गोरखपुर के मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) के 11वें दीक्षांत समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में विश्वविद्यालय में विभिन्न समितियों के समन्वयकों की बैठक कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा की अध्यक्षता में अटल भवन के बैठक कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में दीक्षांत समारोह की तैयारियों की विस्तार से समीक्षा की गई और कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में कुलसचिव सी.पी. प्रियदर्शी समेत विभिन्न समितियों के संयोजक और समन्वयक उपस्थित रहे। करीब ढाई घंटे तक चली बैठक में समारोह को भव्य और यादगार बनाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई। 30 जून तक पूरा होगा मल्टीपर्पज हॉल का मरम्मत कार्य बैठक के दौरान कुलपति ने कुलसचिव और संबंधित परियोजना अधिकारी को निर्देश दिया कि मल्टीपर्पज हॉल के मरम्मत कार्य को हर हाल में 30 जून तक पूरा कराया जाए। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह की सभी तैयारियां समय पर पूरी हों, इसके लिए आवश्यक कार्यों में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए। अतिथियों को भेंट किए जाएंगे टेराकोटा स्मृति चिह्न दीक्षांत समारोह में इस बार गोरखपुर की प्रसिद्ध टेराकोटा कला को विशेष स्थान दिया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों को टेराकोटा से बने स्मृति चिह्न भेंट किए जाएंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे गोरखपुर की पारंपरिक कला को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय कारीगरों, किसानों तथा लघु उद्यमियों को रोजगार और आय के नए अवसर प्राप्त होंगे। साथ ही इस पारंपरिक कला के संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। इस व्यवस्था की जिम्मेदारी मंच समिति के समन्वयक प्रो. बी.के. पांडेय को सौंपी गई है। विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर बनेगा प्रमोशनल वीडियो बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों, विशेषताओं और उपलब्ध सुविधाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक विशेष प्रमोशनल वीडियो तैयार कराया जाएगा। इस वीडियो का प्रदर्शन दीक्षांत समारोह सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में किया जाएगा। साथ ही इसे विश्वविद्यालय के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी साझा किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग विश्वविद्यालय की गतिविधियों और उपलब्धियों से परिचित हो सकें। इसकी जिम्मेदारी कुलसचिव को दी गई है। इस बार एलुमनी देंगे छात्रों को उपाधियां दीक्षांत समारोह में इस बार एक नई व्यवस्था लागू की जाएगी। अब तक केवल स्वर्ण पदक विजेताओं और पीएचडी विद्यार्थियों को मंच से कुलाधिपति द्वारा उपाधि प्रदान की जाती थी, जबकि अन्य छात्रों को उनके विभागाध्यक्ष विभागों में डिग्री देते थे। इस बार निर्णय लिया गया है कि प्रत्येक विभाग अपने किसी प्रतिष्ठित और वरिष्ठ पूर्व छात्र (एलुमनी) को समारोह में आमंत्रित करेगा। जिन विद्यार्थियों को मुख्य मंच से उपाधि नहीं मिलेगी, उन्हें संबंधित विभागों में आमंत्रित एलुमनी द्वारा सम्मानपूर्वक उपाधि प्रदान की जाएगी। इससे वर्तमान छात्रों को अपने सफल पूर्व छात्रों से जुड़ने और प्रेरणा लेने का अवसर मिलेगा। स्कूलों के बच्चे और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां भी बनेंगी हिस्सा पिछले वर्षों की तरह इस बार भी स्कूलों के बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों को दीक्षांत समारोह में शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ेगी और कार्यक्रम अधिक व्यापक स्वरूप में आयोजित हो सकेगा। जल्द भेजा जाएगा मुख्य अतिथि के नामों का प्रस्ताव बैठक में यह भी तय किया गया कि मुख्य अतिथि के लिए संभावित नामों का पैनल और समारोह का विस्तृत कार्यक्रम जल्द ही कुलाधिपति कार्यालय की स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा। समय पर पूरी हों तैयारियां समीक्षा बैठक के दौरान कुलपति ने सभी समितियों के समन्वयकों को निर्देश दिया कि जिन कार्यों के लिए प्रशासनिक या वित्तीय अनुमोदन की आवश्यकता है, उनसे संबंधित पत्रावलियां जल्द प्रस्तुत की जाएं। उन्होंने कहा कि समय रहते अनुमति प्राप्त कर लेने से तैयारियों में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी और दीक्षांत समारोह का आयोजन सफलतापूर्वक किया जा सकेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य इस बार के दीक्षांत समारोह को अधिक भव्य, व्यवस्थित और यादगार बनाना है, ताकि विद्यार्थियों, अभिभावकों और अतिथियों को एक बेहतर अनुभव मिल सके।


