मोतिहारी में अवैध नर्सिंग होम-अल्ट्रासाउंड सेंटर और जांच घरों के खिलाफ जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम कार्रवाई कर रही है। बीते दिनों जिले के विभिन्न प्रखंडों में दर्जनों संस्थानों पर छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान कई संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। आवश्यक लाइसेंस, पंजीकरण और मानकों का अभाव पाए जाने पर कई नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सील किया गया है। संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। प्रशासन की सख्ती से प्राइवेट स्वास्थ्य संस्थानों में हड़कंप प्रशासन की इस सख्ती से जिले के निजी स्वास्थ्य संस्थानों में हड़कंप है। कई संचालक अपने कागजात दुरुस्त कर रहे हैं। कुछ जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। इस बीच, प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में आयुष चिकित्सकों के संगठन ‘नीमा’ ने मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों आयुष डॉक्टर जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी से मुलाकात कर नाराजगी जताई। नीमा संगठन के अध्यक्ष डॉ. खबीर और अन्य चिकित्सकों ने कहा कि विधिवत पंजीकृत और नियमों के तहत सेवा दे रहे आयुष डॉक्टरों के साथ भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ‘आपराधिक व्यवहार’ कर रही है। संस्थानों को सील करना, एफआईआर करना अनुचित डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि बिना समुचित जांच के क्लीनिकों पर छापेमारी, संस्थानों को सील करना और सीधे एफआईआर दर्ज करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि वे अवैध संचालन के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हैं, लेकिन वैध चिकित्सकों को परेशान करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कार्रवाई में स्पष्ट दिशा-निर्देश और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी वहीं, जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने कहा कि यह अभियान जनहित में चलाया जा रहा है। उन्होंने अवैध रूप से संचालित स्वास्थ्य संस्थानों पर रोक लगाने को आवश्यक बताया, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को परेशानी नहीं होगी, लेकिन अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि नीमा संगठन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई है और उनकी मांगों पर स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक कर विचार किया जाएगा। मोतिहारी में अवैध नर्सिंग होम-अल्ट्रासाउंड सेंटर और जांच घरों के खिलाफ जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम कार्रवाई कर रही है। बीते दिनों जिले के विभिन्न प्रखंडों में दर्जनों संस्थानों पर छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान कई संस्थानों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। आवश्यक लाइसेंस, पंजीकरण और मानकों का अभाव पाए जाने पर कई नर्सिंग होम व अल्ट्रासाउंड केंद्रों को सील किया गया है। संचालकों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। प्रशासन की सख्ती से प्राइवेट स्वास्थ्य संस्थानों में हड़कंप प्रशासन की इस सख्ती से जिले के निजी स्वास्थ्य संस्थानों में हड़कंप है। कई संचालक अपने कागजात दुरुस्त कर रहे हैं। कुछ जगहों पर स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुई हैं। इस बीच, प्रशासन की कार्रवाई के विरोध में आयुष चिकित्सकों के संगठन ‘नीमा’ ने मोर्चा खोल दिया है। सैकड़ों आयुष डॉक्टर जिला मुख्यालय पहुंचे और जिलाधिकारी से मुलाकात कर नाराजगी जताई। नीमा संगठन के अध्यक्ष डॉ. खबीर और अन्य चिकित्सकों ने कहा कि विधिवत पंजीकृत और नियमों के तहत सेवा दे रहे आयुष डॉक्टरों के साथ भी स्वास्थ्य विभाग की टीम ‘आपराधिक व्यवहार’ कर रही है। संस्थानों को सील करना, एफआईआर करना अनुचित डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि बिना समुचित जांच के क्लीनिकों पर छापेमारी, संस्थानों को सील करना और सीधे एफआईआर दर्ज करना अनुचित है। उन्होंने कहा कि वे अवैध संचालन के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई का समर्थन करते हैं, लेकिन वैध चिकित्सकों को परेशान करना न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने कार्रवाई में स्पष्ट दिशा-निर्देश और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की। अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी वहीं, जिलाधिकारी सौरभ जोरवाल ने कहा कि यह अभियान जनहित में चलाया जा रहा है। उन्होंने अवैध रूप से संचालित स्वास्थ्य संस्थानों पर रोक लगाने को आवश्यक बताया, ताकि मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने आश्वस्त किया कि नियमों का पालन करने वाले संस्थानों को परेशानी नहीं होगी, लेकिन अनियमितता पाए जाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि नीमा संगठन के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई है और उनकी मांगों पर स्वास्थ्य विभाग के साथ बैठक कर विचार किया जाएगा।


