25 फीसदी सब्जियों में मिले घातक केमिकल:पुराने आलू को एसिड से धोकर नया बना रहे, मशरूम पर ब्लीचिंग-व्हाइटनर का स्प्रे

25 फीसदी सब्जियों में मिले घातक केमिकल:पुराने आलू को एसिड से धोकर नया बना रहे, मशरूम पर ब्लीचिंग-व्हाइटनर का स्प्रे

मिठाइयों और मसालों में मिलावट के खुलासे के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने पटना की सब्जी मंडियों की पड़ताल की तो मुनाफे के लिए सेहत से खिलवाड़ का खौफनाक सच सामने आया। भास्कर टीम ने दीघा हाट, राजापुर पुल, पुनाईचक और नेहरू नगर मंडी से सब्जियों के सैंपल एकत्र किए। निजी और मान्यता प्राप्त कॉन्गस्मेड फूड लैब में जांच कराई गई तो पता चला कि मंडियों में बिकने वाली 20-25 फीसदी सब्जियों में प्रतिबंधित केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है। कोल्ड स्टोरेज के पुराने आलू को एसिड से धोकर और आर्टिफिशियल लाल मिट्टी में लपेटकर ‘ताजा नया’ बनाकर बेचा जा रहा है। वहीं, मशरूम को सफेद दिखाने के लिए ब्लीचिंग एजेंट, पोटैशियम बाइसल्फेट और व्हाइटनर का स्प्रे किया जा रहा है। सब्जियों को हरी और ताजी दिखाने के लिए मैसेकाइट ग्रीन और रसायनिक रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। नमी बरकरार रखने के लिए वैक्स का लेप चढ़ाया जा रहा है। लैब रिपोर्ट : किस सब्जी में क्या मिला आलू (सभी 5 सैंपल फेल) : पुराने आलू के काले धब्बे और छिलके हटाने के लिए तेजाब (एसिड वॉश) का उपयोग किया गया, जिससे ऊपरी परत झुलसी मिली। इसके बाद लाल-भूरे रंग की कृत्रिम मिट्टी में रगड़कर इसे नया रूप दिया गया। मशरूम (3 में से 2 फेल) : मटमैले दाग हटाने और सफेद दिखाने के लिए ब्लीचिंग एजेंट और पोटैशियम बाइसल्फेट के घोल का इस्तेमाल मिला। बोरिंग रोड-पुनाईचक के एक पैकेट पर व्हाइटनर के अंश मिले। { बैंगन (5 में से 3 फेल) : नमी न सूखे और चमक बनी रहे, इसके लिए इंडस्ट्रियल पेट्रोलियम वैक्स की परत चढ़ाई गई थी। परवल और भिंडी (परवल के 5 में से 3, भिंडी के 5 में से 1 फेल) : बासी होने से छिपाने और गहरा हरा दिखाने के लिए प्रतिबंधित केमिकल मैलाकाइट ग्रीन के घोल में डुबोया गया था। खतरा क्या….. कॉन्गस्मेड फूड लैब के विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार के मुताबिक, टॉक्सिक केमिकल्स से लिवर सिरोसिस और किडनी फेल होने का जोखिम बढ़ता है। मैलाकाइट ग्रीन और कृत्रिम रंगों में कार्सिनोजेनिक तत्व होते हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं। बचाव के उपाय सब्जी को पकाने से पहले हल्के गुनगुने पानी में नमक मिलाकर 15-20 मिनट तक भिगोकर रखें। इसके बाद साफ पानी में रगड़कर धोएं। मिठाइयों और मसालों में मिलावट के खुलासे के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने पटना की सब्जी मंडियों की पड़ताल की तो मुनाफे के लिए सेहत से खिलवाड़ का खौफनाक सच सामने आया। भास्कर टीम ने दीघा हाट, राजापुर पुल, पुनाईचक और नेहरू नगर मंडी से सब्जियों के सैंपल एकत्र किए। निजी और मान्यता प्राप्त कॉन्गस्मेड फूड लैब में जांच कराई गई तो पता चला कि मंडियों में बिकने वाली 20-25 फीसदी सब्जियों में प्रतिबंधित केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है। कोल्ड स्टोरेज के पुराने आलू को एसिड से धोकर और आर्टिफिशियल लाल मिट्टी में लपेटकर ‘ताजा नया’ बनाकर बेचा जा रहा है। वहीं, मशरूम को सफेद दिखाने के लिए ब्लीचिंग एजेंट, पोटैशियम बाइसल्फेट और व्हाइटनर का स्प्रे किया जा रहा है। सब्जियों को हरी और ताजी दिखाने के लिए मैसेकाइट ग्रीन और रसायनिक रंगों का प्रयोग किया जा रहा है। नमी बरकरार रखने के लिए वैक्स का लेप चढ़ाया जा रहा है। लैब रिपोर्ट : किस सब्जी में क्या मिला आलू (सभी 5 सैंपल फेल) : पुराने आलू के काले धब्बे और छिलके हटाने के लिए तेजाब (एसिड वॉश) का उपयोग किया गया, जिससे ऊपरी परत झुलसी मिली। इसके बाद लाल-भूरे रंग की कृत्रिम मिट्टी में रगड़कर इसे नया रूप दिया गया। मशरूम (3 में से 2 फेल) : मटमैले दाग हटाने और सफेद दिखाने के लिए ब्लीचिंग एजेंट और पोटैशियम बाइसल्फेट के घोल का इस्तेमाल मिला। बोरिंग रोड-पुनाईचक के एक पैकेट पर व्हाइटनर के अंश मिले। { बैंगन (5 में से 3 फेल) : नमी न सूखे और चमक बनी रहे, इसके लिए इंडस्ट्रियल पेट्रोलियम वैक्स की परत चढ़ाई गई थी। परवल और भिंडी (परवल के 5 में से 3, भिंडी के 5 में से 1 फेल) : बासी होने से छिपाने और गहरा हरा दिखाने के लिए प्रतिबंधित केमिकल मैलाकाइट ग्रीन के घोल में डुबोया गया था। खतरा क्या….. कॉन्गस्मेड फूड लैब के विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार के मुताबिक, टॉक्सिक केमिकल्स से लिवर सिरोसिस और किडनी फेल होने का जोखिम बढ़ता है। मैलाकाइट ग्रीन और कृत्रिम रंगों में कार्सिनोजेनिक तत्व होते हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म देते हैं। बचाव के उपाय सब्जी को पकाने से पहले हल्के गुनगुने पानी में नमक मिलाकर 15-20 मिनट तक भिगोकर रखें। इसके बाद साफ पानी में रगड़कर धोएं।  

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