नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर खेल मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय महासंघों के साथ एक दिवसीय बैठक में हाल में संपन्न एशियाई खेलों में भारत के प्रदर्शन की समीक्षा करेगा जिसमें फोकस बैडमिंटन, निशानेबाजी और एथलेटिक्स में कुछ ‘अनुभवी’ खिलाड़ियों के निराशाजनक प्रदर्शन पर रहेगा। इसके साथ ही ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (टॉप्स) के जरिए धनराशि जारी करने की भी फिर से समीक्षा की जाएगी। भारत ने आइची-नागोया खेलों में 21 स्वर्ण सहित 85 पदक जीते जो हांग्झोउ में पिछले चरण में हासिल किए गए 106 पदकों से काफी कम था।खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हमें कम से कम 150 पदक जीतने चाहिये थे और हम जीत भी सकते थे। कुछ अनुभवी खिलाड़ी स्पष्ट रूप से ‘कम्फर्ट जोन’ में थे और इसका असर उनके प्रदर्शन में दिखा। मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ बैठक में इसकी समीक्षा करेगा।’’
भारत को 2026 एशियाई खेलों में बैडमिंटन में सिर्फ एक टीम कांस्य पदक मिला जबकि पिछले खेलों में एक स्वर्ण, एक रजत और कांस्य पदक जीता था।निशानेबाजों (विशेषकर पिस्टल में) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब रहा जबकि दोनों खेलों के भारतीय दल में ओलंपिक पदक विजेता शामिल थे। सूत्र ने कहा ,‘‘ यह ताज्जुब की बात है कि ओलंपिक पदक विजेता एशियाड में पदक नहीं जीत पाये जबकि एशियाई खेलों में पदार्पण करने वाले भारत के 310 खिलाड़ियों में से 106 ने पदक जीते। 23 स्पर्धाओं में करीब 89 अनुभवी खिलाड़ी नाकाम रहे।बैठक में समीक्षा की जायेगी कि नीति में क्या बदलाव करने की जरूरत है। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी कुछ खेलों में अपेक्षित परिणाम क्यो नहीं मिले।’’
एथलेटिक्स में भारत को पिछले एशियाई खेलों में छह स्वर्ण पदक मिले थे जबकि इस बार सिर्फ एक पदक महिला चार गुणा 400 मीटर रिले टीम हासिल कर सकी। खेलों के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने को लेकर भी सवाल उठे हैं।एथलेटिक्स में ज्योति याराजी ने चोट के कारण महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ में हिस्सा ही नहीं लिया और त्रिकूद में प्रवीण चित्रावेल पहले प्रयास में ही चोटिल हो गए। वहीं 400 मीटर बाधादौड़ में यशस पलाक्षा अपनी हीट के बीच से हट गए थे। इसके अलावा एमएमए में वरूण सान्याल स्पर्धा से पहले अनफिट हो गए।सूत्र ने कहा, ‘‘ कुछ खिलाड़ी खेलों में पहुंचने के बाद चोटों की घोषणा कर रहे थे। अगर एथलीट चोटिल थे तो वे गए कैसे। उन्हें तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं।’’
टॉप्स के जरिये खिलाड़ियों को मनचाही धनराशि आवंटित करने की भी समीक्षा का जिक्र करते हुए सूत्र ने कहा ,‘‘ टॉप्स फंडिंग की समीक्षा निश्चित तौर पर होगी। टॉप्स के खिलाड़ियों को मनचाहे कोचों, विदेश में अभ्यास और हर सुविधा के लिये सरकार ने भारी खर्च किया लेकिन नतीजे अपेक्षित नहीं मिले।’’
उन्होंने आगे कहा ,‘‘ टॉप्स के तहत नौ स्पर्धाओं के 34 खिलाड़ियों पर 27 करोड़ रूपये से अधिक खर्च हुए लेकिन प्रदर्शन निराशाजनक रहा जिनमें बैडमिंटन और निशानेबाजी के प्रमुख खिलाड़ी हैं।’’
खेल मंत्रालय ने एशियाई खेलों से पहले कहा था कि तीन साल के चक्र में खिलाड़ियों को तैयार करने में 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। भारत ने 14 खेलों में पहली बार पदक जीते जिनमें साफ्ट टेनिस, एमएमए, रिकर्व तीरंदाजी शामिल है जबकि क्रिकेट , कबड्डी और हॉकी जैसे टीम खेलों में महिला और पुरूष दोनों वर्गों में भारत को स्वर्ण पदक मिले।महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। पहली बार भारत की महिला और पुरूष दोनों हॉकी टीमों ने एक साथ स्वर्ण जीता और ओलंपिक के लिये भी क्वालीफाई कर लिया।
नयी दिल्ली, आठ अक्टूबर खेल मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय महासंघों के साथ एक दिवसीय बैठक में हाल में संपन्न एशियाई खेलों में भारत के प्रदर्शन की समीक्षा करेगा जिसमें फोकस बैडमिंटन, निशानेबाजी और एथलेटिक्स में कुछ ‘अनुभवी’ खिलाड़ियों के निराशाजनक प्रदर्शन पर रहेगा। इसके साथ ही ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (टॉप्स) के जरिए धनराशि जारी करने की भी फिर से समीक्षा की जाएगी। भारत ने आइची-नागोया खेलों में 21 स्वर्ण सहित 85 पदक जीते जो हांग्झोउ में पिछले चरण में हासिल किए गए 106 पदकों से काफी कम था।
खेल मंत्रालय के एक सूत्र ने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हमें कम से कम 150 पदक जीतने चाहिये थे और हम जीत भी सकते थे। कुछ अनुभवी खिलाड़ी स्पष्ट रूप से ‘कम्फर्ट जोन’ में थे और इसका असर उनके प्रदर्शन में दिखा। मंत्रालय 13 अक्टूबर को राष्ट्रीय खेल महासंघों के साथ बैठक में इसकी समीक्षा करेगा।’’
भारत को 2026 एशियाई खेलों में बैडमिंटन में सिर्फ एक टीम कांस्य पदक मिला जबकि पिछले खेलों में एक स्वर्ण, एक रजत और कांस्य पदक जीता था।
निशानेबाजों (विशेषकर पिस्टल में) का प्रदर्शन अपेक्षाकृत खराब रहा जबकि दोनों खेलों के भारतीय दल में ओलंपिक पदक विजेता शामिल थे। सूत्र ने कहा ,‘‘ यह ताज्जुब की बात है कि ओलंपिक पदक विजेता एशियाड में पदक नहीं जीत पाये जबकि एशियाई खेलों में पदार्पण करने वाले भारत के 310 खिलाड़ियों में से 106 ने पदक जीते। 23 स्पर्धाओं में करीब 89 अनुभवी खिलाड़ी नाकाम रहे।
बैठक में समीक्षा की जायेगी कि नीति में क्या बदलाव करने की जरूरत है। इतना पैसा खर्च करने के बाद भी कुछ खेलों में अपेक्षित परिणाम क्यो नहीं मिले।’’
एथलेटिक्स में भारत को पिछले एशियाई खेलों में छह स्वर्ण पदक मिले थे जबकि इस बार सिर्फ एक पदक महिला चार गुणा 400 मीटर रिले टीम हासिल कर सकी। खेलों के दौरान खिलाड़ियों के चोटिल होने को लेकर भी सवाल उठे हैं।
एथलेटिक्स में ज्योति याराजी ने चोट के कारण महिलाओं की 100 मीटर बाधा दौड़ में हिस्सा ही नहीं लिया और त्रिकूद में प्रवीण चित्रावेल पहले प्रयास में ही चोटिल हो गए। वहीं 400 मीटर बाधादौड़ में यशस पलाक्षा अपनी हीट के बीच से हट गए थे। इसके अलावा एमएमए में वरूण सान्याल स्पर्धा से पहले अनफिट हो गए।
सूत्र ने कहा, ‘‘ कुछ खिलाड़ी खेलों में पहुंचने के बाद चोटों की घोषणा कर रहे थे। अगर एथलीट चोटिल थे तो वे गए कैसे। उन्हें तैयार करने में करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं।
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टॉप्स के जरिये खिलाड़ियों को मनचाही धनराशि आवंटित करने की भी समीक्षा का जिक्र करते हुए सूत्र ने कहा ,‘‘ टॉप्स फंडिंग की समीक्षा निश्चित तौर पर होगी। टॉप्स के खिलाड़ियों को मनचाहे कोचों, विदेश में अभ्यास और हर सुविधा के लिये सरकार ने भारी खर्च किया लेकिन नतीजे अपेक्षित नहीं मिले।’’
उन्होंने आगे कहा ,‘‘ टॉप्स के तहत नौ स्पर्धाओं के 34 खिलाड़ियों पर 27 करोड़ रूपये से अधिक खर्च हुए लेकिन प्रदर्शन निराशाजनक रहा जिनमें बैडमिंटन और निशानेबाजी के प्रमुख खिलाड़ी हैं।’’
खेल मंत्रालय ने एशियाई खेलों से पहले कहा था कि तीन साल के चक्र में खिलाड़ियों को तैयार करने में 700 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए थे। भारत ने 14 खेलों में पहली बार पदक जीते जिनमें साफ्ट टेनिस, एमएमए, रिकर्व तीरंदाजी शामिल है जबकि क्रिकेट , कबड्डी और हॉकी जैसे टीम खेलों में महिला और पुरूष दोनों वर्गों में भारत को स्वर्ण पदक मिले।
महिला हॉकी टीम ने 44 साल बाद एशियाई खेलों में स्वर्ण जीता। पहली बार भारत की महिला और पुरूष दोनों हॉकी टीमों ने एक साथ स्वर्ण जीता और ओलंपिक के लिये भी क्वालीफाई कर लिया।
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