शेखपुरा में शनिवार को भू-अभिलेख एवं परिमाप, बिहार पटना के निदेशक सुहर्ष भगत की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई। यह बैठक समाहरणालय स्थित मंथन सभागार में आयोजित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में चल रहे विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था। निदेशक ने लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के सर्वेक्षण कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। कार्य की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, केवल पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि धरातल पर कोई तकनीकी या व्यावहारिक समस्या आती है, तो उसे तत्काल संबंधित वरिष्ठ पदाधिकारियों से संपर्क कर हल किया जाए। कर्मियों और पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी निदेशक ने चेतावनी दी कि कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बरतने वाले कर्मियों और पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एक गंभीर मुद्दे पर भी चर्चा की, जहाँ अक्सर एक ही पैतृक या निजी भूमि के मामले में एक भाई के नाम पर जमीन दर्ज कर दी जाती है, जबकि दूसरे भाई की हिस्सेदारी वाली जमीन को ‘सरकारी जमीन’ घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने ऐसे संवेदनशील मामलों की सूक्ष्मता से जांच करने का निर्देश दिया ताकि किसी भी भूमि स्वामी के साथ अन्याय न हो। लंबित प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा करने का सख्त आदेश बैठक में जिले में चल रहे सर्वेक्षण कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। कुल 284 राजस्व ग्रामों (मौजा) में से सभी 284 मौजों में सर्वेक्षण प्रक्रिया प्रगति पर है। प्रपत्र 20 (अंतिम प्रकाशन) 223 मौजों में पूर्ण हो चुका है, जबकि 61 मौजे प्रपत्र 08 और प्रपत्र 14 के स्तर पर लंबित हैं। निदेशक ने शेष 61 मौजों में प्रपत्र 08 और 14 की लंबित प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा करने का सख्त आदेश दिया, ताकि शेखपुरा जिला राज्य रैंकिंग में बेहतर पायदान पर बना रहे। बैठक में जिलाधिकारी शेखर आनंद ने निदेशक सुहर्ष भगत को भगवान विष्णु की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एडीएम लखींद्र पासवान, भूमि सुधार उप समाहर्ता मृत्युंजय कुमार, राजस्व विभाग के तमाम वरीय अधिकारी, अमीन, कानूनगो और सर्वेक्षण कर्मी भी उपस्थित थे। शेखपुरा में शनिवार को भू-अभिलेख एवं परिमाप, बिहार पटना के निदेशक सुहर्ष भगत की अध्यक्षता में एक समीक्षा बैठक हुई। यह बैठक समाहरणालय स्थित मंथन सभागार में आयोजित की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य जिले में चल रहे विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था। निदेशक ने लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के लिए दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिले के सर्वेक्षण कार्य को निर्धारित समय-सीमा के भीतर अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। कार्य की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप होनी चाहिए, केवल पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि धरातल पर कोई तकनीकी या व्यावहारिक समस्या आती है, तो उसे तत्काल संबंधित वरिष्ठ पदाधिकारियों से संपर्क कर हल किया जाए। कर्मियों और पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी निदेशक ने चेतावनी दी कि कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बरतने वाले कर्मियों और पदाधिकारियों के विरुद्ध कठोर प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने एक गंभीर मुद्दे पर भी चर्चा की, जहाँ अक्सर एक ही पैतृक या निजी भूमि के मामले में एक भाई के नाम पर जमीन दर्ज कर दी जाती है, जबकि दूसरे भाई की हिस्सेदारी वाली जमीन को ‘सरकारी जमीन’ घोषित कर दिया जाता है। उन्होंने ऐसे संवेदनशील मामलों की सूक्ष्मता से जांच करने का निर्देश दिया ताकि किसी भी भूमि स्वामी के साथ अन्याय न हो। लंबित प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा करने का सख्त आदेश बैठक में जिले में चल रहे सर्वेक्षण कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया। कुल 284 राजस्व ग्रामों (मौजा) में से सभी 284 मौजों में सर्वेक्षण प्रक्रिया प्रगति पर है। प्रपत्र 20 (अंतिम प्रकाशन) 223 मौजों में पूर्ण हो चुका है, जबकि 61 मौजे प्रपत्र 08 और प्रपत्र 14 के स्तर पर लंबित हैं। निदेशक ने शेष 61 मौजों में प्रपत्र 08 और 14 की लंबित प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा करने का सख्त आदेश दिया, ताकि शेखपुरा जिला राज्य रैंकिंग में बेहतर पायदान पर बना रहे। बैठक में जिलाधिकारी शेखर आनंद ने निदेशक सुहर्ष भगत को भगवान विष्णु की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर एडीएम लखींद्र पासवान, भूमि सुधार उप समाहर्ता मृत्युंजय कुमार, राजस्व विभाग के तमाम वरीय अधिकारी, अमीन, कानूनगो और सर्वेक्षण कर्मी भी उपस्थित थे।


