सुल्तानपुर | सुल्तानपुर के आदिवासी अंचल साढ़े बारह गांव के चुरका टोला के 20 वर्षीय भगत सिंह आदिवासी भारतीय सेना में अग्निवीर बनकर गांव लौटा है। उसने गरीबी, संसाधनों की कमी को पीछे छोड़ा। 6 महीने की कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जब वह वर्दी में सुल्तानपुर पहुंचा, तो ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा। सुल्तानपुर से चुरका टोला तक डीजे की धुन पर विशाल गौरव रैली निकली। ढोल बजे। रंग-बिरंगी आतिशबाजी हुई। भगत सिंह के पिता कमलेश आदिवासी गांव के प्राथमिक स्कूल में शिक्षक हैं। पहले गुरुजी के पद पर थे। अब नियमित शिक्षक हैं। परिवार के पास आजीविका के लिए दो एकड़ खेती है। कमलेश का सपना दोनों बेटों को उच्च शिक्षित कर देश का नाम रोशन कराना था। बड़ा बेटा कॉलेज की पढ़ाई कर रहा है। छोटा बेटा भगत सिंह बचपन से मेधावी रहा। गांव में 24 घंटे में नाममात्र की बिजली रहती है। भगत सिंह ने अंधेरे में ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई की। 12वीं कक्षा प्रथम श्रेणी से पास की। सरकार ने उसकी मेधा पर उसे स्कूटी उपहार में दी थी। पिता कमलेश ने बताया, भगत के दिल में देश सेवा का सपना बचपन से था। वीर खेड़ी कला ग्राम पंचायत के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई युवा भारतीय सेना में भर्ती हुआ है। आजादी के बाद पहली बार इस पंचायत से कोई बेटा फौजी बना है।


