Vinod Kapri Pyre Movie: निर्देशक विनोद कापड़ी की फिल्म ‘पायर’ (चिता) को देखने के बाद फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने अपनी प्रतिक्रिया साझा की है। उन्होंने फिल्म की कहानी, कलाकारों की कास्टिंग, हिमालयी परिवेश और इसके भावनात्मक असर की तारीफ की। विवेक अग्निहोत्री के मुताबिक फिल्म खत्म होने के बाद भी उसका प्रभाव उनके साथ बना रहा। उनकी इस प्रतिक्रिया पर विनोद कापड़ी ने भी जवाब देते हुए कहा कि फिल्म की कहानी से इस तरह जुड़ना उनके लिए बेहद मायने रखता है।

बुजुर्ग दंपति की कहानी के जरिए दिखाया पलायन का दर्द
‘पायर’ की कहानी उत्तराखंड के एक पहाड़ी गांव में रहने वाले बुजुर्ग दंपति के इर्द-गिर्द घूमती है। गांव से युवा पीढ़ी रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में शहरों की ओर चली जाती है। पीछे रह जाते हैं उम्रदराज लोग, जिनके लिए बदलती जिंदगी के बीच अकेलापन और एक-दूसरे पर निर्भरता बड़ी सच्चाई बन जाती है।
फिल्म सिर्फ एक बुजुर्ग दंपति की प्रेम कहानी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके जरिए पहाड़ों से हो रहे पलायन, खाली होते गांव, बढ़ती उम्र और परिवारों से दूर होती नई पीढ़ी के भावनात्मक असर को सामने रखा गया है। दंपति का रिश्ता कहानी का अहम हिस्सा है, लेकिन उसके पीछे अपने लोगों के दूर चले जाने का दर्द भी दिखाई देता है।
विवेक अग्निहोत्री को क्यों पसंद आई फिल्म?
फिल्म देखने के बाद विवेक अग्निहोत्री ने इसकी सबसे खास बातों में वास्तविकता को बताया। फिल्म में मुख्य किरदार निभाने वाले कलाकार पारंपरिक फिल्मी कलाकार नहीं हैं। इसमें कुमाऊं के 80 साल से ज्यादा उम्र के वास्तविक लोगों और स्थानीय ग्रामीणों को शामिल किया गया है। इससे कहानी को एक अलग तरह की स्वाभाविकता मिलती है।
विवेक ने फिल्म के पहाड़ी वातावरण और सिनेमैटोग्राफी की भी सराहना की। बारिश से भीगे पहाड़, आसपास का सन्नाटा और फिल्म का साउंड डिजाइन दर्शकों को कहानी के माहौल के करीब ले जाते हैं। उनके मुताबिक फिल्म देखने वाले उन किरदारों के अकेलेपन और उनके जीवन की खामोशी को महसूस कर सकते हैं।
उम्रदराज माता-पिता और पलायन पर भी उठाती है सवाल
‘पायर’ उन परिवारों की स्थिति पर भी ध्यान खींचती है, जहां बच्चे रोजगार के लिए दूर शहरों में चले जाते हैं और माता-पिता अपने गांव में अकेले रह जाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ उनकी जरूरतें और भावनात्मक निर्भरता बढ़ती जाती है, लेकिन परिवार के युवा सदस्य उनके पास मौजूद नहीं होते।
यही वजह है कि फिल्म का विषय सिर्फ प्रेम तक सीमित नहीं है। इसमें उम्र के अंतिम पड़ाव में साथी की मौजूदगी, अकेलेपन का डर और बदलते सामाजिक ढांचे की तस्वीर दिखाई देती है।
विनोद कापड़ी ने दिया जवाब
विवेक अग्निहोत्री की प्रतिक्रिया पर विनोद कापड़ी ने उनका आभार जताया। उन्होंने कहा कि जब कोई दर्शक फिल्म के मुख्य किरदारों की कहानी के पीछे छिपी खामोशी, दर्द और अकेलेपन को महसूस करता है, तो यह फिल्मकार के लिए खास अनुभव होता है।
‘पायर’ विनोद कापड़ी ने लिखी और निर्देशित की है। फिल्म में उत्तराखंड के स्थानीय लोगों को महत्वपूर्ण भूमिकाओं में लिया गया है। निर्देशक ने अपने उत्तराखंड से जुड़ाव के अनुभवों को भी कहानी के भावनात्मक आधार से जोड़ा है। फिल्म के जरिए पहाड़ों में पलायन और उसके पीछे छूट जाने वाले लोगों की जिंदगी को करीब से दिखाने की कोशिश की गई है।

