इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर जिले के एक शिक्षक की आत्महत्या से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य अनिरुद्ध सिंह को जमानत दे दी। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकलपीठ ने यह आदेश सुनाया। 22 फरवरी 2026 को थाना गुलरहिया, जिला गोरखपुर में एफआईआर दर्ज की गई थी। मृतक कृष्ण मोहन सिंह, जो देवरिया के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मंदरसन, गौरी बाजार में 2016 से सहायक अध्यापक थे, उसने 20/21 फरवरी 2026 की रात पंखे से फांसी लगाकर जान दे दी। मृतक की पत्नी गुड़िया सिंह ने एफआईआर दर्ज करायी। जानिये क्या है मामला सूचना के अनुसार, बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और उनके क्लर्क संजीव सिंह ने हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर तीनों शिक्षकों कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से रूपये 16-16 लाख यानी कुल रूपये 48 लाख की रिश्वत मांगी। अभियुक्त अनिरुद्ध सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बिचौलिये की भूमिका निभाते हुए यह रकम अधिकारियों तक पहुंचाई। मृतक ने मृत्यु से पहले 4 पन्नों का सुसाइड नोट लिखा था, जो उनकी जेब से बरामद हुआ। इसमें पूरे घटनाक्रम और भ्रष्टाचार का विस्तृत उल्लेख था। इसके अलावा वीडियो क्लिप और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच में मिली। कोर्ट ने पाया कि अनिरुद्ध सिंह का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है, वे 64 वर्ष के हैं और 27 फरवरी 2026 से जेल में बंद हैं। कोर्ट ने कहा कि मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7/12 के तहत है, जिसमें अधिकतम सात वर्ष की सजा का प्रावधान है, और यह मजिस्ट्रेट द्वारा विचारणीय है। चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय के सत्येंद्र कुमार अंतिल बनाम सीबीआई और संजय चंद्रा बनाम सीबीआई के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि “जमानत नियम है, जेल अपवाद” और बिना दोषसिद्धि के किसी को अनिश्चितकालीन कारावास में नहीं रखा जा सकता। अनिरुद्ध सिंह को व्यक्तिगत मुचलके और दो ज़मानतदारों पर जमानत दी गई, साथ ही साक्ष्य से छेड़छाड़ न करने, गवाहों को न डराने और बिना अनुमति देश न छोड़ने जैसी शर्तें लगाई गई हैं।


