79 साल का सफर: 1962 में हुआ कमजोरी का अहसास, फिर ऐसे मजबूत होती चली गई भारतीय सेना
सुन हमला देश के ऊपर, बंदूक उठा चल देता हूं। है मौत का गम किसको, मैं खून धरा को देता हूं! किसी भी देश की सैन्य ताकत से उसके आवाम में सुरक्षा की भावना पैदा होती है और देश की रक्षा की खातिर अपने जान की बाजी लगाना त्याग का सबसे बड़ा उदाहरण भी माना…

