बदायूं में समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष आशीष यादव ने मंगलवार को एक प्रेसवार्ता में प्रदेश की सरकारी भर्तियों में पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) वर्ग के आरक्षण में कथित कटौती का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच हुई कई भर्तियों में आरक्षण नियमों का सही ढंग से पालन नहीं किया गया। यादव ने दावा किया कि इस कथित अनियमितता के कारण हजारों अभ्यर्थी अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित रह गए। उन्होंने विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कई विभागों की भर्तियों में आरक्षित पदों की संख्या कम की गई है। जिलाध्यक्ष के अनुसार, लेखपाल भर्ती में 960, कृषि प्राविधिक सहायक भर्ती में 434, कनिष्ठ सहायक, कनिष्ठ लिपिक एवं सहायक स्तर-3 भर्ती में 300, ग्राम पंचायत अधिकारी भर्ती में 232, नेत्र परीक्षण अधिकारी भर्ती में 47, आशुलिपिक भर्ती में 37 तथा प्रवर्तन कांस्टेबल भर्ती में 34 पदों की कटौती की गई। उन्होंने विशेष रूप से लेखपाल भर्ती का जिक्र करते हुए बताया कि कुल 7994 पदों में से पीडीए वर्ग को नियमानुसार लगभग 3997 पद मिलने चाहिए थे। हालांकि, केवल 3037 पद ही आरक्षित किए गए, जिससे पीडीए वर्ग के 960 पदों पर अभ्यर्थियों का हक प्रभावित हुआ। सपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद समाजवादी पार्टी और छात्र संगठनों के विरोध के चलते सरकार को संशोधित अधिसूचना जारी करनी पड़ी थी। उन्होंने मांग की कि यदि आरक्षण नियमों का उल्लंघन हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और विभागों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। यादव ने दोहराया कि समाजवादी पार्टी संविधान प्रदत्त आरक्षण व्यवस्था की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और पीडीए वर्ग के अधिकारों से किसी प्रकार का समझौता नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाएगी। इस अवसर पर शेखूपुर विधायक हिमांशु यादव, सहसवान विधायक बृजेश यादव, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह दद्दा, वरिष्ठ नेता फखरे अहमद शोबी, सुनीता पाल, सुरेश पाल सिंह चौहान, बलवीर सिंह यादव और आमिर सुल्तानी सहित कई नेता मौजूद थे।


