Esha Deol In A Horror-Comedy Ghunghat: बॉलीवुड की जानी-मानी एक्ट्रेस ईशा देओल इन दिनों अपनी अपकमिंग फिल्म ‘घूंघट’ को लेकर चर्चा में हैं। ये फिल्म उनके करियर के लिए एक नया मोड़ साबित होने वाली है, क्योंकि इसमें वे पहली बार हॉरर-कॉमेडी जॉनर में नजर आएंगी। डर, हास्य, रोमांस और फैंटेसी का अनोखा मेल लेकर आ रही ये फिल्म ईशा के लिए खास है क्योंकि वो पहली बार इस तरह के जॉनर में काम कर रही हैं।
ईशा देओल की कमबैक ने हलचल मचा दी हैं
बता दें, इससे पहले भी कई बातें सामने आई थी कि पिता धर्मेंद्र नहीं चाहते थे कि उनकी बेटी कभी फिल्मों में काम करें और अब उनके न होने के बाद ईशा देओल की कमबैक ने हलचल मचा दी हैं। अगर फिल्म की कहानी की बात करें तो फिल्म की कहानी जंगीपुरा नाम के एक रहस्यमयी गांव पर आधारित है, जहां ‘भूरी’ नाम की एक शापित आत्मा का साया मंडराता है। कहानी में भूत-प्रेत की दुनिया और इंसानी जज्बातों का ऐसा संगम है, जो दर्शकों को एक साथ हंसाएगा और डराएगा भी।
ईशा ने इस प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए कहा कि ये फिल्म उनके लिए बिल्कुल नए जॉनर में काम करने का मौका है। उनके मुताबिक कहानी में सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश भी छुपा हुआ है जो दर्शकों के दिल को छू जाएगा।
अपने करियर के इस पड़ाव पर ईशा की सोच पहले से काफी परिपक्व हो चुकी है। वे अब ऐसे किरदारों की तलाश में हैं जो उनकी उम्र, अनुभव और व्यक्तित्व के साथ मेल खाते हों।
आज के दौर में एक्टर्स के लिए बेहतर और सार्थक भूमिकाएं मौजूद हैं
उनका कहना है कि टीनेज लव स्टोरी वाले रोल अब उनके लिए नॉर्मल है। वे ऐसे किरदारों को तवज्जो देती हैं जिनसे वे भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस कर सकें और जो उन्हें एक स्टार्स के रूप में आगे बढ़ाएं। ईशा ने ये भी कहा कि आज के दौर में हर उम्र के एक्टर्स के लिए बेहतर और सार्थक भूमिकाएं मौजूद हैं, जो इंडस्ट्री की बदलती सोच को दर्शाता है।
ईशा देओल और उनके पूर्व पति भरत तख्तानी 2024 में अलग हो गए थे, लेकिन दोनों के बीच आज भी सम्मान और समझदारी का रिश्ता कायम है। हाल ही में दोनों को एक साथ दोस्तों के बीच देखा गया, जिसने सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोरीं है। ईशा ने इस बारे में बेबाकी से कहा कि भले ही वे अलग हो गए हों, लेकिन अपनी दोनों बेटियों राध्या और मिराया की परवरिश में वे और भरत एक मजबूत टीम की तरह काम करते हैं। उनके लिए खुद को ‘सिंगल मॉम’ की लिस्ट में रखना उचित नहीं लगता, क्योंकि बच्चों के मामले में दोनों पक्षों का भरपूर सहयोग हमेशा बना रहता है।


