कानपुर इस्कॉन को मिला उत्तर भारत का पहला रोबोटिक हाथी:एक्ट्रेस श्रिया सरन की भेंट, 500 किलो वजन; रबर-फाइबर और फोम से बना

कानपुर इस्कॉन को मिला उत्तर भारत का पहला रोबोटिक हाथी:एक्ट्रेस श्रिया सरन की भेंट, 500 किलो वजन; रबर-फाइबर और फोम से बना

मंदिरों में हाथियों की सेवा और मौजूदगी की परंपरा अब एक आधुनिक और दयालु बदलाव की ओर बढ़ रही है। कानपुर के इस्कॉन मंदिर को उत्तर भारत का पहला ‘मशीनी हाथी’ मिला है। पीपल फार द एथिकल ट्रीटमेंट आफ एनिमल्स (PETA) इंडिया और साउथ की मशहूर एक्ट्रेस श्रिया सरन ने मिलकर इसे मंदिर को भेंट किया है। इस पहल का मकसद बेजुबान हाथियों को कैद और जंजीरों से आजादी दिलाकर उन्हें उनके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में रहने का अवसर देना है। बिल्कुल असली जैसा एहसास,कान हिलाएगा और सूंड से पानी भी छिड़केगा यह मशीनी हाथी दिखने में इतना असली है कि पहली नजर में कोई भी धोखा खा जाए। 3 मीटर ऊंचे और करीब 500 किलो वजनी इस हाथी को रबर, फाइबर, स्टील और फोम से तैयार किया गया है। यह रोबोटिक हाथी न केवल अपना सिर और पूंछ हिला सकता है, बल्कि अपनी आंखों को झपकाने के साथ-साथ सूंड उठाकर पानी का छिड़काव भी करता है। इसे बिजली की मदद से चलाया जाता है और पैरों में पहिए होने के कारण इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है। श्रिया सरन का संदेश-‘गणेश के स्वरूप को जंगल में रहने दें’ इस्कॉन मीडिया प्रभारी प्रशांत प्रभु जी ने बताया कि ,एक्ट्रेस श्रिया सरन ने मंदिर के नाम एक संदेश भेजा। उन्होंने कहा कि,इस्कॉन कानपुर को यह ‘गजराज’ भेंट करते हुए उन्हें बेहद खुशी हो रही है। श्रिया के मुताबिक, हाथी भगवान गणेश के प्रतिनिधि हैं और उन्हें कैद में रखने के बजाय प्राकृतिक आवास में फलने-फूलने का हक है। यह मशीनी हाथी मंदिर की पुरानी परंपराओं को भी जिंदा रखेगा और किसी जीव को कष्ट भी नहीं होगा।

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