बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और सरकारी जमीनों की सुरक्षा को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एक तरफ जहां राज्य में बड़े पैमाने पर अंचल अधिकारियों (CO) और राजस्व अधिकारियों के तबादले व नई पोस्टिंग की गई है। वहीं दूसरी तरफ डिजिटल पोर्टल के जरिए सरकारी जमीनों से जुड़ी जमाबंदियों को चिह्नित करने का काम तेज कर दिया गया है। अंचल अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों का बड़े स्तर पर फेरबदल किया है। जारी अधिसूचना के अनुसार, कई प्रतीक्षारत और विभिन्न विभागों में तैनात अधिकारियों को नया जिम्मा सौंपते हुए अंचल अधिकारी (CO) के रूप में नई पोस्टिंग दी गई है। प्रमुख तबादले इस प्रकार हैं कुमार हर्ष को समस्तीपुर का अंचल अधिकारी बनाया गया है। सीमा रंजन को वैशाली का अंचल अधिकारी नियुक्त किया गया है। खुशबू गौतम बांका से सासाराम सदर, रोहतास की नई सीओ होंगी। पल्लवी कुमारी को पुरनहिया, शिवहर से हटाकर बेतिया सदर, पश्चिम चम्पारण की जिम्मेदारी दी गई है। प्रीति कुमारी को भू-अर्जन कार्यालय, सहरसा से कदवा, कटिहार भेजा गया है। वर्षा रानी बंदोबस्त कार्यालय, अररिया से बेनीपुर, दरभंगा की सीओ बनाई गई हैं। गरिमा बंदोबस्त कार्यालय, वैशाली से पुरनहिया, शिवहर भेजी गई हैं। इनको पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया मयंक आशुतोष आनन्द (कदवा, कटिहार), अश्विनी कुमार (बेनीपुर, दरभंगा) और उमा शंकर (बेतिया सदर) को उनके वर्तमान स्थानों से हटाकर मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है। सरकार ने सभी जिला के डीएम और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्थानांतरित किए गए अफसरों को तुरंत रिलीज करें ताकि वे एक सप्ताह के भीतर अपने नए पदों पर योगदान दे सकें। सरकारी जमीनों पर पैनी नजर: ऑनलाइन पोर्टल पर दिखेगी पूरी सूची नए अधिकारियों के आने के साथ ही सरकार ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा और अवैध कब्जों को रोकने के लिए एक बड़ा डिजिटल अभियान शुरू किया है। बिहार सर्वेक्षण कार्यालय की उप निदेशक मोना झा ने सभी जिला के डीएम को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि सरकारी भूमि से जुड़ी सभी जमाबंदियों को ऑनलाइन चिह्नित कर प्रदर्शित किया जाए। अब कैसे होगी सरकारी जमीन की पहचान? विभाग ने ‘बिहारभूमि पोर्टल’ के अंतर्गत ई-जमाबंदी मॉड्यूल (e-Jamabandi Module) में विशेष प्रावधान किए हैं। अब अंचल अधिकारी अपने लॉगिन आईडी के जरिए सीधे यह देख सकेंगे कि उनके क्षेत्र में कौन-कौन सी जमीनें सरकारी खतियान या पंजी के अनुसार सरकारी हैं। पहचान करने की आसान प्रक्रिया अंचल अधिकारी सबसे पहले बिहारभूमि पोर्टल के e-Jamabandi मॉड्यूल पर लॉगिन करेंगे। इसके बाद ‘Reporting’ मेनू में जाकर “Search Govt Land Jamabandi” विकल्प को चुनेंगे। वहां जिला, अंचल, हल्का, मौजा और वर्तमान जमाबंदी का चयन कर जैसे ही ‘Search’ बटन दबाएंगे, स्क्रीन पर उस पूरे गांव (मौजा) की सरकारी जमीनों और उनसे जुड़ी जमाबंदियों की सूची सामने आ जाएगी। जनता और प्रशासन को क्या होगा फायदा? इस नई व्यवस्था और नए अंचल अधिकारियों की तैनाती से जमीनी विवादों में भारी कमी आने की उम्मीद है। अवैध खरीद-बिक्री पर रोक: जैसे ही सरकारी जमीनें पोर्टल पर साफ-साफ चिह्नित हो जाएंगी, कोई भी भू-माफिया सरकारी जमीन को आम जनता को धोखा देकर नहीं बेच पाएगा। पारदर्शिता: आम लोगों और प्रशासन दोनों के पास यह स्पष्ट डेटा होगा कि कौन सी जमीन सरकार की (जैसे गैरमजरूआ आम, खास या अन्य सरकारी विभाग की) है। बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य में प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने और सरकारी जमीनों की सुरक्षा को लेकर दो बेहद महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। एक तरफ जहां राज्य में बड़े पैमाने पर अंचल अधिकारियों (CO) और राजस्व अधिकारियों के तबादले व नई पोस्टिंग की गई है। वहीं दूसरी तरफ डिजिटल पोर्टल के जरिए सरकारी जमीनों से जुड़ी जमाबंदियों को चिह्नित करने का काम तेज कर दिया गया है। अंचल अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों का बड़े स्तर पर फेरबदल किया है। जारी अधिसूचना के अनुसार, कई प्रतीक्षारत और विभिन्न विभागों में तैनात अधिकारियों को नया जिम्मा सौंपते हुए अंचल अधिकारी (CO) के रूप में नई पोस्टिंग दी गई है। प्रमुख तबादले इस प्रकार हैं कुमार हर्ष को समस्तीपुर का अंचल अधिकारी बनाया गया है। सीमा रंजन को वैशाली का अंचल अधिकारी नियुक्त किया गया है। खुशबू गौतम बांका से सासाराम सदर, रोहतास की नई सीओ होंगी। पल्लवी कुमारी को पुरनहिया, शिवहर से हटाकर बेतिया सदर, पश्चिम चम्पारण की जिम्मेदारी दी गई है। प्रीति कुमारी को भू-अर्जन कार्यालय, सहरसा से कदवा, कटिहार भेजा गया है। वर्षा रानी बंदोबस्त कार्यालय, अररिया से बेनीपुर, दरभंगा की सीओ बनाई गई हैं। गरिमा बंदोबस्त कार्यालय, वैशाली से पुरनहिया, शिवहर भेजी गई हैं। इनको पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया मयंक आशुतोष आनन्द (कदवा, कटिहार), अश्विनी कुमार (बेनीपुर, दरभंगा) और उमा शंकर (बेतिया सदर) को उनके वर्तमान स्थानों से हटाकर मुख्यालय में पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है। सरकार ने सभी जिला के डीएम और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्थानांतरित किए गए अफसरों को तुरंत रिलीज करें ताकि वे एक सप्ताह के भीतर अपने नए पदों पर योगदान दे सकें। सरकारी जमीनों पर पैनी नजर: ऑनलाइन पोर्टल पर दिखेगी पूरी सूची नए अधिकारियों के आने के साथ ही सरकार ने सरकारी जमीनों की सुरक्षा और अवैध कब्जों को रोकने के लिए एक बड़ा डिजिटल अभियान शुरू किया है। बिहार सर्वेक्षण कार्यालय की उप निदेशक मोना झा ने सभी जिला के डीएम को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि सरकारी भूमि से जुड़ी सभी जमाबंदियों को ऑनलाइन चिह्नित कर प्रदर्शित किया जाए। अब कैसे होगी सरकारी जमीन की पहचान? विभाग ने ‘बिहारभूमि पोर्टल’ के अंतर्गत ई-जमाबंदी मॉड्यूल (e-Jamabandi Module) में विशेष प्रावधान किए हैं। अब अंचल अधिकारी अपने लॉगिन आईडी के जरिए सीधे यह देख सकेंगे कि उनके क्षेत्र में कौन-कौन सी जमीनें सरकारी खतियान या पंजी के अनुसार सरकारी हैं। पहचान करने की आसान प्रक्रिया अंचल अधिकारी सबसे पहले बिहारभूमि पोर्टल के e-Jamabandi मॉड्यूल पर लॉगिन करेंगे। इसके बाद ‘Reporting’ मेनू में जाकर “Search Govt Land Jamabandi” विकल्प को चुनेंगे। वहां जिला, अंचल, हल्का, मौजा और वर्तमान जमाबंदी का चयन कर जैसे ही ‘Search’ बटन दबाएंगे, स्क्रीन पर उस पूरे गांव (मौजा) की सरकारी जमीनों और उनसे जुड़ी जमाबंदियों की सूची सामने आ जाएगी। जनता और प्रशासन को क्या होगा फायदा? इस नई व्यवस्था और नए अंचल अधिकारियों की तैनाती से जमीनी विवादों में भारी कमी आने की उम्मीद है। अवैध खरीद-बिक्री पर रोक: जैसे ही सरकारी जमीनें पोर्टल पर साफ-साफ चिह्नित हो जाएंगी, कोई भी भू-माफिया सरकारी जमीन को आम जनता को धोखा देकर नहीं बेच पाएगा। पारदर्शिता: आम लोगों और प्रशासन दोनों के पास यह स्पष्ट डेटा होगा कि कौन सी जमीन सरकार की (जैसे गैरमजरूआ आम, खास या अन्य सरकारी विभाग की) है।


