Highway Emergency Response: राजस्थान में हाईवे पर सड़क हादसों की रोकथाम के लिए पुलिस ने बीते दिनों चिन्हित ब्लैक स्पॉट की सूची जारी की है। वहीं अब हाईवे पर दुर्घटना में गोल्डन आवर्स में घायलों की जान बचाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक बड़ी योजना तैयार की है। अब राज्य के चिन्हित ‘एक्सीडेंटल हॉटस्पॉट’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्रों) पर अत्याधुनिक हाईवे रेस्क्यू व्हीकल तैनात किए जाएंगे। पहले चरण में मई माह तक ऐसे 50 वाहनों को विभिन्न रूटों पर उतारने की तैयारी है।
हादसे के बाद वाहन से निकालना होगा आसान
अक्सर गंभीर हादसों में लोग वाहन के भीतर ही फंस जाते हैं। इन रेस्क्यू वाहनों में हाइड्रोलिक कटर, रोड कटिंग टूल्स, जैक और हाई पावर लाइट जैसे आधुनिक उपकरण होंगे, जिनकी मदद से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा। हाईवे पर कई दुर्घटनाओं में पीड़ितों की वाहनों में फंसे होने से दर्दनाक मौत होने के कई मामले सामने आए हैं। बीते दो दिन पूर्व दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस हाईवे पर आग लगने से कार में फंसे सभी लोगों की मौत हो गई। वक्त रहते पीड़ितों को कार से बाहर निकाले जाने के इंतजाम होते तो जनहानि को कम किया जा सकता था।
जीपीएस से निगरानी और त्वरित सहायता
लोकेशन ट्रैकिंग: सभी वाहन जीपीएस सिस्टम से लैस होंगे, जिससे कमांड सेंटर से इनकी निगरानी होगी और हादसे की सूचना मिलते ही नजदीकी वाहन को मौके पर भेजा जाएगा। समय रहते रेस्क्यू वाहन पहुंचने पर पीड़ितों को राहत मिल सकती है।
विशेष प्रशिक्षण: तैनात पुलिसकर्मियों को राहत, बचाव और प्राथमिक उपचार का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे
‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के बाद का पहला एक घंटा) में प्रभावी ढंग से काम कर सकें। सड़क हादसों में अधिकांश मौतें गोल्डन आवर्स में ही होती हैं। हादसे वाले स्थान पर रेस्क्यू व्हीकल को पहुंचने के लिए न्यूनतम समय सीमा का निर्धारण भी तय किया जाएगा।
प्रत्येक वाहन पर 20 लाख का खर्च
योजना के तहत प्रत्येक वाहन पर करीब 20 लाख रुपए खर्च किए जाएंगे। इनका संचालन जिला पुलिस अधीक्षक की निगरानी में होगा। एडीजी (आयोजना एवं आधुनिकीकरण) डॉ. प्रशाखा माथुर के अनुसार, इन वाहनों को मई माह में हाईवे पर लगाने की तैयारी अंतिम चरण में है। बहुत जल्द ही रेस्क्यू वाहनों को हाईवे पर तैनात किया जाएगा।


