शिवहर के विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में बेंगलुरु के एक दंपत्ति को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नन्ही बच्ची ‘भव्या’ सौंप दी गई। जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी ने बच्ची को औपचारिक रूप से पंकज प्रसून और गुंजा कुमारी को सौंपते हुए उनके उज्ज्वल पारिवारिक जीवन की कामना की। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने कहा कि किसी बच्चे को गोद लेना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने दंपत्ति को बधाई देते हुए कहा कि इस निर्णय से बच्ची को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और खुशहाल परिवार मिला है, जिससे उसका भविष्य बेहतर और उज्ज्वल बनेगा। दंपत्ति के मेडिकल प्रमाण पत्र की जांच सहायक निदेशक एवं जिला बाल संरक्षण इकाई की अधिकारी शुभांगी सिंह ने बताया कि दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संपन्न की गई। दंपत्ति के मेडिकल प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज और पहचान पत्र सहित सभी आवश्यक कागजातों का गहन सत्यापन किया गया। बच्ची कानूनी रूप से परिवार का स्थायी हिस्सा इसके बाद बच्ची को दो माह के लिए प्री-एडॉप्शन अवधि में अभिभावकों के सुपुर्द किया गया। प्री-एडॉप्शन अवधि के दौरान सभी मानकों पर संतोषजनक स्थिति पाए जाने के बाद फाइनल एडॉप्शन की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। अब बच्ची कानूनी रूप से इस परिवार का स्थायी हिस्सा बन गई है। कार्यक्रम के दौरान बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों, विशेष कार्य पदाधिकारी तथा विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के कर्मियों ने भी परिवार को शुभकामनाएं दीं। सभी ने नन्ही भव्या के सुखद एवं सुरक्षित भविष्य की कामना की। यह अवसर उपस्थित सभी लोगों के लिए यादगार बन गया। शिवहर के विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान में बेंगलुरु के एक दंपत्ति को कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नन्ही बच्ची ‘भव्या’ सौंप दी गई। जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी ने बच्ची को औपचारिक रूप से पंकज प्रसून और गुंजा कुमारी को सौंपते हुए उनके उज्ज्वल पारिवारिक जीवन की कामना की। इस अवसर पर जिला पदाधिकारी ने कहा कि किसी बच्चे को गोद लेना केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने दंपत्ति को बधाई देते हुए कहा कि इस निर्णय से बच्ची को सुरक्षित, स्नेहपूर्ण और खुशहाल परिवार मिला है, जिससे उसका भविष्य बेहतर और उज्ज्वल बनेगा। दंपत्ति के मेडिकल प्रमाण पत्र की जांच सहायक निदेशक एवं जिला बाल संरक्षण इकाई की अधिकारी शुभांगी सिंह ने बताया कि दत्तक ग्रहण की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत संपन्न की गई। दंपत्ति के मेडिकल प्रमाण पत्र, शैक्षणिक दस्तावेज और पहचान पत्र सहित सभी आवश्यक कागजातों का गहन सत्यापन किया गया। बच्ची कानूनी रूप से परिवार का स्थायी हिस्सा इसके बाद बच्ची को दो माह के लिए प्री-एडॉप्शन अवधि में अभिभावकों के सुपुर्द किया गया। प्री-एडॉप्शन अवधि के दौरान सभी मानकों पर संतोषजनक स्थिति पाए जाने के बाद फाइनल एडॉप्शन की कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई। अब बच्ची कानूनी रूप से इस परिवार का स्थायी हिस्सा बन गई है। कार्यक्रम के दौरान बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों, विशेष कार्य पदाधिकारी तथा विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के कर्मियों ने भी परिवार को शुभकामनाएं दीं। सभी ने नन्ही भव्या के सुखद एवं सुरक्षित भविष्य की कामना की। यह अवसर उपस्थित सभी लोगों के लिए यादगार बन गया।


