बाकरोल गौशाला बना राज्य का पहला जीरो वेस्ट कैंपस

बाकरोल गौशाला बना राज्य का पहला जीरो वेस्ट कैंपस

Video Ahmedabad: महानगरपालिका (मनपा) ने भटकते मवेशियों की समस्या का समाधान करते हुए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनोखी पहल की है। शहर के पास बाकरोल स्थित करुणा मंदिर गौशाला को गुजरात का पहला जीरो वेस्ट कैंपस घोषित किया गया है, जहां 100 प्रतिशत बायोडिग्रेडेबल कचरे का प्रसंस्करण होता है। यहां पशुओं के गोबर से बायोगैस और बिजली का उत्पादन किया जा रहा है। इस कदम से न केवल शहरवासियों को राहत मिली है बल्कि वैकल्पिक ऊर्जा का नया स्रोत भी तैयार हुआ है।

मनपा आयुक्त बंछानिधि पाणि ने बताया कि वर्ष 2023 में स्ट्रे कैटल न्यूइसेंस प्रिवेंशन एंड कंट्रोल पॉलिसी लागू की गई थी। इसके तहत शहर में भटकते मवेशियों को पकड़कर गौशालाओं में ले जाया गया, जहां उनकी देखभाल और चिकित्सा की व्यवस्था की जाती है। उन्होंने कहा कि यह नीति अहमदाबाद को जीरो वेस्ट शहर बनाने की दिशा में अहम कदम है।

प्रतिदिन 46 किलो बायोगैस और 35 यूनिट बिजली

पशु उपद्रव नियंत्रण विभाग (सीएनसीडी) के अध्यक्ष नरेश राजपूत ने बताया कि बाकरोल में बने बायोगैस प्लांट से रोज़ाना 46 किलो बायोगैस और 35 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है। यहां रहने वाले 32 कामगार परिवारों की रसोई भी इसी गैस पर चलती है। पहले हर महीने औसतन 27 एलपीजी सिलेंडर की ज़रूरत पड़ती थी, जो अब पूरी तरह बंद हो गई है। इससे लगभग 10,350 रुपए की बचत होती है। गौशाला में रोजाना 1000 से अधिक रोटियां गाएं और कुत्तों के लिए बनाई जाती हैं, जो बायोगैस पर ही पकती हैं। बायोगैस से निकलने वाली स्लरी का उपयोग खाद के रूप में किया जाता है, वहीं गोबर से बनी विशेष स्टिक मंदिरों को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए मुफ्त दी जाती है। इससे 13 लोगों को रोज़गार भी मिला है।

सब्जी मार्केट से भी बनेगी बायोगैस

दाणीलीमडा गौशाला में भी 350 पशु हैं, जहां रोजाना 1,700 किलो गोबर से बायोगैस और बिजली बनाई जाती है। आगे चलकर शहर के सब्जी बाज़ारों से निकलने वाले अतिरिक्त कचरे का भी उपयोग बायोगैस उत्पादन में किया जाएगा।

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