Arthritis Warning Signs: अक्सर लोग जोड़ों के दर्द को बढ़ती उम्र, कमजोरी या ज्यादा काम का असर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार यह दर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। डॉक्टरों के मुताबिक, अगर शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से खुद ही जोड़ों और शरीर के स्वस्थ हिस्सों पर हमला करने लगे, तो इसे ऑटोइम्यून आर्थराइटिस (Autoimmune Arthritis) कहा जाता है।
रूमेटोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. भूपेंद्र वैष्णव ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है और समय पर इलाज न मिलने पर जोड़ों में स्थायी खराबी भी हो सकती है।
क्या होता है ऑटोइम्यून आर्थराइटिस?
सामान्य तौर पर हमारा इम्यून सिस्टम शरीर को वायरस और बैक्टीरिया से बचाने का काम करता है। लेकिन ऑटोइम्यून बीमारी में यही सिस्टम शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को दुश्मन समझकर उन पर हमला करने लगता है। इससे जोड़ों में सूजन, दर्द और अकड़न शुरू हो जाती है। कई मामलों में त्वचा, फेफड़े, किडनी और नसों पर भी असर पड़ सकता है।
डॉ. वैष्णव के अनुसार, रुमेटीइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis), ल्यूपस (Lupus / SLE), सोरियाटिक आर्थराइटिस (Psoriatic Arthritis) और एंकिलोजिंग स्पोंडिलिटिस (Ankylosing Spondylitis) जैसी बीमारियां इसी श्रेणी में आती हैं।
किन लोगों में ज्यादा होता है खतरा?
ऑटोइम्यून बीमारियां किसी भी उम्र में हो सकती हैं के लेकर उन्होंने कहा कि महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा देखा जाता है। खासतौर पर प्रजनन आयु की महिलाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे जेनेटिक कारणों के साथ-साथ धूम्रपान, तनाव, मोटापा, खराब लाइफस्टाइल, नींद की कमी और प्रदूषण जैसे कारण भी जिम्मेदार माने जाते हैं।
शरीर दे सकता है ये शुरुआती संकेत
डॉ. भूपेंद्र के मुताबिक, शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, इसलिए लोग इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर ये समस्याएं लंबे समय तक बनी रहें तो तुरंत जांच करवानी चाहिए। ये लक्षण हो सकते हैं खतरे की घंटी:
- जोड़ों में लगातार दर्द
- हाथ-पैरों में सूजन
- सुबह उठते समय अकड़न
- हर समय थकान महसूस होना
- बिना संक्रमण के बुखार
- त्वचा पर रैशेज
- बाल झड़ना
- आंखों और मुंह में सूखापन
- मांसपेशियों में कमजोरी
- चलने-फिरने में परेशानी
समय पर इलाज क्यों जरूरी है?
अगर बीमारी को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाए तो जोड़ों को स्थायी नुकसान हो सकता है। इसके अलावा दिल, फेफड़ों और हड्डियों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि लगातार जोड़ों में दर्द या सूजन होने पर रूमेटोलॉजिस्ट से जरूर संपर्क करें।
क्या इससे बचाव संभव है?
ऑटोइम्यून बीमारियों को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर खतरे को कम किया जा सकता है। डॉक्टर नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार, अच्छी नींद, तनाव कम करने और धूम्रपान से दूरी बनाने की सलाह देते हैं। समय पर जांच और सही इलाज से मरीज सामान्य और एक्टिव जीवन जी सकते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


