एआई और डीपफेक के नए जाल से सावधान:आधार बायोमेट्रिक के जरिए ठगी का खतरा बढ़ा; AI टूल्स का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी बना रहे लोगों को निशाना

एआई और डीपफेक के नए जाल से सावधान:आधार बायोमेट्रिक के जरिए ठगी का खतरा बढ़ा; AI टूल्स का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी बना रहे लोगों को निशाना

साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की है। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी अब आधुनिक AI तकनीकों और डीपफेक टूल्स का उपयोग कर आधार बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रणालियों को बायपास करने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि अपराधी,, सहित अन्य AI तकनीकों का दुरुपयोग कर लोगों की डिजिटल पहचान की नकली प्रतिकृतियां तैयार कर सकते हैं। डीपफेक वीडियो, फेस ऑथेंटिकेशन और मोबाइल नंबर अपडेट जैसी तकनीकों के जरिए आर्थिक एवं डिजिटल ठगी को अंजाम दिया जा सकता है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (साइबर क्राइम) ने बताया कि साइबर अपराधी सबसे पहले डेटा लीक, फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से पीड़ित का आधार नंबर, फोटो और मोबाइल संबंधी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या अपडेट क्लाइंट लाइट (UCL) किट के दुरुपयोग से आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि जैसे ही मोबाइल नंबर बदलता है, OTP अपराधियों के पास पहुंचने लगते हैं और वे पीड़ित के डिजिटल अकाउंट्स पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इसके बाद DigiLocker, e-KYC और बैंकिंग सेवाओं का दुरुपयोग कर फर्जी खाते खोले जा सकते हैं तथा अवैध लेनदेन किए जा सकते हैं। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी AI आधारित डीपफेक तकनीक से ऐसे नकली वीडियो भी तैयार कर रहे हैं जिनमें व्यक्ति की आंखों की हरकतें और चेहरे के भाव वास्तविक प्रतीत होते हैं। कई आधुनिक फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम इन्हें असली व्यक्ति मान लेते हैं, जिससे पहचान चोरी का खतरा और बढ़ गया है। सुरक्षित रहने के लिए पुलिस की सलाह राजस्थान पुलिस ने नागरिकों से अपने आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने की अपील की है। इसके लिए उपयोगकर्ता या का उपयोग कर सकते हैं। बायोमेट्रिक्स लॉक होने के बाद फिंगरप्रिंट और आइरिस डेटा का उपयोग तब तक संभव नहीं होगा जब तक स्वयं उपयोगकर्ता उसे अनलॉक न करे। इसके अलावा आमजन को नियमित रूप से आधार Authentication History जांचने की सलाह दी गई है, ताकि पिछले छह महीनों में आधार का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से हुआ है, इसकी जानकारी मिल सके। पुलिस ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को आधार से जुड़े मोबाइल नंबर अपडेट या बदलाव का कोई अनचाहा SMS प्राप्त होता है, तो उसे नजरअंदाज न करें और तुरंत इसकी जांच करें। आधार के साथ सक्रिय ईमेल आईडी लिंक रखना भी जरूरी बताया गया है ताकि किसी भी बदलाव की तत्काल सूचना प्राप्त हो सके। शिकायत कहां करें यदि किसी व्यक्ति के साथ इस प्रकार की साइबर ठगी होती है या उसका प्रयास किया जाता है, तो तुरंत निकटतम पुलिस थाना या साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करवाएं। इसके अलावा नागरिक पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930
राजस्थान साइबर हेल्पलाइन: 9256001930 / 9257510100

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *