया है। उन्होंने इन राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा के लिए चार-तरफा रणनीति से जुड़ा एक दस्तावेज साझा किया। शाह ने आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने, उसके 360 डिग्री नेटवर्क को तोड़ने के लिए PRAHAR रणनीति को रोज की कार्रवाई में उतारने की बात कही। शाह के संबोधन की 5 बड़ी बातें… 1. नक्सलवाद, आतंक और उग्रवाद की चुनौतियां खत्म- सरकार ने आंतरिक सुरक्षा के तीन बड़े केंद्रों- नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर का आतंकवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद से जुड़ी चुनौतियां खत्म कर दी हैं। इसका श्रेय सभी राज्यों की पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिसबलों को जाता है। अगर पिछली सरकारों ने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं को गंभीर होने से पहले समझ लिया होता, तो देश को दशकों तक इनका खामियाजा नहीं भुगतना पड़ता। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के पूरे कैडर को खत्म करना और एक ही रात में उस पर प्रतिबंध लगाना केंद्र और राज्यों के तालमेल का बेहतरीन उदाहरण है। 2. सात साल में 274 भगोड़े विदेश से लाए गए- 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से वापस लाया गया है। सभी राज्य लक्ष्य तय करें कि विदेश में बैठे भगोड़ों को देश के कानून के दायरे में लाया जाए। मोदी सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर को भी अपग्रेड किया है, ताकि यह कई स्तरों पर नतीजे देने वाला प्लेटफॉर्म बन सके। 3. एक साल में नए कानून 100% लागू होंगे- अगले एक साल में तीनों नए कानून 100 फीसदी लागू होंगे। इससे आपराधिक मामलों का निपटारा सुप्रीम कोर्ट तक तीन साल में हो सकेगा और सजा की दर 25 फीसदी बढ़ेगी। NSS फोरम को 15 से 20 साल आगे की सुरक्षा चुनौतियों का अनुमान लगाकर उन्हें बड़े खतरे बनने से रोकने की रणनीति बनानी चाहिए। युवा अधिकारी डेटा को जोड़कर, उसका एनालिसिस करके और AI के जरिए अपराध करने के तरीकों की पहचान कर काम की खुफिया जानकारी तैयार करें। इससे भविष्य की चुनौतियों को रोका जा सकेगा। 4. नशामुक्त भारत के लिए 3 लेवल पॉलिसी- सभी राज्यों की पुलिस नशीले पदार्थों के खिलाफ नॉरकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 को जमीन पर लागू करें। इससे युवा पीढ़ी को बचाने में मदद मिलेगी। नशामुक्त भारत के लिए डिटेक्ट, डिसरप्ट और डिस्ट्रॉय यानी पता लगाना, रोकना और खत्म करना- तीन स्तरों की रणनीति अपनानी होगी। नशीले पदार्थों के खिलाफ सबसे सफल लड़ाई केवल भारत ही लड़ सकता है। 5. चुनौतियों को संकट न बनने दें- सुरक्षा नीति अलग-अलग नहीं बनाई जा सकती। इसमें वैश्विक अस्थिरता, ऊर्जा संकट, सप्लाई चेन की रुकावट, बढ़ता कट्टरपंथ और साइबर युद्ध जैसी चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा। देश को चुनौतियों की पहचान समय रहते करनी चाहिए और उनके बड़े संकट बनने से पहले उन्हें खत्म कर देना चाहिए। ऐसा माहौल बनाकर हम सुरक्षित, घुसपैठियों से मुक्त और नशामुक्त भारत बना सकेंगे। ——————————— ये खबर भी पढ़ें… राहुल-खड़गे की मोदी को चिट्ठी- जाति जनगणना के सवाल बदलें, कहा- इसमें पिछड़ा वर्ग शब्द नहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने जाति जनगणना में जातियों के नाम दर्ज करने और डेटा जुटाने के तरीके का विरोध किया है। उन्होंने पीएम मोदी को लेटर लिखकर जनगणना में पूछे जाने वाले सवाल बदलने की मांग की है। पूरी खबर पढ़ें…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *