सिंगाजी थर्मल प्लांट में उन्नत DSM सिस्टम शुरू:रियल-टाइम मॉनिटरिंग से ग्रिड प्रबंधन होगा अधिक प्रभावी; बढ़ेगी बिजली उत्पादन की दक्षता

सिंगाजी थर्मल प्लांट में उन्नत DSM सिस्टम शुरू:रियल-टाइम मॉनिटरिंग से ग्रिड प्रबंधन होगा अधिक प्रभावी; बढ़ेगी बिजली उत्पादन की दक्षता

एमपी पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड ने बिजली उत्पादन और ग्रिड प्रबंधन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। कंपनी के सिंगाजी ताप विद्युत गृह की सभी उत्पादन इकाइयों में केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) के नवीनतम निर्देशों के अनुरूप उन्नत डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म (DSM) सिस्टम सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया गया है। नई प्रणाली के लागू होने से यह पावर प्लांट अब राष्ट्रीय ग्रिड की रियल-टाइम आवश्यकताओं के अनुसार अधिक सटीक, तेज और प्रभावी ढंग से काम कर सकेगा। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी लिमिटेड के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने इस उपलब्धि को आधुनिक विद्युत उत्पादन के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि सटीक पूर्वानुमान, स्मार्ट जनरेशन मैनेजमेंट और संसाधनों के प्रभावी उपयोग में इसकी भूमिका निर्णायक है। यह सिस्टम ग्रिड संतुलन को मजबूत करने के साथ ही कंपनी को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक आधुनिक और तकनीक आधारित व्यवस्था विकसित करने में मदद करेगा। क्या है डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म (DSM)?
डेविएशन सेटलमेंट मैकेनिज्म (DSM) एक नियामकीय व्यवस्था है, जिसे केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग ने वर्ष 2024 में लागू किया था। लाइव मॉनिटरिंग से त्वरित निर्णय लेना हुआ आसान
सिंगाजी ताप विद्युत गृह में स्थापित इस उन्नत सिस्टम के माध्यम से अब ग्रिड फ्रीक्वेंसी, घोषित क्षमता, शेड्यूल्ड जनरेशन और वास्तविक विद्युत उत्पादन की लाइव मॉनिटरिंग एक ही प्लेटफॉर्म पर की जा सकेगी। नियंत्रण कक्ष में लगी बड़ी डिस्प्ले स्क्रीन पर रियल-टाइम आंकड़े देखकर संचालन इंजीनियर तत्काल निर्णय ले सकेंगे। इससे उत्पादन को ग्रिड की मांग के अनुरूप समायोजित करने और संभावित विचलनों (Deviations) को कम रखने में मदद मिलेगी। नवीकरणीय ऊर्जा के दौर में बढ़ी DSM की अहमियत
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, सौर और पवन जैसी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के बढ़ते उपयोग के कारण ग्रिड संचालन पहले की तुलना में काफी जटिल हो गया है। ऐसे में उन्नत DSM सिस्टम आधुनिक विद्युत गृहों के लिए एक अनिवार्य तकनीकी उपकरण बन गया है। इस तकनीक से ग्रिड की स्थिरता में सुधार, परिचालन दक्षता में वृद्धि और नियामकीय अनुपालन सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी।

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