प्रोपेगैंडा पर प्रहार: सिंगापुर ने हटवाईं 14 भड़काऊ पोस्ट, भारतीय समुदाय को बनाया गया था निशाना

प्रोपेगैंडा पर प्रहार: सिंगापुर ने हटवाईं 14 भड़काऊ पोस्ट, भारतीय समुदाय को बनाया गया था निशाना

Indian community target in Singapore: बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण समाज की पहचान रखने वाले सिंगापुर को हाल में सोशल मीडिया पर एक संगठित नफरती अभियान का सामना करना पड़ा। फेसबुक, एक्स और यूट्यूब पर प्रसारित 14 पोस्टों में दावा किया गया कि देश भारतीयों के बढ़ते प्रभाव से अपनी सांस्कृतिक पहचान खो रहा है। सिंगापुर सरकार ने इन्हें तुरंत ब्लॉक कराते हुए कहा कि ये पोस्ट भारतीय समुदाय और देश की सामाजिक एकता को निशाना बना रही थीं। इनका स्रोत संभवतः चीन से संचालित ऑनलाइन नेटवर्क थे।

डिजिटल दुनिया में ‘नया विलेन’ गढ़ने का ट्रेंड

सिंगापुर की घटना कोई अपवाद नहीं है। दुनिया के कई देशों में आर्थिक दबाव, आव्रजन और पहचान की राजनीति के बीच सोशल मीडिया पर किसी एक समुदाय को समस्याओं की वजह बताने का चलन बढ़ा है। भारतीय मूल के लोगों की बढ़ती वैश्विक मौजूदगी और पेशेवर सफलता ने उन्हें भी ऐसे अभियानों का आसान निशाना बना दिया है। कई देश अभी जागरूकता और निगरानी पर जोर दे रहे हैं, लेकिन जर्मनी और सिंगापुर ने कड़े कानूनी मॉडल अपनाए हैं।

ब्रिटेन से कनाडा तक फैलती प्रवृत्ति

  • अमेरिका: एच-1बी वीजा, टेक सेक्टर में भारतीय पेशेवरों की मौजूदगी और नौकरी प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दों को लेकर भारतीयों को निशाना बना रहे हैं।
  • कनाडा: दक्षिण एशियाई और विशेषकर भारतीय मूल के लोगों के खिलाफ ऑनलाइन हेट स्पीच और नस्लीय टिप्पणियों में भारी उछाल आया है।
  • ब्रिटेन: प्रवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ मनगढ़ंत साजिशी सिद्धांत तेजी से फैलाए जा रहे हैं, जो जमीनी हिंसा का कारण बन रहे हैं।
  • ऑस्ट्रेलिया: विदेशी दुष्प्रचार और नस्लीय घृणा को रोकने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार टेक कंपनियों पर कंटेंट हटाने का भारी दबाव बना रही है।

ऐसे कड़े कानूनी मॉडलों की दरकार

  1. जर्मनी का ‘नेटवर्क इन्फोर्समेंट एक्ट’
    सोशल मीडिया कंपनियों को 24 घंटे के भीतर अवैध नफरती सामग्री हटाने के लिए बाध्य करता है। नियम तोड़ने पर भारी जुर्माने का प्रावधान है।
  2. सिंगापुर का ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट
    सरकार को अधिकार देता है कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने या विदेशी प्रभाव से विभाजन पैदा करने वाले डिजिटल कंटेंट को तुरंत ब्लॉक कराया जा सके।

एल्गोरिद्म भी बढ़ा रहे आग

विशेषज्ञों के अनुसार, सोशल मीडिया एल्गोरिद्म गुस्से, डर और सनसनी पैदा करने वाले कंटेंट को सबसे तेजी से आगे बढ़ाते हैं। ऐसे में किसी समुदाय के खिलाफ भ्रामक या भड़काऊ पोस्ट कम समय में लाखों लोगों तक पहुंच जाती हैं। आर्थिक और सामाजिक असंतोष के दौर में यही सामग्री अक्सर नफरत और ध्रुवीकरण का आधार बन जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *