सुन हमला देश के ऊपर, बंदूक उठा चल देता हूं।
है मौत का गम किसको, मैं खून धरा को देता हूं!
किसी भी देश की सैन्य ताकत से उसके आवाम में सुरक्षा की भावना पैदा होती है और देश की रक्षा की खातिर अपने जान की बाजी लगाना त्याग का सबसे बड़ा उदाहरण भी माना जाता है। प्राचीन धर्म ग्रंथों तक में लिखा गया है कि ‘जननी, जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी’ अर्थात माता और मातृभूमि का स्थान स्वर्ग से भी बढ़कर है। आज की दुनिया में किसी देश की ताकत का अंदाजा उसकी सैन्य ताकत से लगाया जाता है। इस लिहाज जिस देश की सेना जितनी बड़ी, अत्याधुनिक और संख्याबल में बड़ी होती है, उसे दुनिया में उतना ही ताकतवर माना जाता। देश महज कागज पर बना नक्शा मात्र नहीं होता है। ये बात तब और भी ज्यादा समझ मे आती है जब पूरे देश मे आजादी का जश्न हो। हर मन में उमंग हो कि हम चाहे छोटे मुल्क हैं या बड़े। लेकिन हम आजाद हैं। इस बार आजादी का 80वां जश्न है। इस जश्न में हम आपको भारतीय सेना के 80 सालों के सफर के बारे में बताते हैं। जब भारत को चीन से युद्ध में कमजोरी का अहसास भी हुआ और फिर आगे चलकर हमारे वीर जवानों ने पाकिस्तान को घर मे घुसकर मारने जैसी घटना को अंजाम दिया।
इसे भी पढ़ें: ईरान ने पलटा पूरा गेम, BRICS बैंक में एंट्री से उड़ाए अमेरिका के होश!
1962 में चीन का छलावा
अपने इतिहास में हिंदुस्तान ने कई लड़ाइयां लड़ी और लगभग हर बार देश को जीत का गौरव मिला। लेकिन एक युद्ध ऐसा था जो दरअसल युद्ध नहीं छल की दास्तां थी। जब दोस्ती की पीठ पर दगाबाजी का खंजर चलाया जाता है तो उसे 1962 का भारत चीन युद्ध कहते हैं। तब दोस्ती का भरोसा हिंदुस्तान का था, विश्वासघात का खंजर चीन का। उस युद्ध में हार से ज्यादा अपमान का लहू निकला। युद्ध के शुरू होने तक भारत को पूरा भरोसा था कि युद्ध शुरू नहीं होगा, इस वजह से भारत की ओर से तैयारी नहीं की गई। भारतीय सेना इस हमले के लिए तैयार नहीं थी नतीजा ये हुआ कि चीन के 80 हजार जवानों का मुकाबला करने के लिए भारत की ओर से मैदान में थे 10-20 हजार सैनिक। ये युद्ध पूरा एक महीना चला जब तक कि 21 नवंबर 1962 को चीन ने युद्ध विराम की घोषणा नहीं कर दी।
1971 में हुआ बढ़ती ताकत का अहसास
1971 की वो जंग को भला कौन भूल सकता है खासकर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान। जब हिन्दुस्तान ने पूरी दुनिया का नक्शा ही बदल दिया था। हिन्दुस्तान ने महज 13 दिनों के भीतर अपने झूठे दंभ में जी रहे पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था और 93 हजार सैनिक लाचार युद्ध बंदी बन गए। 1971 का युद्ध किस्सा है दुनिया के नक्शे बदलने का, जंग का और बहादुरी का भी। साल 1971 की जंग में पाकिस्तान को भारत के हाथों हार मिली थी। भारत से बुरी तरह पिटने के बाद पाकिस्तान ने अपनी हार मान ली थी। उस वक्त पाकिस्तान के 80 हजार से ज्यादा सैनिकों ने भारत के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। जिसके बाद पाकिस्तान के आर्मी चीफ ने भारतीय सेना प्रमुख के सामने सरेंडर के कागजात पर हस्ताक्षर किये थे।
इसे भी पढ़ें: लाल किले से बोल रहे थे मोदी, इजरायल ने बड़ा खेल कर दिया!
18 मई 1974
वर्ष 1974 में 18 मई का दिन एक ऐसी अहम घटना के साथ इतिहास में दर्ज है, जिसने भारत को दुनिया के परमाणु संपन्न देशों की कतार में खड़ा कर दिया। इस परीक्षण को स्माइलिंग बुद्धा का नाम दिया गया था।
पोखरण
11 मई 1998 को पोखरण में परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था। में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था। ऐसा ताकतवर विस्फोट कि पोखरण की रेतली जमीन कांप उठी, रेत के बवंडर ने सबकुछ ओझल कर दिया और 11 मई 1998 को बुद्ध एक बार फिर से मुस्कुरा उठे।
मिलिट्री पर जीडीपी का कितना पर्सेंट खर्च किया
| साल | % |
| 1956 | 2 |
| 1963 | 4 |
| 1965 | 3.9 |
| 1975 | 3.5 |
| 2000 | 2.9 |
| 2007 | 2.5 |
| 2021 | 2.7 |
सर्जिकल स्ट्राइक
28- 29 सितंबर 2016 की रात को भारतीय सेना के जांबाजों ने पाकिस्तान में दाखिल हो कर वहां आतंकी ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक की। बड़ी संख्या में आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया और आतंकियों को मौत की नींद सुलाया। इससे पहले आतंकियों ने उरी सेक्टर में भारतीय सेना के कैंप पर हमला किया था जिसमें 19 सैनिक शहीद हो गए थे। 26 फरवरी 2019 की रात भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट ने पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो वहां आतंकियों के एक बड़े ठिकाने पर एयर स्ट्राइक की।
गलवान में चीन के सैनिकों से झड़प
14 जून 2020 की रात को गलवान में भारत-चीन के सैनिकों के बीच खूनी झड़प हुई जिसमें भारत के 20 सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए। चीन को भी काफी नुकसान उठाना पड़ा। चीन ने यह नहीं बताया कि इस खूनी झड़प में उसने कितने सैनिकों को खोया। पर कुछ वक्त पहले चीन ने पांच लोगों को सम्मानित किया जिन्होंने गलवान में बहादुरी दिखाते हुए जान गंवाई। पर भारत का कहना है कि चीन को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने इस झड़प में 38 सैनिकों को खोया।
हर जंग में दिखाया दम
1962 के युद्ध में 722 चीनी सैनिक मारे गए, 1700 घायल।
1965 के युद्ध में 5988 पाक सैनिक मारे गए।
1971 के युद्ध में 93000 पाकिस्तान सैनिकों ने सरेंडर किया।
1999 के युद्ध में 453 पाकिस्तान सैनिक मारे गए।


