नालंदा जिले में जमीन की पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था ने अब पूरी रफ्तार पकड़ ली है। व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दौर की झिझक और भ्रांतियों को पीछे छोड़ते हुए क्रेता-विक्रेता अब इसके लाभ को तेजी से अपनाने लगे हैं। अकेले बिहारशरीफ निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 65 से 70 दस्तावेजों का निबंधन हो रहा है। वहीं, हिलसा और राजगीर अनुमंडलीय निबंधन कार्यालयों के आंकड़ों को जोड़ लें, तो जिले भर में रोजाना करीब 110 जमीनों की खरीद-बिक्री पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न हो रही है। जिला अवर निबंधक मनीष कुमार ने बताया कि अगस्त 2026 से प्रभावी हुई इस पेपरलेस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और आम जनता के समय की बचत करना है। पहले कागजी प्रक्रियाओं और फाइलों के चक्कर में लोगों को काफी समय देना पड़ता था, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया सुगम और त्वरित हो गई है। रजिस्ट्री प्रक्रिया संपन्न होते ही खरीदार को मूल दस्तावेज सौंप दिया जाता है। इसके साथ ही क्रेता के निबंधित मोबाइल नंबर पर एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना के साथ रजिस्टर्ड डीड की सुरक्षित पीडीएफ कॉपी भी तुरंत भेज दी जाती है। क्यूआर कोड स्कैन कर कभी भी निकाल सकेंगे कॉपी अवर निबंधक के अनुसार, डिजिटल डीड पर एक सुरक्षित क्यूआर कोड अंकित रहता है। इसे किसी भी स्मार्टफोन से स्कैन कर दस्तावेज को कभी भी देखा, डाउनलोड या प्रिंट कराया जा सकता है। मूल प्रति के खो जाने की स्थिति में भी अब कार्यालयों के चक्कर काटने की मजबूरी समाप्त हो गई है। साथ ही, इन दस्तावेजों पर प्राधिकृत डिजिटल हस्ताक्षर होने के कारण किसी भी प्रकार की नकल, छेड़छाड़ या फर्जीवाड़ा करना नामुमकिन हो गया है। डिजिटल रिकॉर्ड सर्वर पर पूरी तरह सुरक्षित रहने से भविष्य में भी भू-स्वामियों को अपने अभिलेख हासिल करने में कोई परेशानी नहीं होगी। दिक्कत दूर करने को निबंधन कार्यालय में बना हेल्प डेस्क प्रक्रिया को जनसुलभ बनाने के लिए निबंधन कार्यालय परिसर में एक विशेष ‘हेल्प डेस्क’ की स्थापना की गई है। यहां तैनात कर्मी क्रेता एवं विक्रेताओं को पेपरलेस रजिस्ट्री से जुड़ी तमाम तकनीकी व कानूनी जानकारियों से अवगत करा रहे हैं। ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, दस्तावेज अपलोडिंग और प्रक्रिया संबंधी किसी भी प्रकार की शंका का समाधान इसी डेस्क पर किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को बिचौलियों के चंगुल में फंसे बिना सीधे सेवा का लाभ मिल रहा है। नालंदा जिले में जमीन की पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था ने अब पूरी रफ्तार पकड़ ली है। व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दौर की झिझक और भ्रांतियों को पीछे छोड़ते हुए क्रेता-विक्रेता अब इसके लाभ को तेजी से अपनाने लगे हैं। अकेले बिहारशरीफ निबंधन कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 65 से 70 दस्तावेजों का निबंधन हो रहा है। वहीं, हिलसा और राजगीर अनुमंडलीय निबंधन कार्यालयों के आंकड़ों को जोड़ लें, तो जिले भर में रोजाना करीब 110 जमीनों की खरीद-बिक्री पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न हो रही है। जिला अवर निबंधक मनीष कुमार ने बताया कि अगस्त 2026 से प्रभावी हुई इस पेपरलेस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और आम जनता के समय की बचत करना है। पहले कागजी प्रक्रियाओं और फाइलों के चक्कर में लोगों को काफी समय देना पड़ता था, लेकिन अब पूरी प्रक्रिया सुगम और त्वरित हो गई है। रजिस्ट्री प्रक्रिया संपन्न होते ही खरीदार को मूल दस्तावेज सौंप दिया जाता है। इसके साथ ही क्रेता के निबंधित मोबाइल नंबर पर एसएमएस और व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना के साथ रजिस्टर्ड डीड की सुरक्षित पीडीएफ कॉपी भी तुरंत भेज दी जाती है। क्यूआर कोड स्कैन कर कभी भी निकाल सकेंगे कॉपी अवर निबंधक के अनुसार, डिजिटल डीड पर एक सुरक्षित क्यूआर कोड अंकित रहता है। इसे किसी भी स्मार्टफोन से स्कैन कर दस्तावेज को कभी भी देखा, डाउनलोड या प्रिंट कराया जा सकता है। मूल प्रति के खो जाने की स्थिति में भी अब कार्यालयों के चक्कर काटने की मजबूरी समाप्त हो गई है। साथ ही, इन दस्तावेजों पर प्राधिकृत डिजिटल हस्ताक्षर होने के कारण किसी भी प्रकार की नकल, छेड़छाड़ या फर्जीवाड़ा करना नामुमकिन हो गया है। डिजिटल रिकॉर्ड सर्वर पर पूरी तरह सुरक्षित रहने से भविष्य में भी भू-स्वामियों को अपने अभिलेख हासिल करने में कोई परेशानी नहीं होगी। दिक्कत दूर करने को निबंधन कार्यालय में बना हेल्प डेस्क प्रक्रिया को जनसुलभ बनाने के लिए निबंधन कार्यालय परिसर में एक विशेष ‘हेल्प डेस्क’ की स्थापना की गई है। यहां तैनात कर्मी क्रेता एवं विक्रेताओं को पेपरलेस रजिस्ट्री से जुड़ी तमाम तकनीकी व कानूनी जानकारियों से अवगत करा रहे हैं। ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, दस्तावेज अपलोडिंग और प्रक्रिया संबंधी किसी भी प्रकार की शंका का समाधान इसी डेस्क पर किया जा रहा है, जिससे आम लोगों को बिचौलियों के चंगुल में फंसे बिना सीधे सेवा का लाभ मिल रहा है।

