अमेरिका-ईरान युद्ध में नया मोड़! होर्मुज टेंशन के बीच थाईलैंड ने निकाला नया रास्ता

अमेरिका-ईरान युद्ध में नया मोड़! होर्मुज टेंशन के बीच थाईलैंड ने निकाला नया रास्ता

Thailand Land Bridge Project: होर्मुज स्ट्रेट को लेकर दुनिया में टेंशन है। क्योंकि इसी अहम समुद्री मार्ग से दुनिया का 20 प्रतिशत कच्चा तेल-गैस आयात होता है। नाकेबंदी के कारण सब कुछ ठप पड़ गया है। तेल-गैस संकट से महंगाई बढ़ी है। पड़ोसी देश पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में तेल-गैस के कीमत आसमन छू रहा है। जनता बेहाल है।

Hormuj Strait
होर्मुज स्ट्रेट

अमेरिका-ईरान की सहमति से सिर्फ एक दिन के लिए होर्मुज स्ट्रेट खुला। लेकिन 24 घंटे में फिर बंद कर दिया गया। अमेरिका ने बाहर से नाकेबंदी कर रखी है तो वहीं ईरान ने अंदर से ब्लॉकेड कर दिया। दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। लेकिन अब इसका समाधान थाईलैंड निकलेगा! चलिए जानते हैं कैसे?

मलक्का स्ट्रेट से निकलेगा समाधान

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और होर्मुज संकट ने पूरी दुनिया की सप्लाई चेन पर असर डाला है। इसी बीच थाईलैंड ने एक बड़ा कदम उठाया है।

MALACCA
फोटो में मलक्का स्ट्रेट (सोर्स: विकिपीडिया)

दरअसल, थाईलैंड अब 31 बिलियन डॉलर के लैंड ब्रिज प्रोजेक्ट पर फिर से काम शुरू कर रहा है। मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त शिपिंग रूट्स में से एक है। यह लैंड ब्रिज अंडमान सागर को थाईलैंड की खाड़ी से जोड़ेगा। इससे जहाजों को लंबा चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और सामान की डिलीवरी 5 दिन पहले हो जाएगी। क्योंकि शिप को पूरा घूम के नहीं जाना पड़ेगा।

सीधे शब्दों में कहें तो, अगर यह प्रोजेक्ट सफल होता है, तो यह दुनिया के शिपिंग रूट्स को बदल सकता है और ग्लोबल ट्रेड को एक नया, तेज और सुरक्षित रास्ता दे सकता है।

लैंड ब्रिज प्रोजेक्ट के बारे में जानें

थाईलैंड का लैंड ब्रिज एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसकी लागत करीब 31 बिलियन डॉलर बताई जा रही है। इसका मकसद दो बड़े पोर्ट बनाना है- एक अंडमान सागर के किनारे रानॉन्ग में और दूसरा थाईलैंड की खाड़ी के पास चुम्फॉन में। इन दोनों को 90 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा, जिसमें हाईवे, रेलवे और तेल पाइपलाइन शामिल होगी।

यह प्रोजेक्ट इतना बड़ा है कि यह दुनिया के सबसे व्यस्त पोर्ट्स को टक्कर दे सकता है। दरअसल, यह पुराने क्रा कैनाल प्रोजेक्ट का नया विकल्प है, जिसे पर्यावरण और सुरक्षा कारणों से रोक दिया गया था।

हालांकि, यह प्रोजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है। पहले भी इसे विरोध और राजनीतिक कारणों से रोकना पड़ा था, लेकिन अब सरकार फिर से निवेशकों को जोड़ने में लगी है और 2026 के अंत तक काम शुरू करने की योजना है।

थाईलैंड इसे सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि आर्थिक गेमचेंजर मानता है, जिससे GDP बढ़ सकती है। साथ ही, होर्मुज और मलक्का जैसे व्यस्त समुद्री रास्तों पर बढ़ते खतरे के बीच यह ग्लोबल ट्रेड के लिए एक सुरक्षित विकल्प भी बन सकता है।

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